Saturday, May 9, 2026
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हस्तिनापुर: किसके सिर सजेगा जीत का सेहरा ?

  • चुनावी रणभूमि में धुरंंधरों के बीच कड़ा मुकाबला
  • दूसरी बार किसी भी पार्टी के प्रत्याशी को जीत नहीं हुई नसीब

जनवाणी संवाददाता |

परीक्षितगढ़: उत्तर प्रदेश में हस्तिनापुर विधानसभा सीट का इतिहास रहा है, जिस पार्टी का विधायक जीतता है प्रदेश में उसी की सरकार बनती है। राजनीति में इस सीट का अलग महत्व है। इसलिए सभी पार्टियां इस सीट को फतह करना चाहती है। भाजपा से पूर्व मंत्री दिनेश खटीक को दोबारा, सपा-रालोद गठबंधन से पूर्व विधायक योगेश वर्मा, कांग्रेस से फिल्म अभिनेत्री अर्चना गौतम, बहुजन समाज पाटी से संजीव जाटव पर दांव लगाकर चुनावी रणभूमि के मैदान में उतारा है। देखना है कि अब मतदाता किस पार्टी के प्रत्याशी के सिर जीत का सहेरा पहनाएंगे।

हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर तीन लाख 75 हजार के लगभग मतदाता है, जिनमें गुर्जर, मुस्लिम व दलित बहुल क्षेत्र है। भाजपा से दूसरी पूर्व मंत्री दिनश खटीक मैदान में है। अब देखना है कि दोबारा मतदताओं को किस तरह से लुभाकर जीत हासिल कर सकेंगे। वहीं, सपा रालोद के गठबंधन प्रत्याशी पूर्व विधायक योगेश वर्मा इस बार मजबूती से जीत की ताल ठोक रहे है। क्योंकि करीब पांचवीं बार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। योगेश वर्मा की जहां मुस्लिम, दलितों में अहम् पकड़ मानी जाती है।

वहीं बहुजन समाज पार्टी ने नए चेहरे संजीव जाटव को मैदान में उतारकर नए समीकरण खड़े किए हैं। अब देखना है कि दलितों के साथ अन्य मतदाताओं पर पकड़ बनाकर जीत हासिल करने में कामयाब होते हैं या नहीं। वहीं कांग्रेस ने फिल्मी अभिनेत्री अर्चना गौतम को चुनावी मैदान में उतारकर सबको चौका दिया है। क्योंकि कांग्रेस का नारा है मैं लड़की हूं, लड़ सकती के साथ चुनाव मैदान को फतह करने में कितनी कामयाब होती है। अन्य पार्टियां भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने के मूंड में है।

अब भाजपा से पूर्व मंत्री दिनेश खटीक व सपा रालोद गठबंधन से पूर्व विधायक योगेश वर्मा के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभवना है। बताया जा रहा है कि भाजपा से दिनेश खटीक व सपा-रालोद गठबंधन से पूर्व विधायक योगेश वर्मा, कांग्रेस से अभिनेत्री अर्चना गौतम, बसपा से संजीव जाटव को टिकट मिलने से पार्टी के अन्य दावेदार नया गुल खिलाने के मूड में है।

नाराज नेताओं को पार्टी किस तहर मनाने में सफल होगी, लेकिन इस बार हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर प्रत्याशियों को कड़ी मश्कत का सामना करना पड़ेगा, लेकिन वोटर खामोशी की चादर ओढ़े हुए हैं और चुनावी समर का आनंद ले रहे हैं। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दिनेश खटीक को 99 436 हजार, बसपा से योगेश वर्मा को 63374 हजार, सपा से पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि को 48979 हजार, रालोद प्रत्याशी को पांच हजार के करीब मत मिले थे। हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर दूसरी बार किसी भी पार्टी का प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर सका है।

हस्तिनापुर से योगेश वर्मा सपा प्रत्याशी घोषित

Yogesh

तमाम जद्दोजहद के बाद आखिर रविवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक योगेश वर्मा को सपा प्रत्याशी घोषित कर दिया। योगेश वर्मा हस्तिनापुर से पहले भी विधायक रह चुके हैं। योगेश वर्मा को सपा का मजबूत प्रत्याशी माना जाता रहा है। इसी वजह से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगेश वर्मा पर ही हस्तिनापुर में भरोसा जताया है।

दरअसल, हस्तिनापुर को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बेहद गंभीर थे। हस्तिनापुर में कौन प्रत्याशी मजबूत है? उसको लेकर भी सपा ने सर्वे कराया था। योगेश वर्मा का जैसे ही सपा से टिकट घोषित हुआ तो हस्तिनापुर क्षेत्र में उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। योगेश वर्मा पिछले दो वर्षों से हस्तिनापुर क्षेत्र में चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए थे। भाजपा में जिस तरह से हस्तिनापुर क्षेत्र में बगावत शुरू हुई है, उसका लाभ सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी योगेश वर्मा को मिल सकता है।

क्योंकि हस्तिनापुर में पूर्व विधायक गोपाल काली भी अपना वजूद रखते हैं। उनका विरोध भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा करेगा। अब इस पूरे माहौल को किस तरह से भुनाने में पूर्व विधायक योगेश वर्मा जुट गए हैं। दलित गुर्जर जाट और मुस्लिम गठजोड़ को देखते हुए सपा और रालोद ने योगेश वर्मा को संयुक्त प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतारा है। दरअसल, मिहिर भोज के अपमान की घटना के बाद गुर्जर समाज भाजपा से खफा है।

इस मुद्दे पर बडेÞ गुर्जर नेता अवतार सिंह भड़ाना भाजपा की घेराबंदी भी कर रहे हैं। तीन दिन पहले वह मेरठ आये भी थे और मिहिर भोज के अपमान का वोट की चोट से बदला लेने का ऐलान भी कर गए। अवतार भड़ाना जिस तरह से गुर्जरों में घूम रहे हैं निश्चित रूप से भाजपा को बड़े संकट में डाल सकता है। फिर योगेश वर्मा का टिकट सपा से घोषित होते ही भाजपा की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। भाजपा से राज्यमंत्री दिनेश खटीक घोषित प्रत्याशी हैं, ऐसे में यहां मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है।

विपिन मनोठिया की कैंट से मजबूत दावेदारी

Vipin

मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र से अब विपिन मनोठिया की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। विपिन मनोठिया पहले हस्तिनापुर से टिकट मांग रहे थे, लेकिन अब वह मेरठ कैंट से चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे हैं। दरअसल, मेरठ कैंट क्षेत्र में 95 हजार मतदाता दलित है, जिसके चलते विपिन मनोठिया मेरठ कैंट से दावेदारी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मनोठिया की दावेदारी कैंट से मजबूत है तथा सोमवार को सपा-रालोद गठबंधन मेरठ कैंट से टिकट फाइनल कर सकते हैं। क्योंकि मेरठ में मेरठ कैंट और सिवालखास दो सीट ऐसी बची है, जिस पर गठबंधन के प्रत्याशी अभी घोषित नहीं हुए हैं। भाजपा से अमित अग्रवाल का नाम प्रत्याशी के रूप में घोषित हो चुका हैं। बसपा से अमित शर्मा का टिकट घोषित हो चुका हैं। अभी कांग्रेस प्रत्याशी का नाम भी घोषित होना बाकी हैं।

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