जनवाणी संवाददाता |
चांदपुर: गंगा खादर में बाढ़ का पानी आने से सैकड़ों परिवार के सामने खड़ा हो जाएगा रोजी-रोटी का संकट
जनवाणी संवाददाता चांदपुर उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने से अलकनंदा नदी में आई बढ़ का पानी उत्तराखंड में तबाही मचने के बाद गंगा नदी का पानी देवप्रयाग से आगे बढ़ रहा है।
मैदानी क्षेत्र में गंगा नदी में आई बाढ़ से बिजनौर के चांदपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गंगा खादर में पलेज लगाने वाले सैकड़ों परिवारों के करोड़ों रुपए पानी में डूब जाएंगे। गंगा खादर क्षेत्र में चांदपुर के निकटवर्ती ही नहीं बल्कि गैर जनपदों के लोग भी परिवार के साथ पहुंचकर तरबूज, खरबूजे, ककड़ी व सब्जी की फसल उगा कर अपने परिवार के लिए रोजी रोटी का बंदोबस्त करते है।
अधिकांश परिवार अपने घरों को साहूकारों के यहां गिरवी रखकर गंगा खादर में आकर पलेज उगाने में पैसा लगाते हैं । गंगा खादर क्षेत्र में एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों परिवार झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। उत्तराखंड के चमोली जनपद में ग्लेशियर के फटने से गंगा नदी में बाढ़ आने का अलर्ट प्रशासन द्वारा जारी कर दिया गया है। यदि गंगा नदी का जलस्तर बढ़ता है तो गंगा किनारे खादर क्षेत्र में ब्याज पर रुपए उठाकर पलेज लगाने वाले सैकड़ों भूमिहीन किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे।
इसे गंगा खादर क्षेत्र मैं पलेज लगाने वाले भूमिहीन किसानों एवं मजदूरों की बदकिस्मती ही कहा जाएगा कि वर्ष 2020 में जब उनकी फसल तैयार होकर आई थी। उस समय कोरोना का कहर टूटने से उनकी फसलें ओने पौने दाम में बिकी थी। पिछले दो माह से दिन-रात गंगा खादर क्षेत्र में रहकर तरबूज खरबूजा, ककड़ी, टमाटर व कई अन्य सब्जी उगाने के लिए पहुंचे किसानों की फसलों पर गंगा नदी में आई बाढ़ से संकट गहरा गया है।
प्रशासन द्वारा बढ़ का अलर्ट जारी किए जाने व गंगा किनारे रह रहे लोगों को वहां से सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने के निर्देश दिए जाने के बाद गंगा के किनारे बनी अस्थाई बस्ती व हजारों बीघा भूमि पर खड़ी पलेज के बर्बाद होने से होने की आशंका से बाहा रह रहे लोगों के माथे पर पसीना छलक रहा है। उन्हें चिंता है कि यदि बाढ़ के पानी से फसल बर्बाद हो गई तो साहूकार के यहां गिरवी रखे उनके मकान नहीं छूट सकेंगे और उनके सिर छुपाने का आशियाना भी छिन जाएगा।
गंगा खादर क्षेत्र में अस्थाई झोपड़ी डालकर रह रहे विपिन कुमार, सरोज देवी, बंटी आदि किसानों ने बताया कि यदि गंगा नदी में बाढ़ आती है तो उनकी लाखों रुपए की फसलें डूब जाएंगी जिससे उनके गिरवी रखे गए मकान नहीं छूट पाएंगे। ऐसी दशा में वह पूरी तरह से बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। प्रशासन के अलर्ट व गंगा किनारा खाली करने के निर्देश के बाद खादर क्षेत्र में रह रहे सैकड़ों परिवारों ने अपना सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की ओर निकलना शुरू कर दिया।

