Tuesday, June 15, 2021
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बैंडबाजे वालों को 20 दिन में आठ लाख का नुकसान

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  • 20 अप्रैल के बाद सारी बुकिंग हुई रद

जनवाणी संवाददाता

मेरठ: कोरोना ने चारों ओर हाहाकार मचा रखा है। जहां देखों वहां हालात खराब हो चुके हैं। सभी उद्योगों पर इसका असर देखा जा रहा है, लेकिन शादियों में बजने वाले बैंडबाजे वाले तो भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। उनकी कमाई के साधन बंद हो चुके हैं और खर्च वहीं हैं जो पहले थे। कर्मचारियों को तनख्वाह दी जा रही है। दुकान का किराया जा रहा है, लेकिन कमाई बंद है। ऐसे में बैंडबाजों वालों के हालातों पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है।

शादियों के सीजन का इंतजार बैंड वालों को बड़ी बेसब्री से रहता है और हो भी क्यों ना। इनका पूरे साल का खर्चा शादियों के सीजन से ही चलता है। एक सीजन में ही यह लोग अपने साल भर के खर्चे लायक कमा लेते हैं, लेकिन कोरोना काल के कारण पिछले साल से लेकर अब तक दो सीजन इनके बर्बाद हो चुके हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि यह लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं।

मेरठ की ही बात करें तो यहां शहर भर में 300 से 400 बैंडबाजे वाले हैं। जिनका खर्चा केवल शादियों के सीजन से ही चलता है। एक बैंडबाजे वाले के साथ 20 से 25 लोगों का रोजगार जुड़ा होता है। इनके यहां 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं जो बैंड बजाने, लाइटिंग, आतिशबाजी आदि का कार्य करते हैं। पिछले दो सालों से यह सभी परिवार परेशानी में हैं। इनकी हालत की ओर कोई ध्यान देने वाला नहीं है।

हालात इस कदर खराब है कि इनके पास अपनी बंद पड़ी दुकान के किराये के रुपये तक देने को नहीं हैं और सरकार इनकी ओर से आंखे मूंदे बैठी है। अगर यही हालात रहे तो यह लोग ऐसे ही मर जाएंगे और कोई पूछने वाला नहीं होगा। इनके परिवार के लोगों की स्थिति भी खराब होती जा रही है। इन लोगों का कहना है कि अब यह किससे गुहार लगाये जो इनकी स्थिति को सुधार सके।

पिछले एक महीने में लाखों का नुकसान

जय हिंद बैंड के महेन्द्र कुमार धानक ने बताया कि 22 मार्च 2020 से लेकर अब तक यही हालात हैं। पिछले साल ही हालात पूरी तरह से खराब हो चुके थे जो इस साल भी नहीं सुधर पाये। अभी तो शादियों का सीजन शुरू ही हुआ था, लेकिन कोरोना ने उनकी कमर ही तोड़कर रख दी है। रोजगार पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकारी लोगों और बड़ी कंपनियों को जीएसटी छूट, लोन आदि की सुविधा होती है, लेकिन मीडिल क्लास को कोई देखने वाला नहीं है। हम अपने कर्मचारियों को लगातार वेतन देते आ रहे हैं, लेकिन हमारे कार्य बंद पड़े हैं। अप्रैल से मई माह के सीजन की बात करें तो इस महीनें में ही आठ लाख रुपये का नुसान हुआ है। अप्रैह माह में हमारे 20 साये रद हुए। एक साये के 40 हजार रुपये लिये जाते हैं इस तरह से हमे लाखों का नुकसान हुआ लेकिन कोई देखने वाला नहीं है।

नवंबर में सुधर सकते हैं हालात

पवन कुमार धानक का कहना है कि दुकानों का किराया हम हर महीने बिना काम के चुकाते जा रहे हैं। हमारे परिवार के भूखे मरने की नौबत पहुंच रही है, लेकिन कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। कोरोना महामारी ने उन्हें कर्जे में लाकर छोड़ दिया जा है। किराये व अन्य खर्चों के लिये रुपये ब्याज पर लेकर काम चलाना पड़ रहा है।

अगर यही हालात रहे तो एक दिन हम लोग सड़क पर आ जायेंगे और कोई देखने वाला नहीं होगा। हम सरकार से मांग करते हैं कि हमें लोन आदि दिया जाये जिससे हम अपने रोजगार को बचा सकें। अभी नंबर तक हालात सुधर सकते हैं इतने रोजगार को बचाने के लिये कोई उपाय सरकार को सोचना चाहिए।

रियाज नहीं कर पाते कलाकार

राजा बैंड के इख्तियार बताते हैं कि अप्रैल माह में कई बुकिंग थी जिससे कर्मचारियों के चेहरे में मुस्कान खिली थी, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद से शादियां रद होनी शुरू हुर्इं और स्थिति इस कदर खराब हो गई कि लोग और साथ में काम करने वाले सभी कर्मचारी परेशान हैं।

कर्मचारी इधर-उधर से मांग कर अपना कार्य चला रहे हैं। यहां तक कि जो लोग गाना आदि गाते हैं उनका रियाज और बैंड बजाने वालों का भी रियाज नहीं हो पा रहा है। रोजगार की स्थिति इस कदर खराब हो चुकी है कि हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं।
500 से ज्यादा शादियां रद, डेट बढ़ाई

अब नहीं देख पाएंगे बेटे को दूल्हा बने

कोरोना का कहर शादियों के सीजन पर भी कहर बनकर टूटा है। शहर भर में 500 से अधिक लोगों की शादियां रद हुर्इं है। कुछ लोगों ने शादियों की तिथि बढ़ाई है तो कुछ ने शादियां रद ही करा दी हैं। कोरोना के कारण रास्ते बंद होने के कारण कहीं दूल्हा समय पर नहीं आ पाया तो कहीं पर अपने बेटे को दूल्हा बनने का सपना देख रहे पिता को ही कोरोना ने लील लिया।

शादियों का सीजन मई माह तक चलता है। पिछले अप्रैल माह से लेकर मई माह तक की बात करें तो अभी तक 500 से अधिक शांदियां रद हो चुकि हैं। शादियों के रद होने से मंडप संचालकों, बैंडबाजा संचालकों पर तो फर्क पड़ा ही है साथ ही वह लोगा भी परेशान हैं जिनकी शादियां रद हुई हैं। अब पता नहीं अगला साया कब पड़ेगा और हालात कब ठीक होंगे जब शादिया होंगी। इनमें कुछ ऐसे परिवार भी हैं जिनका सब कुछ तबाह हो गया।

12 को होनी थी बेटे की सगाई पिता को लील गया कोरोना

मेरठ निवासी चरण सिंह ने अपने बेटे की शादी के सपने देख रखे थे कि उनका बेटा दूल्हा बनेगा तो ऐसा दिखेगा। उनके सपने को न जाने किसकी नजर लग गई। बेटे की सगाई 12 मई को निर्धारित थी, लेकिन उससे पहले ही वह कोरोना की चपेट में आ गये और दुनिया छोड़कर चले गये। ना जाने कितने सपने अपने बेटे की शादी के देखे थे लेकिन सपने टूट गये और उससे पहले ही वह दुनिया छोड़ चले गये। इस कारोना ने ना जाने कितनों के घर बर्बाद कर दिये हैं।

फ्लाइट बंद, नहीं होगी शादी

अवधेश सिंघल के बेटे की शादी 14 मई को तय थी, कोरोना की गाइडलाइन के आधार पर कार्यक्रम भी तय किये जा चुके थे, लेकिन बेटा अमेरिका में रहता है। कोरोना के चलते इंटरनेशनल उड़ाने रद की जा चुकि हैं और उनके शुरू होने की कोई उम्मीद फिलहाल नहीं है। ऐसे में अवधेश सिंघल ने अपने बेटे की शादी रद कर दी है।

न जाने कितनों के सपने टूटे

अपने बेटे बेटियों की शादी को लेकर न जाने कितने लोगों ने सपने देख रखे थे, लेकिन सभी के सपने पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं। लोगों ने अपनी शादियां रद करानी शुरू भी कर दी हैं। अनिल सिंघल के बेटे की शादी चार मई को थी लेकिन उन्होंने अपने बेटे की शादी रद करके अब नवंबर माह में निर्धारित की है। इसके अलावा साकेत निवासी डा. पीके गुप्ता के बेटे की शादी भी शिफ्ट होकर अब नंवंबर माह में तय की गई है। इसी तरह सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी शादियां रद की हैं।

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