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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
  • सुसाइड नोट मिलने के बाद शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने हिरासत में लिया

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उनका शव अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास में मिला। शाम को सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। पुलिस ने सूचना मिलते ही मठ को सीज कर दिया।

जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि पर परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी आरे महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी वसीयत की जानकारी भी इसी में दी। पुलिस का इस संबंध में कहना है कि वो अभी इसे विस्तार से देख रहे हैं और उसके बाद ही स्थिति को साफ किया जा सकेगा।

हिरासत में लिए जाने के पहले आनंद गिरि मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि इस बात में उन्हें कोई शक नहीं कि उनके गुरू  महंत नरेंद्र गिरि की हत्या की गई है। इसमें कौन लोग शामिल है, इस बात का खुलासा होना चाहिए। कई लोग ऐसे हैं जिन पर उन्हें शक है और सच्चाई सामने आनी चाहिए। मैं अगर दोषी पाया जाता हूं तो फिर मुझे भी सजा मिलनी चाहिए।

संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित आवास में रहते थे। सोमवार की शाम सेवादार उनके कमरे में पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। महंत नरेंद्र गिरि का शव फांसी पर लटक रहा था। पूरे मठ में हड़कंप मच गया। सूचना पर जिले के सभी आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने मठ को सीज कर दिया था।

मौके पर फोरेंसिक टीम और फील्ड यूनिट भी जांच कर रही थी। डीएम ने लखनऊ में उच्चाधिकारियों को प्रारंभिक सूचना से अवगत कराया। महंत नरेंद्र गिरि हाल में ही अपने शिष्य आनंद गिरि से विवाद में चर्चा में आए थे। हालांकि वह विवाद आनंद गिरि के माफी मांगने के बाद खत्म हो गया था लेकिन मठ और मंदिर में आनंद का प्रवेश नहीं हो पाया था। इसके अलावा जाहिरा तौर पर कोई बड़ा विवाद अभी सामने नहीं आया।

जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। उनका शव फांसी पर लटका मिला था। पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट होगा कि उनकी मौत कैसे हुई? आईजी केपी सिंह का कहना है कि नरेंद्र गिरि का शव फांसी पर लटका मिला।

प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही अंतिम रूप से कुछ कहा जा सकता है। नरेंद्र गिरि के निधन की सूचना पर डिप्टी सीएम केशव मौर्या और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके निधन पर शोक जताया है।

पुलिस अधिकारियों ने मठ के सेवादारों से पूछताछ की है। सोमवार को सुबह से ही मठ आने और जाने वालों की सूची भी मांगी गई है। महंत नरेंद्र गिरी के मोबाइल नंबर की भी जांच की जा रही है।

पीएम मोदी ने उन्हें अनेक धाराओं को जोड़ने वाला बताया

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि जी का देहावसान अत्यंत दुखद है। आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित रहते हुए उन्होंने संत समाज की अनेक धाराओं को एक साथ जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। प्रभु उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति!!

सीएम योगी ने जताया दुख, बताया अपूरणीय क्षति

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि जी का ब्रह्मलीन होना आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति है। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा शोकाकुल अनुयायियों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!

केशव प्रसाद मौर्य ने जताया दुख, बोले- मुझे विश्वास नहीं हो रहा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि उन्हें अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि महाराज जी उनके बीच नहीं है। अगर उन्होंने यह कदम किसी के दवाब में उठाया है तो इतना पक्का है कि उस व्यक्ति को सजा जरूर मिलेगी।

अखिलेश यादव ने जताया दुख

महंत के निधन के बाद इस पर प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य नरेंद्र गिरि जी का निधन, अपूरणीय क्षति! ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व उनके अनुयायियों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि।

एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार बताया सुसाइड नोट का सच

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि मौत के मामले में एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि शव को महंत नरेंद्र गिरि के अनुयायिओं द्वारा दरवाजा तोड़ कर फंदे से उतारा गया है। सुसाइड नोट मिला है। जिस पर महंत के शिष्य आनंद गिरि की प्रताड़ना से परेशान होकर यह कदम उठाने की बात लिखी है।

शिष्य आनंद गिरि से विवादों के कारण भी यह चर्चा में रहे

निरंजनी अखाड़े से निष्कासित योग गुरु आनंद गिरि और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के विवादों के बीच मठ-मंदिरों की जमीनों को लेकर भी घमासान काफी सुर्खियों में रहा। स्वामी आनंद गिरि ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को पत्र भेजकर अखाड़े के विवाद की जानकारी दी थी।

उन्होंने आरोप लगाया था कि शहर के कीडगंज में स्थित गोपाल मंदिर भी आधा बेच दिया गया है। मठ और मंदिर की बेची गई जमीनों के करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के लाखों रुपये के चढ़ावे और प्रसाद से होने वाली बेहिसाब आमदनी की भी जांच कराने की मांग है। इसके बाद यह विवाद काफी दिनों तक चला लेकिन आनंद गिरि ने माफी मांगकर इसे समाप्त कर दिया था और इनके बीच विवाद को सुलझाने का काम लखनऊ के अधिकारी ने किया था।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बागांबरी पीठ प्रयागराज के परमाध्यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज के निधन का समाचार बड़ा दुखद है। जिन संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हुआ है कोई गहरा षड्यंत्र लगता है। वह बड़े प्रखर और दृढ़ निश्चय सन्यासी थे आत्महत्या वह नहीं कर सकते। किसी गहरे षड्यंत्र के अंतर्गत उनकी हत्या हुई है। हम प्रदेश की योगी सरकार से मांग करते हैं की उच्च स्तरीय जांच तत्काल बैठाई जाए। श्री नरेंद्र गिरि जी महाराज सनातन परंपराओं का पालन करने वाले थे तथा समस्त षड्दर्शन साधु समाज और तहरे अखाड़े का समन्वय बनाकर चलते थे।  संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु ने संत समाज को एक गहरे विषाद में डाल दिया है। 
-स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि,जीवनदीप आश्रम परमाध्यक्ष रूडकी,  वरिष्ठ महामंडलेश्वर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा

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