- 11 माह में पहली बार कोरोना संक्रमित नहीं निकले, अब तक 825745 लोगों की टेस्टिंग हो चुकी
- कोरोना के कारण 21301 लोग संक्रमित हुए, जनपद में अब तक 405 लोगों की मौत भी हुई
- अस्पतालों से 20845 लोग ठीक होकर घर भी गए
ज्ञान प्रकाश |
मेरठ: जिस कोरोना ने ग्यारह महीने लोगों को दहशत में डालकर रखा और लोगों को दूर रहने को मजबूर कर दिया, उसकी कोरोना का सफर रविवार को सिफर रहा। कोरोना के दहशतभरे इतिहास में रविवार का दिन हमेशा याद रखा जाएगा जब मेरठ के लोगों को कोरोना के संक्रमितों के बारे में पढ़ने को नहीं मिला।
नया साल लोगों की थम चुकी जिंदगी में खुशियों की सौगात लेकर आया और लोगों की जागरूकता और चिकित्सकों के अथक प्रयास के कारण कोरोना मेरठ में अंतिम सांसे गिन रहा है। बहुत जल्द इस शहर को कोरोना फ्री सिटी भी घोषित किया जा सकता है।
बीते 22 मार्च 2020 को जब पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना के कारण दो दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यही कोरोना पूरे साल लोगों की जिंदगी को तबाह कर देगा। गत 25 मार्च को देश भर में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई।
बाजार और सामाजिक गतिविधियां ठप कर दी गई। एक तरफ कोरोना की बढ़ती रफ्तार और दूसरी तरफ घरों में बंद रहने के कारण लोगों की मानसिकता तक नकारात्मक बनाना शुरु कर दिया था। प्राइवेट डाक्टरों की क्लीनिक, होटल, सिनेमा, स्कूल कालेज, बाजार और माल्स आदि सब पर ताले लगा दिये गए थे। सड़कों पर निकलने पर मुकदमे दर्ज होने लगे थे।
पूरी दुनिया में कोरोना ने जिस तरह से तहलका मचा रखा था उससे मेरठ अछूता नहीं रहा था। छह जून को संपूर्ण लॉकडाउन खत्म होने के बाद बाजारों को सप्ताह में तीन दिन खोलना शुरु किया गया, लेकिन स्कूल-कालेज, विवाह मंडप और सिनेमा और होटलों को अनुमति जुलाई के अंत में जाकर मिली। कोरोना के कारण मेरठ में 405 लोगों की मौतें हुई और 21301 लोग संक्रमित हुए।
मेडिकल कालेज, सुभारती मेडिकल कालेज, पांचली, मुलायम सिंह यादव मेडिकल कालेज के अलावा आनंद अस्पताल में इलाज की अनुमति दी गई। प्राइवेट अस्पतालों ने कोरोना अवधि में जमकर नोट काटे और जब केस बिगड़ने लगे तो उनको मेडिकल भेजना शुरु कर दिया। इस कारण कोरोना से मरने वालों की संख्या वेस्ट यूपी में सर्वाधिक रही। सितंबर महीने में कोरोना ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया।
इस महीने 107 लोगों की मौत हुई और पांच हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए। अक्तूबर महीने में 3500 से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आए। अगस्त से लेकर नवंबर तक प्रतिदिन 250 से लेकर 325 तक संक्रमितों का निकलना जारी रहा। जनवरी से कोरोना की रफ्तार धीमी होनी शुरु हुई।
प्रतिदिन 20 से अधिक मामले भी नहीं निकले और 15 जनवरी के बाद तो 10 से 15 संक्रमित ही निकल रहे थे। बाद के दिनों में वायरस की रफ्तार धीमी होती गई और संक्रमितों की संख्या ईकाई में आने लगी। रविवार को एक भी कोरोना संक्रमित न निकलने से लोगों ने राहत की सांस ली है।
कोरोना खत्म तो नौकरी खत्म, पांच माह से सेलरी को भटक रहे कोरोना वारियर
कोरोना महामारी काल में जिन कोरोना वारियर पर पुष्प वर्षा की जाती थी वो पिछले पांच माह से सेलरी के लिए धक्के खा रहे हैं। पुष्प वर्षा करने वाला सिस्टम सेलरी मांगने वाले कोरोना वारियर को अब धक्के मार रहा है। यहां बात हो रही है मेडिकल के उन कोरोना वारियर की जिन्होंने महामारी काल में जान हथेली पर रखकर संक्रमितों की जान बचाई।
मेडिकल में संविदा पर बड़ी संख्या में अवनी व जीत कंपनी की ओर से हेल्थ केयर वर्कर मुहैय्या कराए जाते हैं। महामारी काल में संविदा कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाएं देने में कोई कोताही नहीं बरती। सरकार और सिस्टम ने भी इन कोरोना वारियर की शान में खूब कसीदे काढे। इन पर पुष्प वर्षा की गई। इनको वारियर का दर्जा दिया गया, लेकिन जैसे जैसे कोरोना महामारी का ग्राफ तेजी से निचे आने लगा, कोरोना वारियर के प्रति सरकार और सिस्टम दोनों का रवैया बदल गया।
अफसरों ने इनसे नजरें फेरनी शुरू कर दीं। जिनको कोरोना वारियर बताकर पूजा जाने लगा था वो हेल्थ केयर वर्कर पिछले पांच माह से सेलरी के लिए भटक रहे हैं। खाली पेट डयूटी को मजबूर हैं। नाम न छापे जाने की शर्त पर ऐसे ही कई कर्मचारियों ने बताया कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सेलरी के नाम पर उन्हें नौकरी से बाहर करने की धमकी दी जाती है।
ज्यादातर कर्मचारी ऐसे हैं जो बाहर के रहने वाले हैं। उन्हें किराया देना होता है। जहां से किचन का सामान लेते हैं वो दुकानदार भी तकादा कर रहा है। यदि समय पर सेलरी नहीं मिलेगी तो फिर काहे के कोरोना वारियर। सेलरी के नाम पर अधिकारी धक्का देकर कमरे से बाहर करा देते हैं। शासन प्रशासन और मेडिकल प्राचार्य तक से फरियाद कर चुके हैं, लेकिन सेलरी मिलने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है।

