Saturday, March 7, 2026
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रैपिड रेल: एलाइनमेंट के लिए प्रयोग की जा रही नवीनतम तकनीक

  • प्रत्येक 10 किमी पर स्थापित होगा करोस रेफरेंस स्टेशनों का एक नेटवर्क

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रैपिड रेल के निर्माण के लिए लिनियर रेलवे इंफ्रा प्रोजेक्ट में उच्च सटीकता सर्वेक्षण बेहद आवश्यक होता है। इस तकनीक से काम चालू कर दिया गया है। ताकि डिजाइन किए हुए ट्रैक एलाइनमेंट किया जा सके। ऐसा करने से 180 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड़ से भूमिगत दौड़ने वाली ट्रैन के लिए कोई दिक्कत नहीं होती है।

इसलिए इसका डिजाइन रैपिड रेल की संरचनाओं और ट्रैक के निर्माण में चूक की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। यह जानकारी आरआरटीएस के अधिकारियों ने दी हैं।

एनसीआरटीसी दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के निर्माण मे सटीक सिविल स्ट्रक्चर एलाइनमेंट को फाइनल करने के लिए ‘कन्टिन्यूसली आॅपरेटिंग रिफरेन्स स्टेशन (करोस) प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है।

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एक ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) आधारित तकनीक है, जो मुख्य रूप से सर्वेक्षण, मैपिंग और संबंधित विषयों में उपयोग में लायी जाती है। इस तकनीक द्वारा सिविल निर्माण में पूर्व निर्धारित कॉरिडोर की मार्ग रेखा बनाने में पूर्ण सटीकता फाइनल की जाती है, ताकि प्लान एलाइनमेंट को प्राप्त किया जा सके।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ एक 82 किमी लंबा कॉरिडोर है, जो नदी, रेलवे लाइनों, सड़कों और फ्लाईओवर के ऊपर से जा रहा है और इसलिए सिविल स्ट्रक्चर एलाइनमेंट में सटीकता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इसे ध्यान में रखते हुए, एनसीआरटीसी ने सर्वथा एक नई सर्वेक्षण तकनीक, करोस का प्रयोग किया है।

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यह तकनीक देश में पहली बार उपयोग में लायी जा रही है। जापान व चाइना में इसे प्रयोग में लाया जाता रहा है। इसके अलावा, देश की इस पहले आरआरटीएस प्रोजेक्ट, दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के कार्यान्वयन की सीमित समय सीमा को देखते हुए एक साथ कई साइटों पर काम किया जा रहा है। अलग-अलग कार्य करके भी एलाइनमेंट में लेश मात्र भी त्रुटि न हो, इसलिए इस प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।

यही नहीं, इस प्रोजेक्ट मे, 180 किमी प्रति घंटे की गति को सपोर्ट करने में सक्षम बलास्टलेस ट्रैक को भी पांच मिमी से भी कम के सटीकता स्तर पर रखा जा रहा है। करोस रेफरेंस स्टेशनों का एक नेटवर्क है, जो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के साथ साथ हर 10-15 किमी पर स्थापित किया गया है। ये करोस ‘रेफरेंस स्टेशन’ कंट्रोल सेंटर से जुड़े होंगे और रोवर्स के आधार पर वास्तविक एलाइनमेंट प्राप्त करने के लिए जरूरी करेक्शन प्रदान करते हैं।

यह करेक्शन कम से कम तीन से पांच संदर्भ स्टेशनों द्वारा प्रदान किया जाता है। जिससे 10 मिमी तक की सटीकता प्राप्त होती है। कोरस नेटवर्क देश में पहली बार रेल-आधारित परियोजना के लिए सेटअप किया गया है। यह प्रणाली सर्वेक्षण करने के लिए इस तरह की परियोजनाओं के लिए पाथ ब्रेकिंग सिस्टम साबित होने वाली है।

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