- एनडीआरएफ को सतर्क रहने के आदेश, डीएम ने किया दौरा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चमोली में अलकनंदा ग्लेशियर फटने से गंगा नदी में बाढ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ में अलर्ट कर दिया है और गंगा नदी के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने को कह दिया गया है। डीएम और अन्य अधिकारियों ने खादर का दौरा कर ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा है। अधिकारियों ने उत्तराखंड के अधिकारियों से संपर्क बनाकर रखा हुआ है।

रविवार सुबह उत्तराखंड के पहाड़ियों में बसे चमोली जिल के रैनी क्षेत्र में अचानक ग्लेशियर फट गया। जिससे यूपी में गंगा की किनारे बसे सैकड़ों गांवों में हड़कंप मचा गया। ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा नदी के किनारे पड़ने वाले सभी जिलों के डीएम व पुलिस अधीक्षकों को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं।
डीएम के. बालाजी, एडीएम सुभाष प्रजापति, एसडीएम मवाना कमलेश गोयल और सिंचाई विभाग के एसडीओ पंकज जैन के साथ हस्तिनापुर क्षेत्र के खादर इलाके में पहुंचे। जहां अधिकारियों ने फतेहपुर प्रेम में बन रहे तटबंध का निरीक्षण किया।

डीएम ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द तटबंध का काम पूरा करने के निर्देश दिए। उत्तराखंड से आगे बढ़ रहे पानी के चलते खादर क्षेत्र में पांच बाढ़ चौकी बनाई गई हैं। जिनमें मखदूमपुर, दूधली, तारापुर, लतीफपुर और खरकाली पर लेखपालों को तैनात किया गये साथ उन्हें 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा के तल पर स्थित बधवाखेड़ी और मनोहरपुर सहित लगभग आधा दर्जन गांवों को खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने बताया कि फिलहाल मेरठ में बाढ़ जैसा कोई खतरा नहीं है। मगर इसके बावजूद पीएसी और एनडीआरएफ की टीम को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम पहुंचे हस्तिनापुर खादर
मेरठ/हस्तिनापुर/मवाना/परीक्षितगढ़: चमोली में अलकनंदा का ग्लेशियर टूटने से अफरातफरी मच गई है। उत्तराखंड में हाई अलर्ट के बाद मेरठ में भी गंगा में आने वाली संभावित बाढ़ को देखते हुए हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। डीएम के. बालाजी और संबंधित अधिकारियों ने हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ के खादर वाले इलाकों का दौरा कर ग्रामीणों से सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिये हैं। वहीं, गाजियाबाद में एनडीआरएफ को अलर्ट रहने को कहा गया है। ग्लेशियर के टूटने के कारण चमोली में हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के बांध टूट जाने से बाढ़ आ गई है। तेज गति से आगे बढ़ रहे पानी को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।

यह पानी खादर क्षेत्र में पहुंचकर कितनी तबाही मचाएंगा ये तो भविष्य बताएगा परंतु इस बड़ी घटना से खादर क्षेत्र के लोगों की दिलों की धड़कनों को बढ़ा दिया है। सूचना मिलते ही खादर क्षेत्र के लोगों ने इधर-उधर फोन करने शुरू कर दिए और ताजा स्थिति से रूबरू होने के लिए बैचेन दिखे। वहीं, चमोली और श्रीनगर में रहने वाले परिचितों को लोगों ने फोन करना शुरु कर दिया और हालचाल जानने के बाद राहत की सांस ली।
हालांकि डीएम और सिंचाई विभाग के अधिकारी फतेहपुर प्रेम पहुंच गए और मौका मुआयना करने लगे। डीएम ने बताया कि संभावना को देखते हुए ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया गया है और सभी जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं। एसडीएम कमलेश गोयल पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। वहीं, परीक्षितगढ़ में भी अधिकारियों ने खादर में गंगा किनारे रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कह दिया है।

लापरवाह सिंचाई विभाग का खामियाजा झेलेंगे ग्रामीण
प्रदेश सरकार खादर क्षेत्र में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ से ग्रामीणों को बचाने के हर संभव प्रयास में जुटी है। जिसके लिए गंगा किनारे करोड़ों रुपये खर्च कर तटबंध का निमार्ण कराया जा रहा है। जिसकी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के कंधों पर है, लेकिन सिंचाई विभाग कछुआ गति से चल रहे निर्माण कार्य का खामियाजा असमय आने वाली आपदा में ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। तटबंध के जिस हिस्से को सबसे पहले तैयार किया जाना था। वहां अभी तक अधूरा ही पड़ा है। ऐसे में यदि खादर क्षेत्र में असमय आने वाली बाढ़ से ग्रामीणों को शायद ही कोई राहत मिले।
विभाग को नहीं मिला बजट: एसडीओ सिंचाई विभाग
ऐसे में सिचाई विभाग के एसडीओ पीके जैन का कहना है जिस जगह से तटबंध टूटा हुआ है। उसका कोई बजट विभाग को नहीं मिला है। ग्रामीण बाढ़ से बचने के लिए स्वयं ही तटबंध दुरुस्त कर रहे हैं। जिसका उदाहरण रविवार को देखने को भी मिला। डीएम के निरीक्षण के बाद सिंचाई विभाग के साथ तमाम अधिकारी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन किसानों को तटबंध को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी खुद लेनी पड़ी। जिसके लिए दर्जनों किसान ट्रैक्टरों से तटबंध को दुरुस्त करते नजर आये।
अलर्ट के बाद ग्रामीणों ने शुरू किया पलायन
रविवार को चमोली से शुरू हुए आपदा के तूफान के बाद खादर में विभाग द्वारा अलर्ट किये जाने के बाद खादर में पलायन का सिलसिला शुरू हो गया। देखते ही देखते गंगा कि तलहटी में बसे लोगों पलायन करने लगे।
इन गांवों में बाढ़ का सबसे अधिक खतरा
यूं तो खादर के लोग प्रतिवर्ष बाढ़ का भयानक रूप देखते आ रहे हैं, लेकिन इस बार बेसमय आने वाली बाढ़ से खादर के दर्जनों गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। गंगा की तलहटी में बसे खेड़ीकलां, मनोहरपुर, बधुवा, बधुवी, बंगाली बस्ती मखदूमपुर जैसे दर्जनों गांवों में बाढ़ के हालत पैदा हो सकते हैं, लेकिन विभाग के अधिकारियों की माने तो खादर में असमय बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं है।

