Thursday, July 29, 2021
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एनजीटी-सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दे रहे हैं 1530 तालाबों के अवैध कब्जे

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  • 362 तालाब ही अस्तित्व में, 92 की होगी खुदाई
  • कभी क्रांतिधरा की शोभा बढ़ाते थे 100 तालाब
  • सिमट गए तालाब बन गई ऊंची-ऊंची इमारतें
  • दोषियों पर नहीं हुई एफआईआर न हटाए कब्जे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के आदेश है कि तालाबों को कब्जा मुक्त कराओ…। ये आदेश सिर्फ फाइलों में ही है। धरातल पर नहीं। वास्तविकता बेहद चौकाने वाली है। सरकारी रिकॉर्ड में 1530 तालाबों पर अवैध कब्जे हैं, जिनको एक दशक से कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका। महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ तालाब तो ऐसे है, जिनको कृषि और आबादी में दर्ज कर दिया गया, लेकिन अवैध कब्जे से मुक्ति नहीं मिली।

कहने को जिन तालाबों पर अवैध कब्जे हैं, उनको खाली ही नहीं कराया गया। क्रांतिधरा की बात करें तो 100 से ज्यादा तालाब कभी शहर में हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान में बड़ी-बड़ी इमारत वहां बनी हुई है। आखिर इन तालाबों का अस्तित्व खत्म करने वालों के खिलाफ नहीं तो कोई एफआईआर ही दर्ज कराई गयी और नहीं कब्जे ही हटवाएं गए।

यह हालत है शहर में तालाबों की। जो तालाब बचे भी है, उनकी देख-रेख नहीं होती। महानगर में नगर निगम के रिकॉर्ड को देखा जाए तो पांच दशक पहले करीब एक सौ तालाब विभिन्न स्थानों पर हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान में तालाबों पर कब्जे हैं। जटौली में तालाब था, अब कुछ हिस्सा ही बचा है।

इसका दौरा नगरायुक्त मनीष बंसल ने किया था, जिसके बाद तालाब की जमीन में बने कुछ मकानों का ध्वस्तीकरण भी किया गया, लेकिन पूरी तरह से तालाब की जमीन को कब्जा मुक्त नहीं किया जा सका। इसी तरह से शोभापुर में भी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे हैं। डाबका में भी तालाब पर अवैध कब्जा होने की रिपोर्ट निगम के पास है, लेकिन कब्जे नहीं हट पा रहे हैं। बड़ी तादाद ऐसे तालाबों की है, जहां पर रिकॉर्ड में कभी तालाब दर्ज थे, वर्तमान में तालाब की जगह इमारत खड़ी है।

डा. अजय कुमार ने एनजीटी में एक याचिका भी दायर कर रखी हैं, जिसमें शहर के तालाबों को कब्जा मुक्त करने की मांग की गई, लेकिन यह सब कागजों पर चल रहा है। एनजीटी ने भी कई बार नोटिस भेजे, लेकिन तालाब का अस्तित्व नहीं बचा पाए। दरअसल, शासन से एक आदेश आया है कि फिर से तालाबों की जमीन को तालाब के रूप में सरकारी दस्तावेज में दर्ज की जाए।

इस पर प्रशासन काम कर रहा है। यदि तालाब कब्जा मुक्त होते है तो करीब एक लाख लोगों के बने मकान प्रभावित हो सकते हैं, ऐसी रिपोर्ट प्रशासन ने तैयार की है। वर्ष 1972 में चकबंदी की प्रक्रिया के बाद पानी से सूखे तालाबों को तहसीलदार और एसडीएम के स्तर से कृषि में दर्ज कर दिया गया, जो तालाब गांव के अंदर आ गए, उन्हें आबादी में दर्ज कर दिया गया। जिले में लगभग 1530 तालाबों की नौय्यत बदलने का कार्य अब तक हुआ। एनजीटी और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद डीएम ने सभी एसडीएम को इन तालाबों को पुरानी स्थिति में रिकार्ड में दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

एसडीएम के स्तर से नोटिस जारी किये गए हैं। एक जनवरी 2021 से चल रही इस कार्रवाई में जनपद की मेरठ, मवाना और सरधना तहसील में उन सभी तालाबों के निरस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर दी गई हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन जिन 1530 तालाबों पर अवैध कब्जे होना अपने रिकॉर्ड में मान रखा है, उनको कब्जा मुक्त क्यों नहीं कराया जा रहा हैं? एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के भी इसमें आदेश हैं, फिर प्रशासन इसमें कदम आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा है?

जनपद में 1530 तालाबों पर कब्जे

प्रशासन ने माना है कि 1530 तालाब जनपद भर में ऐसे हैं, जो सरकारी दस्तावेज में तो तालाब है, लेकिन मौके पर इन पर अवैध कब्जे है। इनको कब्जा मुक्त नहीं किया गया। वर्तमान में 362 तालाब ऐसे हैं, जो अस्तित्व में हैं। इनमें से 92 तालाब ऐसे है, जिनकी खुदाई कराने के लिए प्रशासन ने तैयारी की है। यह खुदाई मनरेगा से कराई जाएगी।

पंचायत चुनाव भी हो चुके हैं, लेकिन खुदाई का कार्य बरसात से पहले हो जाना चाहिए था, मगर अभी तक तालाबों की खुदाई का कार्य आरंभ नहीं हुआ है। यह खुदाई इसी वित्तीय वर्ष में करायी जानी हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अभी यह जानकारी ही नहीं है कि तालाबों की खुदाई आरंभ हुई भी है या फिर नहीं।

तालाब प्राधिकरण की घोषणा तो हुई धरातल पर काम नहीं

प्रदेश सरकार की उस घोषणा से उम्मीद जगी थी कि तालाब विकास प्राधिकरण बनेगा, जो तालाबों रिकॉर्ड खंगालने का काम करेगा। क्योंकि करीब एक हजार से ज्यादा तालाब गायब हो चुके हैं। जनपद में जल स्तर भी लगातार गिर रहा है। एक तरह से कुछ क्षेत्र तो ऐसे है, जो कभी भी डार्क जोन में आ सकते हैं। एक तरह से देखा जाए तो तालाबों का अस्तित्व ही कस्बो व गांवों से मिटता जा रहा है।

कभी बड़े तालाब हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान में छोटे-छोटे तालाब रह गए हैं। जो सरकार ने तालाब विकास प्राधिकरण गठन करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन अभी तक अस्तित्व खो चुके तालाबों को नहीं तलाशा गया। तालाबों की फाइल कुछ दिनों तक खंगाली गई, लेकिन अब फिर से तालाबों का मामला ठंडे बस्ते में चला
गया है।

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