Monday, May 17, 2021
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प्रशासन के दावे फेल, 48 घंटों से आम आदमी को नहीं मिली आक्सीजन

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  • लोगों का आरोप है कि न ही है कोई सुध लेने वाला और न ही दुःख समझने वाला
  • अग्रवाल गैस पर 24 घंटों से आॅक्सीजन खत्म, झूठी उम्मीद पर लाइन में लगे रहे लोग

ऋषिपाल सिंह |

मेरठ: आम आदमी को आसानी से आॅक्सीजन प्राप्त कराने के प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है। दावे अलग हैं और जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लोगों को पिछले 24 घंटे से आॅक्सीजन नहीं मिले है उसके बावजूद लोग लाइन में लगकर आॅक्सीजन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उधर, प्लांट संचालक लोगों को कोई सही जवाब देने के तैयार नहीं है। यह हाल अग्रवाल गैस प्लांट का है। जहां प्रशासन की ओर से आम आदमी के लिये आॅक्सीजन की व्यवस्था की गई है।

जनवाणी टीम रविवार को हकीकत जानने के लिये उद्योगपुरम स्थित अग्रवाल गैस प्लांट पहुंची। यहां जाकर देखा तो लोग शनिवार शाम से लाइन में लगे हैं। लोगों यहां आश्वासन दिया गया कि शनिवार देर रात तक आॅक्सीजन आ जाएगी। उसके बाद लोगों को मिलनी शुरू हो जाएगी, लेकिन लोगों को लाइन में लगे 24 घंटों से अधिक हो गये, लेकिन अभी तक यह नहीं पता कि आॅक्सीजन मिलेगी या नहीं। बस लोग इस उम्मीद में लाइन लगाये बैठे हैं कि बस एक सिलेंडर मिल जाए। रविवार सुबह से ही प्लांट संचालक लोगों से यह कह रहे हैं कि दो घंटे में आॅक्सीजन आ जाएगी, लेकिन अभी तक कोई आॅक्सीजन नहीं पहुंची।

जाकिर कालोनी निवासी अब्दुल गफ्फार ने बताया कि कल उनका बेटा शाकिब यहां लाइन में लगा था देर रात तक वह लाइन में लगा रहा। सुबह पांच बजे से वह खुद लाइन में लगे हैं। आॅक्सीजन प्लांट संचालक सही जवाब नहीं दे रहे हैं। बस यह कह देते हैं कि दो घंटों में आॅक्सीजन आने वाली है, लेकिन हालात यह हैं कि यहां 48 घंटे होने को हैं, लेकिन अभी तक आॅक्सीजन नहीं पहुंची है। लोगोंं का कहना है कि प्रशासन ने वादा किया था कि आॅक्सीजन की कमी नहीं होगी, लेकिन यहां हालात बद से बदतर हो चुके हैं। हम लोग सुबह से लाइन में लगे हैं, लेकिन यही नहीं मालूम कि आॅक्सीजन आयेगी कि नहीं। कोई प्रशासनिक अधिकारी या कोई जनप्रतिनिधि सुध लेने को ही तैयार नहीं है।

इस तरह से तो लोग मरने लगेंगे उन्हें कोई बचाने वाला नहीं होगा। लोगों में प्रशासन के खिलाफ इस प्रकार गुस्सा कि वह कह रहे थे कि क्या इसी तरह से अच्छे दिन आएंगे। यही नहीं यहां एक किमी तक वाहनों की लाइन लगी है। लोग वाहन में ही सोने का इंतजाम कर रात रात भर आॅक्सीजन सिलेंडर पाने की उम्मीद जगाये बैठे हैं। उधर, शायद प्रशासन इस ओर से आंखें मूंदे बैठा है। प्रशासनिक अधिकारी शायद यह भूल गये हैं कि उनकी ओर से अग्रवाल गैस पर आम आदमी के लिये व्यवस्था की गई है। अधिकारी आम आदमी को ही भूले बैठे हैं।

दो आॅक्सीजन प्लांट से 2176 सिलेंडरों की आपूर्ति

कोरोना महामारी में आॅक्सीजन की कमी से लोगों की सांसे उखड़ रही है। प्रशासन ने दो आॅक्सीजन प्लांटों से अस्पताल और नर्सिंगहोमों और एक प्लांट से प्राइवेट लोगों के लिये आॅक्सीजन सिलेंडर देने की व्यवस्था की है। बिजौली स्थित मेडिआक्सी और मोहिउद्दीपुर स्थित कंसल गैस एजेंसी में भीड़ नहीं दिख रही है। इन दो सेंटरों से आज 2176 सिलेंडरों की आपूर्ति की गई। अपर जिलाधिकारी नगर अजय कुमार तिवारी ने बताया कि बिजौली से 977 और कंसल गैस एजेंसी से 814 गैस सिलेंडर अस्पतालों को दिये गए। उन्होंने बताया कि इन दोनों एजेंसियों को 9.79 टन गैस की दी गई है।

बिजौली और कृष्णा एयर प्रोडेक्ट में चल रहा सेटिंग का खेल

आॅक्सीजन सिलेंडर देने के लिये बिजौली स्थित मेरठ मेडिमेक्स और कृष्ण एयर प्रोडेक्ट में सेटिंग का खेल चल रहा है। यहां आम आदमी को सिलेंडर दिये जाने पर मनाही है। यहां सिर्फ अस्पताल संचालकों को ही सिलेंडर दिये जा रहे हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी अधिकारी या पुलिस की सोर्स लेकर आता है तो उसे सिलेंडर दे दिया जाता है।

शहर में मेरठ मेडिमेक्स, कृष्णा ऐयर प्रोडेक्ट, अग्रवाल गैस, कंसल गैस और अब माहेश्वरी गैसेस पर आॅक्सीजन उपलब्ध हैं। यहां अग्रवाल गैस और माहेश्वरी प्लांट को छोड़कर सभी आॅक्सीजन प्लांटों पर सिर्फ अस्पताल संचालकों को आॅक्सीजन दी जा रही है, लेकिन यहां भी सेटिंग का खेल चल रहा है।

बिजौली स्थित प्लांट पर आॅक्सीजन लेने पहुंचे सूरजकुंड निवासी मुकुंद का कहना है कि वह यहां आॅक्सीजन लेने आये हैं, लेकिन अंदर से कर्मचारियों ने उन्हें आॅक्सीजन देने से मना कर दिया है, लेकिन यहां कोई ओर भी मेरठ शहर से सिलेंडर लेने पहुंचे थे। उन्होंने यहां कर्मचारियों की फोन पर किसी अधिकारी से बात कराई, जिसके बाद उन्हें सिलेंडर दे दिया गया। यही व्यवस्था रिठानी रोड स्थित कृष्ण ऐयर प्रोडक्टर की थी।

यहां भी वाहन अंदर बाहर जा रहे थे, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति को सिलेंडर नहीं दिया जा रहा था। प्रशासन लाख कोशिशों के बावजूद व्यवस्था नहीं बनवा पा रहा है। अगर यही हाल रहे तो इसे लेकर दिन-पर-दिन हंगामा होता रहेगा। बीते कुछ दिनों से आॅक्सीजन के लिये हाहाकार मचा है। प्रशासन दावे कर रहा है कि सब ठीक है, लेकिन यहां कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है।

माहेश्वरी प्लांट खुलते ही उमड़ी भीड़, उड़ी गाइडलाइन की धज्जियां

आम आदमी के लिये प्रशासन की ओर से एक ओर प्लांट की व्यवस्था की गई है, लेकिन इस प्लांट के शुरू होते ही यहां भीड़ उमड़ पड़ी। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर लाइन में लग गये वह यह भी भूल गये कि जिस मर्ज की वह दवा लेने आये हैं। वह यहां से वही मर्ज न ले जाएं। लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़े रहे, लेकिन प्रशासन की ओर से यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई। यहां कोविड नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ार्इं गर्इं।

अग्रवाल गैस प्लांट के बाद रिठानी रोड स्थिल रेलवे फाटक के पास माहेश्वरी प्लांट पर भी आम आदमी को आॅक्सीजन दिने के लिये चुना गया। यहां पहले दिन उद्घाटन होते ही व्यवस्था धड़ाम हो गई। जैसे ही लोगों को पता लगा कि यहां आम लोगों को गैस मिलेगी तो यहां सैकड़ों की संख्या में लोग सिलेंडर लेकर पहुंच गये। न किसी को टोकन दिया गया न ही कोई और व्यवस्था बनाई गई।

जिस कारण यहां हंगामा खड़ा हो गया। लोग यह तक भूल गये कि वह यहां जिंदगी देने वाली आॅक्सीजन लेने आये हैं। यहां लोग एक के ऊपर एक लाइन लगाकर खड़े हो गये। सोशल डिस्टेंसिंग की सारी धज्जियां उड़ गर्इं। उधर, प्रशासन की ओर से भी यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई कि लोग आराम से आॅक्सीजन ले सकें। यहां लोग पहले नंबर आने को लेकर एक-दूसरे से ही भिड़ गये।

हालात इतने खराब हो गये कि लोगों ने यहां नियमों की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। हंगामे के बावजूद प्लांट संचालक और प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। यहां लम्बा जाम लग गया जिसके कारण लोग परेशान रहे। आसपास के लोग भी यहां लगी भीड़ को देखकर डर गये और कुछ लोग तो अपने घरों में ही घुस गये। यह प्लांट कालोनी के बीच में है, जहां अच्छी खासी बसापत है। अगर इस प्रकार यहां पर भीड़ एकत्र होगी तो लोगों को बीमारी फैलने का डर लगा रहेगा।

आसपास के लोगों को सता रहा बीमारी का डर

माहेश्वरी प्लांट के पास काफी संख्या में बसापत है। यहां काफी संख्या में लोग निवासी करते हैं। प्लांट के बाहर इस तरह सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्र होने के कारण यहां निवास करने वाले लोग डर गये। जिसके बाद लोगों ने हंगामा किया। उन्होंने कहा कि यहां न जाने कहां-कहां से लोग एकत्र हो गये हैं। इस तरह से यहां बीमारी फैलने का खतरा बढ़ेगा। अगर प्रशासन की ओर से जल्द ही कोई व्यवस्था नहीं की गई तो वह प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

डीएम ने कमेटी बनाई, मजिस्ट्रेट दे रहे बेतुका बयान

कोरोना के बढ़ते प्रकोप और लोगों की जा रही जान ने प्रशासन को भले ही परेशानी में डाल दिया हो, लेकिन प्रशासन की योजना को प्रशासनिक अधिकारी ही पलीता लगाने में लगे हुए हैं। डीएम ने अस्पतालों में बेड के लिये परेशान घूम रहे लोगों की मदद के लिये मजिस्ट्रेटों की तैनाती की है। हैरानी की बात यह है कि परेशान लोगों ने जब इन मजिस्ट्रेटों को फोन मिलाया तो उनका फोन उठाना भी गवारा नहीं समझा गया। ऐसे में परेशान मरीजों को आखिर कौन बेड दिलवाएगा।

मेरठ में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपा रखा है। अकेले अप्रैल महीने में ही 20405 लोग संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में इन मरीजों के लिये अस्पताल भी कम पड़ रहे है। इसके अलावा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और अन्य जनपदों के मरीज भी इलाज के लिये मेरठ आ रहे है। इस कारण एक मामूली व्यक्ति को बेड हासिल करने के लिये पसीना बहाना पड़ रहा है। डीएम के बालाजी ने मरीजों की समस्याओं को देखते हुए आठ मजिस्ट्रेटों को तैनात करते हुए उनको अस्पतालों की जिम्मेदारी दी है।

रविवार को जब इन मजिस्ट्रेटों को अस्पतालों में बेड दिलाने के लिये फोन किया गया तो अधिकांश मजिस्ट्रेटों ने फोन नहीं उठाया जबकि कुछ लोगों ने औपचारिकता वाली बात करनी शुरु कर दी। जब एसडीएम सदर से फोन करके कहा गया कि सुभारती अस्पताल में बेड दिलवा दीजिये तो उनका कहना था कि पहले सुभारती जाकर बात करो या फिर सीएमओ से बात कर लो बेड मिल जाएगा। यह काम तो पहले भी लोग कर रहे थे, लेकिन समस्या का समाधान तो नहीं हो रहा था।

वहीं एसीएम द्वितीय के मोबाइल नंबर 9454416689 को बार बार फोन मिलाने पर नहीं उठाया गया। इसी तरह एसीएम तृतीय के मोबाइल नंबर 9454416712 पर भी काल रिसीव नहीं की गई। इसी तरह एसीएम चतुर्थ 9454415704 पर लगातार रिंग बजती रही, लेकिन उसे उठाना जरूरी नहीं समझा गया। सुबह से लेकर शाम तक परेशान मरीज अस्पतालों में बेड के लिये भटकते रहे, लेकिन उनकी मदद करने को कोई तैयार नहीं दिखा। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार से भी इस बारे में कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन उन्होंने भी सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन बेड नहीं दिलाया।

आॅक्सीजन बेड की दिक्कत

कोविड के उन मरीजों को ज्यादा परेशानी हो रही जिन मरीजो को सांस लेने में दिक्कत आ रही है और आॅक्सीजन पर आधारित है। प्रशासन के द्वारा बनाये गए 30 कोविड सेंटरों में कई नर्सिंगहोमों के पास वेंटिलेटर और आॅक्सीजन की सुविधा नहीं है। ऐेसे में मरीजों की पहली प्राथमिकता सरकारी और बड़े नर्सिंगहोमों की है, लेकिन इन अस्पतालों की दशा बेहद खराब है। ओवरलोडेड चल रहे इन अस्पतालों में बेड मिलना असंभव साबित हो रहा है।

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