जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिनके कंधों पर जनपद में पुलिस व्यवस्था की कमान इसलिये दी गई ताकि लोगों को सुरक्षा मिले और उनके साथ अन्याय न हो, लेकिन प्रदेश के पांच ऐसे आईपीएस अधिकारी का बदनुमा चेहरा उस वक्त सामने आया जब शासन ने भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा कर जांच के आदेश दिये हैं।
इनमें से सबसे चर्चित आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा है जिसने एनकाउंटरों की झड़ी लगाकर सरकार में वाहवाही बटोरी थी, लेकिन जब भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने शुरू हुए तो हीरो से जीरो बनने में पल भर भी नहीं लगा। माना जा रहा है कि इन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ जो आईपीसी की धाराएं लगाई गई है, उनमें जेल जाना तय माना जा रहा है।
विजिलेंस की टीम ने आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाये थे। शर्मा ने उनकी पत्नी का होने का दावा करने वाली महिला के खिलाफ बुलंदशहर और रामपुर में फर्जी मुकदमे दर्ज करवाये थे। वह जेल में बंद अनिल भाटी से लगातार वाट्सऐप चेटिंग कर रहे थे।
इसके अलावा मेरठ और एक अन्य जनपद में अपनी पोस्टिंग करवाने के लिये कथित पत्रकार और उसके साथी से 80 लाख रुपये के लेन-देन की बात की थी। अजयपाल की वाट्सऐप कॉल और चेटिंग को सबूत बनाया गया है। नोएडा के पूर्व एसएसपी वैभव कृष्ण ने भी मनचाही पोस्टिंग के लिये लेन-देन का मसला उठाया था।
इस मामले में अजयपाल भी आरोपी है। अजयपाल शर्मा के खिलाफ मजबूत सबूत मिलने के बाद ही विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज करवाया गया है। रामपुर में पोस्टिंग के दौरान आजम खान के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण भले चर्चित हुए थे, लेकिन भ्रष्टाचार में नाम सामने आते ही उनको पद से हटा दिया गया था।
2011 बैच के आईपीएस अधिकारी पोस्टिंग की शुरूआत में सिंघम नाम से चर्चित हुए, लेकिन बाद में विवादों में घिरने के कारण चर्चाओं में रहने लगे। नोएडा में पोस्टिंग के दौरान जिस तरह से विवादों ने जन्म लिया उससे इस आईपीएस अधिकारी की छवि लोगों की नजर में धूमिल हो गई।
2003 बैच के आईपीएस अधिकारी अरविंद सेन का नाम पशुधन घोटाले में नाम आया। पीड़ित को धमकाने का आरोप लगा। 10 लाख रुपये रिश्वत देने का आरोप लगा। इनके खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। 2014 बैच के आईपीएस मणिलाल पाटीदार के खिलाफ महोबा में दो मुकदमे दर्ज है। इनके खिलाफ वसूली और हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है।
2006 बैच के आईपीएस अभिषेक दीक्षित के प्रयागराज के एसएसपी रहते हुए पोस्टिंग के खेल का आरोप लगा। इनके खिलाफ विजिलेंस जांच हुई और दोषी पाए गए।
2010 बैच के आईपीएस हिमांशु कुमार के खिलाफ अपने तबादले के लिये दलालों से बातचीत के आरोप लगे। विजिलेंस जांच में दोषी पाये गए। इन पांचों आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इन अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोप सिद्ध होने पर दो से चार साल की सजा हो सकती है। एंटी करप्शन के मामले में चार से दस साल की सजा हो सकती है। पैसा वसूली के आरोप में दो साल की सजा हो सकती है।

