- शनिवार को रुक-रुक होती रही बरसात टीकाकरण केन्द्रों पर पहुंचे 6580 ने खुराक ली
जनवाणी संवाददाता
मेरठ: शनिवार को दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही। बारिश के चलते वैक्सीनेशन सेंटरों पर आम दिनों के मुकाबले कम लोग टीकाकरण के लिए पहुंचे।
बूंदाबांदी ने जहां मौसम में ठंड बढ़ा दी। वहीं, टीकाकरण की गति भी ठंडी कर दी। इसी वजह रही कि शनिवार को 6580 लोगों को ही कोरोना की खुराक मिल सकी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. प्रवीण गौतम ने बताया कि बारिश होने के चलते अन्य दिनों के मुकाबले शनिवार को टीकाकरण में गिरावट आई है।
15 से 17 आयु वर्ग में 2264 युवाओं को डोज लगाई गई है।, वहीं, 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पहली खुराक लेने वालों की संख्या 2154 और इसी वर्ग में दूसरी डोज लेने वाले 2162 लोग रहे। शनिवार को कुल 6580 लोगों का ही वैक्सीनेशन हुआ है। उन्होेंने बताया कि कम टीकाकरण में भी किशोर वर्ग ही आगे रहा।
टीकाकरण में ग्रामीणों से आगे रहे शहरी
देहात में 2864, शहर क्षेत्र के 3716 ने लगवाई डोज
शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में वैक्सीनेशन की गति धीमी रही। शनिवार को जारी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं।
कुल 6580 लोगों के टीकाकरण में शहरी क्षेत्र के लोगों की संख्या 3716 रही, जबकि देहात में 2864 लोगों ने अपना टीकाकरण कराया है। इतना ही नहीं टीकाकरण के मामले में शहरी युवा वर्ग देहाती नौजवानी के मुकाबले कहीं अधिक उत्साह दिखा रहा हैं। विभागीय आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं।
आयुवर्ग ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्र
15-17पहली डोज 1094 1170
18+ पहली डोज 804 1350
18+ दूसरी डोज 966 1196
कुल वैक्सीनेशन 2864 3716
विवि हॉस्टल में छात्र बीमार, घर भेजने की उठाई मांग
हॉस्टल छात्रों का कराया गया कोरोना टेस्ट
शहर में एक बार फिर से कोविड-19 के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब भी जांच रफ्तार पूर्व की भांति नहीं हैं,ताकि कोविड के लक्षण दिखने वाले हर व्यक्ति की जांच समय से की जा सकें।
सर्दी बढ़ने की वजह से पिछले कुछ दिनों से जुखाम, खांसी और बुखार जैसी बीमारियां भी काफी बढ़ गई है। इसी के चलते शनिवार को चौधरी चरण सिंह विवि के दीनदयाल उपाध्याय हॉस्टल में कई छात्र बीमार पाए गए। जिसकों लेकर छात्रों ने हंगामा भी किया।
जिसमें छात्रों का कहना था कि या तो हॉस्टल बंद किए जा या फिर जो छात्र बीमार है उन्हें घर भेजा जाए या फिर सभी का ठीक से उपचार कराया जाए। छात्रों का अरोप है कि सभी छात्र एक साथ मेस में खाना खा रहे है और हॉस्टल में जांच की कोई सुविधा नहीं है।
ऐसे में यदि हॉस्टल में कोरोना संक्रमण फैलता है तो सभी संक्रमित हो जाएंगे। छात्रों का डर सही भी हैं, जो छात्र बीमार है उन पर विवि की ओर से कोई रोक टोक नहीं की जा रही है।
उनको खुद नहीं पता कि वह बुखार से पीड़ित है या फिर कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए है। इस दौरान छात्रों ने टेस्ट की मांग की। जिसके बाद विवि के हॉस्टलों में छात्रों के टेस्ट कराए गए। विवि के अनुसार अभी तक किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है।

