- हरियाली, स्वच्छता और सुगंध से सराबोर केंद्र बना आदर्श
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: सृजन की बहती गंगा देखनी हो तो रसूलपुर कलां के आंगनबाड़ी केंद्र पर आइएं यहां ग्राम्य जीवन की गमक सहज ही मन-मष्तिस्क को झकझोरने लगेगी । हरियाली, स्वच्छता और सुगंध से सराबोर इस केंद्र पर चित्रकारी भी नमूदार होती दिखेगी। यह सब है, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मुनेश सैनी की बदौलत । वह त्याग, निष्ठा और समर्पण भाव से कर्तव्य के प्रति सब कुछ न्योछावर कर देती हैं । यही वजह है कि उनका आंगनबाड़ी केंद्र पूरे जनपद के लिए उदाहरण है। आदर्श भी है, कई मायनों में।
कुछ समय पहले तक रसूलपुर के आंगनबाड़ी केंद्र का भवन जर्जर था, लेकिन, इसका कायाकल्प किया मुनेश सैनी। उन्होंने सामुदायिक सहयोग से और अपनी मेहनत की बदौलत इस भवन का जीर्णोद्धार कर दिया। अब यह भवन रंगा-पुता और बेहद आकर्षक लगता है। भवन की दीवारों पर तरह-तरह के चित्र बनाए गए हैं। यहां का विद्यालय किंडर गार्डन स्कूल में तब्दील हो चुका है। चारों ओर साफ-सफाई और हरियाली साफ देखी जा सकती है।
वैसे तो पोषण वाटिका लगभग हर आंगनबाड़ी केंद्र पर बनाई गई है लेकिन, रसूलपुर केंद्र की पोषण वाटिका कुछ अलग ही है। इस वाटिका में आम-अमरूद, कटहल-केले जैसे फलदार पौधे रोपे गए, जो धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा पोषण वाटिका में मुनेश सैनी ने मूली, गाजर, पालक और धनिया का भी उत्पादन किया है । यह पोषाहार में काम आता है। केंद्र पर प्रतिदिन प्री प्राइमरी एजुकेशन के लिए आने वाले बच्चों को केंद्र पर खाद्य पदार्थ बनाकर दिया जाता है।
यह खाद्य पदार्थ सुरुचिपूर्ण और स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता है। मुनेश सैनी कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता हैं। कोरोना काल में उन्होंने अपने दायित्वों को निभाने में कसर बाकी नहीं लगाई। आज भी वह घर-घर घूम कर बच्चों का वजन करती हैं। गर्भवती को पौष्टिक भोजन की नसीहत देती हैं।
वह गोद भराई से लेकर अन्नप्राशन कार्यक्रम को बखूबी निभाती हैं। किशोरियों को एनीमिया जैसी बीमारी से बचाने के उपाय बताती हैं। हर तरह के टीकाकरण के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करती हैं। मुनेश कहती हैं कि वह चाहती हैं कि सरकार की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्रों को अवश्य मिले। अब तक करीब एक दर्जन बालिकाओं को मुनेश ने कुपोषण से बाहर निकाला है ।
इसके लिए उन्होंने पोषण सामग्री उपलब्ध कराई और जरूरी उपाय बताए। कुपोषित बच्चों के लिए भी मुनेश ने काफी प्रयास किए। करीब आधा दर्जन बच्चों को कुपोषण की काली छाया से मुक्त कराया। सुजान और सनी नाम के दो बच्चे जो कि अति कुपोषित थे, उन्हें मुनेश ने पोषण पुनर्वास केंद्र में दाखिल कराया। अब दोनों स्वस्थ और प्रसन्न हैं। कोरोना काल में मुनेश ने खुद से करीब 1000 मास्क तैयार कराए और इन्हें गांव के लोगों में बांटा गया।
मुनेश कहती हैं कि कोई काम यदि मन से किया जाए उससे आत्मसंतोष मिलता है। मुनेश का कहना है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) आशा त्रिपाठी उनकी प्रेरणा स्रोत हैं। वह हमेशा कर्तव्य पालन की सीख देती रहती हैं। परिवारीजनों का भी सहयोग रहता है।

