- करीब दो साल से पहचान छिपा कर रहे थे जीएसटी के नाम पर फर्जीवाड़ा
- करीब दर्जन भर स्थानों पर छापेमारी के बाद अफसरों के हत्थे चढ़ सका आरोपी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: फर्जी कंपनियों की फौज खड़ी कर 42 करोड़ की भारी भरकम रकम का चूना लगाने वाले को पुलिस ने जेल भेजा दिया है। हालांकि इस तक पहुंचने में जीएसटी के अफसरों को कई दिन तक पसीना बहाना पड़ा। तब कहीं जाकर मवाना निवासी आरोपी विकास जैन को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचा जा सका।
कार्रवाई में 2.23 करोड़ की नकदी भी बरामद की गई है। हालांकि इस शातिर ने पेपरों में अपना पता गाजियाबाद क्रॉसिंग रिपब्लिक में रहता है। जीएसटी के गढ़ रोड स्थित सेंट्रल कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में प्रिंसिपल कमिश्नर सत्येंद्र विक्रम सिंह ने पूरे मामले की जानकारी मीडिया को दी। इसमें अंकित गहलौत असिस्टेंट कमिश्नर, राजकेश कुमार ज्वाइंट कमिश्नर, देवेन्द्र सिंह सुपरीटेंडेंट आदि भी मौजूद रहे।

टैक्सी फर्म चलाने वाले इस आरोपी तक पहुंचने के लिए एक टीम बनाई गई थी। इस टीम में इंस्पेक्टर दीपक कुमार श्रीवास्तव, राजकुमार, आलोक कुमार, विपुल व कमल सिंह आदि भी शामिल थे। प्रिंसिपल कमिश्नर ने बताया कि जब से जीएसटी प्रणाली लागू की गई है।
तभी से आरोपी ने फर्जी कंपनी बनाकर चूना लगाना शुरू कर दिया। हालांकि इसकी कारगुजारियां पकड़ में काफी देर से आयीं। शक के दायरे में आने के बाद भी बेहद सावधानी से इसके चारों ओर शिकंजा कसना शुरू किया गया। हालांकि इस तक पहुंचना इतना आसान नहीं था।
दर्जनों स्थानों पर अनेकों बार छापा मारी की गई। जिस वक्त इसको दबोचा गया और पूरे घर में सर्च की गई तो वहां मिली रकम देखकर आंखें खुली की खुली रह गर्इं। भारी भरकम रकम को घर में इधर-उधर लापरवाही से रखा गया था। उसके बाद जब इससे पूछताछ की तो उसने न केवल कारगुजारियां कबूल कीं बल्कि यह भी बताया कि किस शातिराना अंदाज से उसने जीएसटी चोरी कर चूना लगाने का काम किया है।
जिसके तरीके सुनकर तो जीएसटी की टीम जो इसको पकड़ने में लगाई गई थी वो भी सन्न रह गई। जो तरीके इसने अपनाए थे उन तरीकों के बारे में कभी सोचा तक नहीं गया था। दबोचने के बाद पूछताछ की गई। पुलिस को भी इसमें शामिल किया गया। बुधवार को पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पांच हजार में आसानी से हासिल करता था फर्जी आईडी
करीब 42 करोड़ का चूना जीएसटी महकमे को लगाने वाला विकास जैन मात्र पांच हजार के मासिक भुगतान पर फर्जी आईडी हासिल कर लेता था। कई बार तो यह मात्र दो हजार की रकम में ही फर्जी आईडी हासिल कर लिया करता था। इन फर्जी आईडी के बूते ही यह जीएसटी की चोरी किया करता था।
पत्नी और ड्राइवर के नाम फर्जी फर्म
विकास जैन ने जीएसटी के नाम पर चूना लगाने के लिए फर्जी फर्मो की फौज खड़ी की थी। इसने कुछ फर्म अपनी पत्नी व ड्राइवर के नाम पर भी बनाई थीं। जीएसटी के लागू होने के बाद इसने बिल तो हजारों काट डाले, लेकिन माल की आपूर्ति कभी नहीं की।
नहीं मिलता था किसी से, केवल मोबाइल कांटेक्ट
जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि इसके शातिराना अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कभी भी किसी शख्स से मिला नहीं करता था। केवल मोबाइल पर ही कांटेक्ट रखता था। इसके अलावा जो मोबाइल नंबर यह प्रयोग करता था वो भी इसने अपनी या परिवार के सदस्यों के बजाय अपने ड्राइवर या फिर ऐसे ही नौकर चाकरों के नाम पर लिए थे।

