Saturday, March 14, 2026
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डीएम की जांच में डाक्टर नर्स समेत चार कुसूरवार

  • शव बदलने के मामले में मेडिकल प्राचार्य की रिपोर्ट का अभी इंतजार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना संक्रमितों के शव बदले जाने के मामले की डीएम द्वारा एडीएम सिटी व सीएमओ से करायी गयी जांच में मेडिकल के कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड के एक डाक्टर, स्टाफ नर्स बार्ड ब्वॉय व एक अन्य चतुर्थ श्रेणी स्टाफ को कुसूरवार पाया गया है।

हालांकि इस मामले में जहां तक कार्रवाई या फिर अंतिम नतीजे पर पहुंचने की बात है तो उसके लिए लिए अभी मेडिकल प्राचार्य की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

दरअसल, इस प्रकरण में मेडिकल प्रशासन की ओर से भी अलग से जांच की जा रही है। मेडिकल के तीन सीनियर डाक्टरों की कमेटी मंगलवार को इस पर रिपोर्ट देगी।

उसके बाद भी लाश बदलने के मामले के कुसूरवारों पर कार्रवाई को अमली जामा पहनाया जा सकेगा, लेकिन डीएम की जांच रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

हालांकि इससे पूर्व मेडिकल प्राचार्य की ओर से बनायी गयी जांच कमेटी को मामले में लीपापोती माना जा रहा था, लेकिन जिस प्रकार से प्रशासन ने जांच में तेजी से दिखाई है, उससे इस पूरे मामले के आरोपी मेडिकल स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि मोदीनगर निवासी गुरुवचन सिंह तथा मेरठ के कंकरखेड़ा थाना के फाजलपुर निवासी यशपाल सिंह के शव आपस में बदल गए थे। इस मामले को लेकर मेडिकल प्रशासन की जमकर फजीहत हुई थी। मामला शासन तक पहुंच गया।

रिपोर्ट तलब कर ली गयी। डीएम ने मामले का संज्ञान लेते हुए एडीएम सिटी व सीएमओ को जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट सोमवार की शाम को डीएम को सौंप दी गयी।

इस संबंध में मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि मंगलवार को सील बंद रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी जाएगी। गत दिवस मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों ने कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग के शव के बदले किसी दूसरे का शव को दे दिया था।

डाक्टरों ने सील किए गए शव को खोलने से मना किया था, लेकिन परिजनों ने अंतिम दर्शन के लिए सील खोल दी। जिसके बाद लापरवाही सामने आई। शव रोहटा निवासी यशपाल सिंह का था।

इसके बाद मेरठ से लेकर मोदीनगर तक हड़कंप मच गया था, डीएम मेरठ ने मामले की जांच बैठा दी थी। मोदीनगर के गोविंदपुरी की हरमुखपुरी कॉलोनी निवासी 84 वर्षीय बुजुर्ग गुरुवचन को एक सितंबर को पैरालाइसिस का अटैक पड़ गया था।

तबीयत बिगड़ने पर उनके बेटे पहले उनको लेकर शहर के जीवन अस्पताल पहुंचे। यहां से उनकी हालत को नाजुक देखते हुए मेरठ रेफर कर दिया गया था। जहां उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मेडिकल प्रशासन की लापरवाही की गूंज शासन स्तर पर हो रही है। मंगलवार को इसमें बड़ा धमाका हो सकता है।

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