Monday, March 23, 2026
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हाल बेहाल: मुस्लिम इलाकों में सीवरेज सिस्टम बदहाल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लिसाड़ी गेट की मलीन बस्ती एवं मुस्लिम बहुल इलाकों में विकास के नाम पर की जा रही उपेक्षा के चलते यहां पर लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। समाजवादी पार्टी पार्षद दल के पूर्व नेता अफजाल सैफी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के दबाव में आकर नगर निगम प्रशासन मुस्लिम इलाकों में विकास कार्य नहीं करा रहा है।

जबकि 15वें वित्त आयोग की धनराशि का अधिकारी दुरुपयोग कर रहे हैं। पूर्व पार्षद ने बताया कि नगर निगम प्रशासन की उदासीनता के कारण सब से बुरी दशा श्यामनगर, मेवगढ़ी, मजीदनगर, गड्ढे वाली मस्जिद, आयशा मस्जिद के आसपास, समर गार्डन, शाहजहां कालोनी, तारापुरी लिसाड़ी रोड, नूरनगर की पुलिया, द्वारकापुरी एवं माधवपुरम आदि मुस्लिम बहुल इलाकों की है।

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जहां लोगों को अनेक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पूर्व पार्षद सोहनलाल एवं हाजी सरताज कुरैशी का कहना है कि इन इलाकों में सीवरेज सिस्टम ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह खराब हो चुका है जिस कारण बिना बरसात के यहां जलभराव हो रहा है और लोगों का इन मार्गों से गुजरना भी दुश्वार हो रहा है।

इन पूर्व पार्षदों ने बताया कि अधिकारियों की विकास कार्यों के नाम पर उदासीनता एवं लापरवाही के चलते सड़कों, नाली नालों की खस्ता हालत से पूरा क्षेत्र नर्क बना हुआ है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं, सफाई कर्मी सफाई के लिये इन इलाकों में आते नहीं है।

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व्याप्त गंदगी से बीमारी फैलने का डर लोगों को सता रहा है। नगर निगम क्षेत्र में फैल रहे डेंगू-मलेरिया जैसी घातक बीमारी पर स्वास्थ्य विभाग कोई कारगर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है। जबकि इसके लिये इस विभाग की मुख्य जिम्मेदारी बनती है। इन सभी पूर्व पार्षदों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं नगर विकास मंत्री से मांग की है।

विकास के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले व जनहित के कामों की अनदेखी किये जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई कर उपेक्षित मुस्लिम इलाकों में चहुमुखी विकास कराया जाए।

नगर निगम की लापरवाही से तालाब बनी सड़क

40 फुटा रोड पर हुआ जलभराव, कांग्रेसियों ने समस्याओं को लेकर किया हंगामा-प्रदर्शन

मेरठ: शहर में कुछ इलाकों के हालात बद से बदतर हो चुके हैं पानी की निकासी न होने के कारण सड़कों पर जलभराव की समस्या बनी रहती है। सड़कों पर लोगों के निकलने तक जगह नहीं होती। वार्ड-75 के 40 फुटा रोड पर कुछ ऐसा ही हाल है। इसे लेकर मंगलवार को कांग्रेसियों ने पानी में खड़े होकर प्रदर्शन किया और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की।

शहर के वार्ड-75 के 40 फुटा रोड पर गंदे नाले का पानी सड़कों तक भर आया है। यहां से लोगोें का निकलना मुश्किल हो गया है। लोगों की इस समस्या को लेकर कांग्रेस नेता नसीम सैफी के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने मंगलवार को यहां सड़क पर भरे पानी में खेड़े होकर प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई माह से इस मार्ग के यही हालात है यहां नाले का पानी लोगों के घरों तक में घुस जाता है

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जिस कारण यहां लगातार बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एक्सप्रेस-वे तो बनवा रही है लेकिन शहर के अंदर रहने वाले लोगों के लिये कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। पिछले कई माह से यह समस्या बनी है, लेकिन नगर निगम की ओर से यहां कोई कार्य नहीं कराया गया है।

उन्होंने इस संबंध में नगरायुक्त को भी एक ज्ञापन सौंपा और यहां नाला निर्माण और पानी निकासी की सुविधा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर यह कार्य नहीं कराया जाता तो कांग्रेसी नगर निगम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेंगे।

यहां महानगर प्रवक्त अखिल कौशिक, रोबिन, इस्लामुद्दीन अंसारी, आस मोहम्मद, चांद सैफी, शाकिर अब्बासी, दानिश, डा. मुर्सलीन, मोहम्मद आलम, इरशाद सलमानी, औरंगजेब चौहान, साकिब आदि मौजूद रहे।

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से दूषित पानी को बनाया जा रहा उपयोगी

72 मिलियन लीटर प्रतिदिन गंदा पानी नालों से उठाकर उपयोगी पानी छोड़ा जा रहा नदी में

मेरठ: जल निगम उत्तर प्रदेश द्वारा कमालपुर में 72 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अभी कुछ समय पहले स्थापित किया गया था। ट्रीटमेंट प्लांट का काम नालों में से गंदा पानी उठाकर और उसे साफ कर सिंचाई के लिए उपयोगी बनाया जाता है, इस प्लांट का अहम् प्रयोग पानी को साफ कर गंदगी नदी में जाने से रोकता है।

इस प्लांट की क्षमता 72 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) यानि सात करोड़ 20 लाख लीटर गंदे पानी को साफ करने की है, नालों में आने वाली गंदगी जैसे कि पॉलीथिन, प्लॉस्टिक, कूड़ा करकट सब हटा दिया जाता है और पानी को क्लोरिन के प्रयोग से साफ कर नदी में छोड़ जाता हैं।

वहीं, उस पानी का प्रयोग नदी के आसपास के गांव के किसान खेतों की सिंचाई के लिए प्रयोग करते हैं, जो मलवा निकलता है, उसे नगर निगम द्वारा दिये गये डंपिंग यार्ड में डाल दिया जाता है। इस मलबे को कुछ किसानों द्वारा ले जाया गया और अपने खेतों में खाद्य के रूप में प्रयोग किया गया, लेकिन वह कारगर साबित नहीं हुआ।

गंदे पानी में से निकले मलवे को फेंकने के लिए निगम कुछ नई नीतियों पर कार्य कर रहा है। वहीं, के कर्मचारी से बात करने पर पता चला कि जगह-जगह पंपिंग स्टेशन बने हुए हैं, जो पानी को पंप करके ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाते हैं।

पानी गंदा और काला आता है, जिसको पहले बोरिंग में इकट्ठा कर एसबीआर (सेकुएन्टिअल बैच रियेक्टर) टेक्नोलॉजी की मदद से कचरा निकालना क्लोरिन डालकर साफ करके काली नदी में छोड़ दिया जाता हैं। जिसके बाद ये पानी सिंचाई के लिये प्रयोग होने लायक हो जाता है और इसका मलबा फेंक दिया जाता हैं।

हमारे ट्रीटमेंट प्लांट को इस तरह से डिजाइन किया गया है। जिससे पानी में थोड़ा-सा भी कूड़ा कचरा आगे नदी में नही जा सकता। पानी के इनपुट में और आउटपुट में जमीन-आसमान का अंतर आता हैं। यह प्लांट करीबन 50 से 55 लोगों को रोजगार देता हैं।

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