Monday, March 23, 2026
- Advertisement -

स्टाफ को वेतन की किल्लत, ठेकेदार पर मेहरबानी

  • बोर्ड में सप्लीमेंटरी एजेंडा कराया था शामिल
  • कैंट टोल के 11 प्वाइंटों पर किए गए अवैध निर्माण पर बजाय कार्रवाई के इनाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: खजाने की खस्ता हालत के चलते स्टॉफ के लिए जहां वेतन व पेंशन आदि के भुगतान की किल्लत हो रही है। वहीं, दूसरी ओर कैंट बोर्ड के सदस्य पूरी तरह से ठेकेदार पर मेहरबान हैं। करीब 40 लाख रुपये का भुगतान टोल ठेकेदार को दिखाने का कारनामा बोर्ड के सदस्यों ने कर दिखाया है।

जिस बोर्ड बैठक में ठेका समाप्त कर पब्लिक को राहत देने के नाम पर जो सदस्य अपनी पीठ थपथपा रहे थे, उन्होंने जो रकम स्टाफ की सेलरी में यूज की जानी थी उसको ठेकेदार को बतौर इनाम की राशि देने का रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि जानकारों की मानें तो तकनीकी रूप से ठेकेदार पर करीब दो करोड़ से ज्यादा की रकम कैंट बोर्ड की निकलती थी, लेकिन बजाय इस रकम का तकादा करने के बोर्ड के सदस्यों ने उल्टे ठेकेदार को 40 लाख रुपये के भुगतान का रास्ता साफ किया दिया।

अवैध निर्माण के नाम पर भुगतान

40 लाख रुपये की यह रकम ठेकेदार को 11 टोल प्वाइंटों पर कथित रूप से कराए गए निर्माण संबंधी कार्यों के लिए दी गई है। जबकि जानकारों का कहना है कि कैंट ऐक्ट तथा व्हिकल एंट्री फीस के लिए जो टर्म एंड कंडीशन हैं। उसके अनुसार जो जहां है, वैसा की तर्ज पर ही ठेका दिया गया है।

यदि इस बात को सही मान लिया जाए तो बड़ा सवाल ये है कि 40 लाख के भुगतान कराने की बोर्ड के सदस्यों के पीछे की मंशा क्या है। या फिर यह मान लिया जाए कि इस बड़ी रकम में भी बंदरबाट होनी है। हालांकि सच्चाई क्या यह तो बोर्ड के वो निर्वाचित सदस्य ही बात सकते हैं। जिनकी कारगुजारी के चलते ठेकेदार को 40 लाख रुपये की रकम के भुगतान का रास्ता साफ हुआ है वो भी उस स्थिति में जब स्टाफ के लिए सेलरी की बुरी किल्लत हो रही है।

बोर्ड ने क्यों नहीं कराया काम

40 लाख रुपये के भुगतान को लेकर बोर्ड प्रशासन भी सवालों के घेरे में है। पाई-पाई को परेशान कैंट बोर्ड प्रशासन ने यदि बेहद जरूरी था तो फिर अपने ठेकेदार से यह काम क्यों नहीं कराया। टोल ठेकेदार के भरोसे क्यों यह काम छोड़ दिया गया या फिर यह मान लिया जाए कि 40 लाख के खेल में सभी के हिस्से में कुछ न कुछ हिस्सा आ रहा है। इसके चलते बोर्ड ने अपने ठेकेदारों से कार्य कराने के बजाय जो टोल ठेकेदार ने बताया वो सही मान लिया। हालांकि पता चला है कि टोल के ठेकेदार ने इस मद में करीब 95 लाख रुपये की रिकवरी कैंट बोर्ड पर निकाली थी।

सप्लीमेंटरी एजेंडा पर सवाल

कैंट बोर्ड के खजाने से 40 लाख के भुगतान के लिए जो खेल किया गया है उसको लेकर भी नियत पर सवाल उठ रहे हैं। पूछा जा रहा है कि यदि ईमानदार थे तो फिर बोर्ड बैठक के लिए जो एजेंडा भेजा गया था। उसमें इसका जिक्र क्यों नहीं कराया गया। बोर्ड बैठक के अंत में जिस प्रकार से सप्लीमेंटरी एजेंडा लाकर प्रस्ताव को आनन-फानन में पास कराया गया।

उससे बोर्ड के तमाम सदस्यों पर सवाल उठ रहे हैं। बोर्ड के सदस्य ही नहीं बल्कि अफसरों जिन्होंने भारी भरकम रकम की भुगतान की सहमति दी है, उन पर भी सवाल है। सवाल ये है कि उनकी निष्ठा कैंट बोर्ड और उसके स्टाफ के प्रति है या फिर टोल ठेकेदार के प्रति। इस सवाल का उत्तर दिया जाना चाहिए।

अवैध निर्माण के आरोपी बने कैंट अफसरों के मेहमान

कैंट क्षेत्र में अवैध निर्माण यदि रुके भी तो कैसे जिनके खिलाफ अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण व एफआईआर तथा पीपीई ऐक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। कैंट के कुछ बडे अफसरों के ऐसे लोग मेहमान बने हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि ऐसे लोग कैंट के दो बडे अफसरों की पुरानी अदावत का फायदा उठाकर अपना कारज सिद्ध करने का रास्ता तलाशने में लगे हैं।

कैंट बोर्ड व डीईओ कार्यालय के दो बडे अफसरों में पुरानी अदावत है। उनके बीच की यह तनातनी किसी से छिपी नहीं है। इसी का फायदा वो लोग उठा रहे हैं जिन पर सेना द्वारा जिस बंगले को रिज्यूम किए जाने को कहा गया है। वहां दिन रात अवैध निर्माण करा रहे हैं। इस बंगले के आगे से दिन में कई बार कैंट प्रशासन के तमाम आला अधिकारी निकलते हैं।

डीईओ कार्यालय भी यहां किए जा रहे बडे अवैध निर्माण से अंजान नहीं, लेकिन इसके बाद भी बजाए ध्वस्तीकरण के आरोपियों को मेहमान बनाकर उनकी हौसला अफजाई की जा रही है। ये पूरा मामला करियप्पा रोड स्थित बंगला 105 से जुड़ा है। सेना की ओर से इसको रिज्यूम करने के लिए सीईओ और डीईओ को पहले ही भेजा जा चुका है।

इतना ही नहीं सेना के 510 बेस वर्कशॉप समेत एक अन्य सैन्य यूनिट के मेजर रैंक के अफसरों ने बंगले को लेकर अपनी रिपोर्ट भी सेना को सौंप दी है। हैरानी तो इस बात की है कि रिज्यूम की प्रक्रिया के चलते ही इस बंगले का एक हिस्सा जिसकी जरूरत सेना ने बताई थी उसको होटल मालिक बंधुओं को न केवल बेच दिया।

बताया जाता है कि बेचा भी इस शर्त पर गया है कि इसमें भरा पूरा निर्माण भी कराया जाएगा। और उसके चलते माना जा रहा है कि इस बंगले में इन दिनों अवैध निर्माण चल रहा है।

सांसद के प्रयास से मिल सकी किराए में बड़ी राहत

02 2

सांसद राजेन्द्र अग्रवाल के प्रयास से कैंट बोर्ड के किरायेदारों को बड़ी राहत मिल सकी। इससे पहले किरायेदार तमाम दरों पर माथा रगड़ चुके थे, लेकिन कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही थी। किराये में बढ़ोतरी का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पारित किया गया था।

इसको लेकर सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने शुरू में ही अपना विरोध भी दर्ज करा दिया था। उन्होंने कहा था कि लॉकडाउन के बाद इतनी ज्यादा बढ़ोतरी सहन संभव नहीं। इस मामले को लेकर कैंट बोर्ड के किरायेदारों ने तमाम लोगों से फरियाद की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला सका।

बाद में जब मामला भाजपा नेता गौरव गोयल के जरिये सांसद तक पहुंचा तथा संपत्ति में किरायेदारों ने पूरे मामले से अवगत कराया तो सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने इसको लेकर एक पत्र कैंट बोर्ड के अध्यक्ष तथा सीईओ को लिखा।

03

भाजपा के महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंहल ने भी इसको लेकर जबरदस्त पैरवी की। इसका असर भी देखने को मिला।

बाद में मामले की गंभीरता को समझते हुए कैंट बोर्ड अध्यक्ष व सीईओ ने इसका संज्ञान लिया। दोनों बडे सैन्य अफसरों की पहल से ही इस समस्या का समाधन हो सका। किराये में जो अंधाधुंध वृद्धि कैंट बोर्ड ने कर दी थी उसको वापस ले लिया गया है।

इतना ही नहीं वृद्धि के नाम पर सिर्फ मामूली सा किराया बढ़ाया गया है। इस बढ़ोतरी को ऊंट के मुंह में जीरा सरीखा माना जा रहा है। अंधाधुंध की गई वृद्धि से राहत मिलने पर कैंट बोर्ड के तमाम किरायेदारों ने सांसद राजेन्द्र अग्रवाल व भाजपा के महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंहल तथा मामले में मदद करने वाले गौरव गोयल का आभार जताया है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP Cabinet Decisions 2026: किसानों को MSP में बढ़ोतरी, गोरखपुर बनेगा सोलर सिटी

जनवाणी ब्यूरो | लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक...

हमारी धार्मिक अवधारणाएं विज्ञान सम्मत

राजेंद्र बज वर्तमान दौर में सारी दुनिया हमारी अपनी गौरवशाली...

गैस को देखने का अपना अपना नजरिया

समस्या गैस की हो, तो प्राथमिक स्तर पर परीक्षण...
spot_imgspot_img