Monday, May 11, 2026
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जिंदगी के लिए ‘जिंदगी’ कतारों में तब्दील

  • आॅक्सीजन प्लांटों पर तीसरे दिन भी नहीं सुधरी व्यवस्था
  • अंदर 500 का सिलेंडर, बाहर बिक रहा 2500 रुपये का

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आॅक्सीजन प्लांटों पर आॅक्सीजन सिलेंडर के लिये मारामारी है। कहीं भी लोगों को आसानी से आॅक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। जिन्हें मिल रहा है तो वह 500 का सिलेंडर 2500 रुपये में ब्लैक कर रहे हैं। बुधवार को भी रिठानी और बिजौली स्थित आॅक्सीजन प्लांटों पर सिलेंडर लेने के लिये लोगों को परेशान होना पड़ा। यहां हंगाम के बाद प्लांट संचालकों की ओर से टोकन व्यवस्था की गई।

मेरठ में रिठानी रोड स्थित कृष्णा एयर प्रोडेक्ट, बिजौली स्थित मेरठ गैस के अलावा मोहिउद्दीनपुर में आॅक्सीजन प्लांट हैं। यहां आॅक्सीजन लेने वालों की लाइन लगी है, लेकिन लोगों को आसानी से आॅक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। पिछले तीन दिनों से रिठानी स्थित आॅक्सीजन प्लांट पर आॅक्सीजन लेने वालों का हंगामा चलता रहा। लोगों का आरोप था कि यहां लाइन में लगे लोगों को तो सिलेंडर मिल नहीं रहा, लेकिन एम्बुलेंस संचालक आसानी से अंदर जाते हैं और सात से आठ सिलेंडर एक बार में लेकर जा रहे हैं।

लोगों का आरोप है कि यह एम्बुलेंस संचालक अंदर से सात या आठ सिलेंडर लेकर आते हैं, लेकिन बाहर आने के बाद कुछ ही दूर जाने के बाद आॅक्सीजन सिलेंडर को ब्लैक कर देते हैं। यह यहां रोजाना का हाल है। इस संबंध में पुलिस को भी शिकायत मिल रही है, जिसके बाद यहां चौकसी बरती जा रही है। आरोप है कि एम्बुलेंस संचालक 500 का सिलेंडर खरीदकर बाहर दो हजार से तीन हजार तक में बेच रहे हैं।

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शुरू की गई टोकन व्यवस्था

लगातार प्लांटों पर हंगामा होने के बाद से प्लांट संचालकों ने बुधवार से रिठानी स्थित आॅक्सीजन प्लांट पर टोकन व्यवस्था शुरू कर दी है। यहां पहले लोगों को टोकन बांटा गया और उसके बाद एक के बाद एक व्यक्ति को आॅक्सीजन सिलेंडर दिया गया। बता दें कि लोग यहां सुबह चार बजे ही लाइन में लग जाते हैं, जिससे उन्हें एक सिलेंडर मिल सके। प्लांट 11 बजे के बाद शुरू होता है। इसे लेकर यहां कई बार हंगामा भी हुआ। जिसके बाद बुधवार से यहां टोकन व्यवस्था शुरू की गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल की मौजूदगी में लोगों को टोकन दिये गये और बाद में सिलेंडर दिये गये।

नहीं किया जा रहा कोरोना गाइडलाइन का पालन

जैसे ही प्लांट संचालक ने लोगों को पहले टोकन देने की बात कही तुरंत यहां लोग खिड़की पर दौड़ पड़े और एक के ऊपर एक चढ़कर लाइन लगा ली। यहां लाइन लगाने के दौरान लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी भूल गये। किसी को इस बात का ध्यान नहीं रहा कि वह जिस मर्ज की दवा लेने यहां आये हैं लाइन में इस प्रकार लगने से वही मर्ज उनको भी हो सकता है। कड़ी मशक्कत के बाद यहां मौजूद पुलिस बल ने लोगों को समझाकर एक-दूसरे से अलग किया और लाइन ठीक प्रकार से लगवाई।

घंटों लगा रहा जाम

आॅक्सीजन प्लांट के पास भीड़ जमा होने और टोकन के लिये लाइन लगने के कारण रिठानी की ओर से कूंडा की ओर जाने वाला मार्ग जाम हो गया। यहां घंटों लोग जाम में परेशान रहे। पुलिस भी यहां मूकदर्शन बनी रही। काफी देर तक भी जब वाहन चालकों को यहां से निकलने का मौका नहीं मिला तो वह खुद सड़क पर आ गये और लाइन में लगे लोगों को एक साइड कर जाम खुलवाया। बता दें यहां दूर-दूर से लोग आॅक्सीजन लेने पहुंच रहे हैं। उनके वाहन भी यहां सड़कों पर खड़े रहते हैं, जिसके कारण दिनभर यहां जाम की स्थिति बनी रही।

सात टन लिक्विड आॅक्सीजन मिली, 1245 सिलेंडरों की आपूर्ति

एक तरफ अस्पतालों और नर्सिंग होमों में आॅक्सीजन की कमी से मरीजों की जान सांसत में पड़ी हुई है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि शहर में आॅक्सीजन गैस की आपूर्ति भरपूर हो रही है। अपर जिलाधिकारी वित्त सुभाष प्रजापति का कहना है अब आपूर्ति लगभग सामान्य होती जा रही है।

बुधवार को दो आॅक्सीजन प्लांटों से 1243 आॅक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति की गई। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के कारण आॅक्सीजन गैस का संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को कंसल गैस एजेंसी मोहिउद्दीनपुर से 416, मेडिआक्सी बिजौली हापुड़ रोड से 828 सिलेंडरों की आपूर्ति अस्पतालों को की गई है। कुल मिलाकर 1243 सिलेंडरों की आपूर्ति की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आईनोक्स मोदीनगर से सात टन लिक्विड आॅक्सीजन हासिल हुई है।

आॅक्सीजन गैस आम आदमी के लिए प्रतिबंधित की मांग

जिला प्रशासन द्वारा आॅक्सीजन गैस उपलब्ध कराने के निर्देश हाल ही में जारी किए गए। जिसको लेकर व्यापारियों शिकायत की है। मंडप एसोसिएशन के महामंत्री विपुल सिंघल ने कहा कि प्रशासन द्वारा आमजन के लिए भी आॅक्सीजन गैस सिलेंडर रिफिल कराए जा रहे हैं।

ऐसे में कई मरीजों को इसे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा 755 बेड एल-3 श्रेणी के अस्पताल में, एल-2 श्रेणी के अस्पताल में 2092 बेड और 300 बेड एल-1 श्रेणी के अस्पताल के लिए आरक्षित करें गए हैं। सभी श्रेणी के बेड की कुल संख्या 3147 है। यानि मेरठ में 3147 कोरोना मरीज एक बार में अस्पताल में भर्ती किए जा सकते हैं, लेकिन इससे कहीं अधिक संख्या उन मरीजों की है जो घरों के अंदर कोरोना के चलते आॅक्सीजन से अपना आॅक्सीजन लेवल मेंटेन किए हुए हैं।

वहीं, कई मरीज पहले से भी ऐसे हैं जिनको फेफड़ों की बीमारी के चलते घर पर आॅक्सीजन गैस सिलेंडर के माध्यम से ही इलाज चल रहा है, लेकिन प्रशासन के आॅक्सीजन संबंधी आदेशों के बाद घरों में ही आइसोलेट मरीज और अन्य मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि आॅक्सीजन गैस सिलेंडर से इलाज करा रहे मरीजों का सही आंकड़ा और अस्पताल में खाली आॅक्सीजन बेड का सही आंकड़ा जब तक सामने ना आए तब तक इन आदेशों पर रोक लगाई जाए। जिससे सभी लोग इलाज करा सकें।

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