Friday, July 1, 2022
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परनिंदा

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शेख मुसलहुद्दीन, जिन्हें शेख सादी कहते हैं, का जन्म 1172 में हुआ था। वे ईरान के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार और आध्यात्मिक विचार थे। इनके पिता अब्दुल्लाह धार्मिक प्रवृत्ति के थे। उनकी इस धार्मिक प्रवृत्ति का प्रभाव शेख शादी के जीवन और उनके विचारों पर दिखाई देता है। उन्होंने 30-40 वर्षों तक संसार का भ्रमण किया। उनका यह भ्रमण अपने पिता के साथ ही प्रारंभ हुआ। उनके पिता ने इस भ्रमण के दौरान उन्हें जीवन के अनेक पाठ पढ़ाए। एक बार भी बात है अपने बचपन में शेख सादी अपने पिता के साथ मक्का की यात्रा कर रहे थे।

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उस समय यात्री इकट्ठे होकर दल के रूप में यात्रा करते थे। इन दलों के कुछ नियम भी होते थे। शेख सादी जिस दल के साथ यात्रा कर रहे थे उसका नियम था-आधी रात को उठकर प्रार्थना करना। एक दिन आधी रात के समय शेख सादी और उनके पिता उठे और उन्होंने नियम के अनुरूप प्रार्थना की। पर शेख सादी ने देखा कि दूसरे बहुत से लोग सो रहे हैं। उन्हें सोता हुआ देखकर शेख सादी ने अपने पिता से कहा, देखिए! यह लोग कितने आलसी हैं।

न उठते हैं और न प्रार्थना करते हैं। पिता ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया। शेख सादी ने दोबारा वही बात दोहराई। इस पर उनके पिता ने कड़े शब्दों में कहा, अरे सादी बेटा! अगर तू भी न उठता तो अच्छा होता। शेख सादी ने पिता से प्रश्न किया कि ऐसा क्यों? इस पर पिता ने उत्तर दिया, जल्दी उठकर पूरा ध्यान प्रार्थना पर लगाने के स्थान पर दूसरों की निंदा करने से तो न उठना ही ज्यादा ठीक था। पिता की शिक्षा को शेख सादी ने अपने जीवन पथ का पाथेय बनाया।
-डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री


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