- आजीवन कारावास की सजा काट रहे गौरव प्रताप की प्रतिभा जेल में चढ़ रही परवान
- 250 से अधिक पेंटिंग बना चुका, अपराध को बता रहा समाज से दूर करने वाला
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सांसों की तार पर धड़कन की ताल पर, दिल की पुकार का रंग भरे प्यार का, गीत गाया पत्थरों ने लेकिन चौधरी चरण सिंह मंडलीय कारागार में गीत पत्थर नही बल्कि हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे रायबरेली के गौरव प्रताप सिंह उर्फ अंकुर के कुशल हाथों में ब्रुश और रंग गा रहे हैं। जेल की दीवारें और मुख्य दरवाजे पर लगी आकर्षक पेंटिग्स लोगों का स्वागत कर रही है।
किसी पेंटिग्स में चटख रंगों का प्रयोग किया गया तो किसी पेंटिंग में मन को सुकून देने वाले हलके रंगों का। जेल प्रशासन ने इस अदभुत कलाकार को पूरी तरह से प्रश्रय दिया और एनजीओ के माध्यम से रंग, कैनवास और ब्रुश की व्यवस्था कराई। आज जेल प्रशासन अपना सिर गर्व से ऊंचा करके इस कैदी को सराह रहा है। वहीं अंकुर का कहना है कि अब पूरी जिंदगी जेल में गुजारनी होगी इसलिये पश्चाताप के दर्द को रंगों में तब्दील कर लिया है।
रायबरेली का गौरव प्रताप लखनऊ में अस्पताल में रहने के दौरान हत्या के एक मामले में 2011 को गिरफ्तार किया गया था। उसे 2020 में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। अपने उत्पाती व्यवहार के कारण पहले लखनऊ जेल से उन्नाव जेल ट्रांसफर किया गया फिर उन्नाव से मेरठ भेजा गया। उसे हाई सिक्योरिटी बैरक में दाखिल कर दिया गया।

अति सुरक्षा वाली इस बैरक में उसको तन्हाईने परेशान कर दिया और उसका ध्यान पेंटिग की तरफ कर दिया। वो दीवारों पर चित्र उकेरने लगा। एक दिन वरिष्ठ जेल अधीक्षक राकेश कुमार जब निरीक्षण पर गये और दीवारों पर पेटिंग देखी तो उससे बात की। अंकुर ने बताया कि उसके अंदर चित्रकारी को लेकर अचानक शौक पैदा हो गया। उसको लगने लगा कि अगर उसे मौका मिले तो बेहतरीन काम कर सकता है।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक और जेलर राजेन्द्र सिंह ने इस कैदी को नई जिंदगी देने का फैसला किया। एनजीओ की मदद से उसे रंग और कैनवास उपलब्ध कराए गए। जेल की हर दीवार पर सीनरी और कल्पनाओं को उभारना शुरु कर दिया गया। अंकुर ने बताया कि उसे रंगों के समावेश में और मेमोरी ड्राइंग के बीच तालमेल बैठाने में देर नहीं लगती है। रात भर वो जो भी सोचता है उसे अगले दिन रंगों से सराबोर कर देता है।
जेल की लगभग हर दीवार को उसने अपनी विलक्षण प्रतिभा से रंग दिया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि अंकुर पूरी तरह से बदल गया है पहले वो जरुर उत्पाती था लेकिन अब उसने खुद को रचनात्मक बना लिया है। उसकी पेंटिंग की धूम जेलों में गूंज रही है। जेल प्रशासन अब इसके द्वारा बनाई गई पेटिंंग को व्यवसायिक रुप देने की योजना बना रहा है। इससे जो पैसा आएगा उसे बंदी कल्याण समिति में डाला जाएगा।
अपराध से बचें युवा: अंकुर
चित्रकार, लेकिन कैदी अंकुर का कहना है कि उसके परिवार में मां, पत्नी नीतू और बारह वर्षीय बेटा है। चार महीने में जब उसके घर वाले मिलने आते हैं और पेटिंग देखते हैं तो काफी खुश होते हैं। उसका कहना है कि अपराध देखने में भले रोमांचक लगता हो लेकिन इसका अंत बुरा है और ये समाज और परिवार से दूरकर जिंदगी को नरक बना देता है। उसने कहा युवाओं को अच्छे कामों में लगना चाहिये।

