- दो बड़ी महापंचायत के बाद तीसरी महापंचायत हो चुकी मथुरा में
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आंसू चिंगारी से ज्वाला बन गए हैं। पहले मुजफ्फरनगर सिटी में भाकियू ने महापंचायत की, लेकिन इसके बाद बड़ौत (बागपत) में किसानों की महापंचायत हुई। दोनों ही पंचायत बड़ी थी। भीड़ का आंकलन कर पाना मुश्किल है।
दो बड़ी महापंचायत के बाद तीसरी महापंचायत मथुरा में हो चुकी हैं। चौथी महापंचायत बिजनौर में होने जा रही है। महापंचायत में जिस तरह से किसानों की भीड़ जुट रही है, उससे भाजपा की परेशानी बढ़ गई है। भाजपा की मुसीबत लगता है कम होने वाली नहीं है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि मुजफ्फरनगर में जिस पंचायत को भाकियू के राष्टÑीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने बुलाया था, वह पंचायत रात नौ बजे कॉल की गई थी। इसमें कहीं टैÑक्टरों में तेल नहीं डलवाया। गांव-गांव पंचायत नहीं हुई। प्रचार भी कुछ नहीं किया।
सो कॉस नोटिस पर महापंचायत कॉल की गई थी, जिसमें किसानों की जिस तरह से भीड़ जुटी, उसमें तमाम रिकॉर्ड टूट गए। इससे लग रहा है कि किसानों में सरकार के खिलाफ आक्रोश फूट गया हैं। किसानों का गुस्सा यहीं नही थमा, बल्कि बागपत के बड़ौत तहसील के मैदान में बड़ी महापंचायत की।
यह महापंचायत सर्वखाप पंचायतों ने आहूत की थी। पंचायत में भीड़ भी जुटी, साथ ही कहा गया कि बिजनौर में सोमवार को बड़ी पंचायत होगी। किसानों को जुटाने के लिए इसमें कोई प्रचार नहीं किया जा रहा है। किसान खुद ही महापंचायत में पहुंच रहे हैं। किसानों में सरकार के रवैये को लेकर सख्त नाराजगी है।
मथुरा में भी महापंचायत किसानों ने की, जिसमें रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी किसानों के समर्थन में पहुंचे थे। बड़ा सवाल यह है कि वेस्ट यूपी में जिस तरह से किसानों की भीड़ महापंचायतों में जुट रही है, उसने भाजपा की मुसीबत बढ़ा दी है।
वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव हैं, जिसमें भाजपा को किसानों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता हैं। अब भाजपा किसानों को मना पाती है या फिर इसी तरह से नारागजी बढ़ती जाएगी, फिलहाल यह कहना मुश्किल है, मगर इतना अवश्य है कि भाजपा की वेस्ट यूपी में आने वाले चुनावों में काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ेगा।
अब वेस्ट में भाजपा का हिन्दु-मुस्लिम कार्ड चलेगा, यह संभव नहीं दिख रहा है। क्योंकि वेस्ट में पहले मुस्लिम व किसानों का जबरदस्त गठजोड़ हुआ करता था। इसी गठजोड़ के चलते चौधरी चरण सिंह या फिर चौधरी अजित सिंह की पार्टी जीत दर्ज करती थी।
जब से मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ, तब से जाट व मुस्लिम बंट गए थे। अब फिर से जाट-मुस्लिम व अन्य किसानों का गठजोड़ बनता हुआ दिखाई दे रहा हैं, जिसके चलते भाजपा को भारी नुकसान की संभावनाएं राजनीतिक विशेषज्ञ जता रहे हैं।

