Thursday, September 23, 2021
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कम होती जा रही कोरोना टेस्टिंग: 1365 पॉजिटिव, 15 की मौत

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना का कहर जमकर बरस रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने एक सप्ताह से टेस्टिंग कम कर दी है। रविवार को जारी रिपोर्ट में 4656 टेस्टिंग में 1365 लोग संक्रमित निकले। वहीं, सरकारी आंकड़ों में छह लोगों की मौत हुई और गैर सरकारी आंकड़ों में 15 लोगो की मौत हुई। जनपद में अब तक कोरोना से 51737 लोग संक्रमित हो चुके हैं। वही कोरोना को मात देकर 732 लोग घर लौट चुके हैं। जबकि 1771 लोग अस्पतालों में भर्ती है।

सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि जनपद में 16238 एक्टिव केस है। जिनका इलाज अस्पतालों में चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना का कहर तेज होता जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 1365 संक्रमितों में 700 के करीब कस्बों और गांव में मिले हैं। मेडिकल परिसर में कोरोना का कहर बरकरार है और रविवार को भी सात लोग कोरोना की चपेट में आ गए।

रुड़की रोड की कालोनियों के अलावा गंगानगर, कंकरखेड़ा और जागृति विहार आदि जगहों पर संक्रमण बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि 1791 लोग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। जबकि 6020 लोग घर मे रहकर इलाज करा रहे हैं। कोरोना के बढ़ते आंकड़ों ने मौतों की संख्या में एकबारगी तेजी ला दी है। कोरोना की कम टेस्टिंग होने से भले ही संक्रमितों की संख्या में कमी आ रही है, लेकिन हकीकत में हालात और ही कुछ है।

रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति बंद

कोरोना के दौरान आॅक्सीजन कम होने से होने से परेशानी से निपटने के लिए लगने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति रोक दी गई है। ऐसा कुछ मरीजों में रिएक्शन होने के कारण किया गया है।

सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि रेमडेसिविर के पुराने इंजेक्शन के कारण कुछ मरीजों में रिएक्शन की शिकायत मिली थी। इस कारण उनके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। वैसे भी अब इंजेक्शन खत्म हो गए हैं और यह कब आएंगे इस बारे में कुछ कहना संभव नहीं है।

रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर शुरू से ही मारामारी मची हुई थी। कम सप्लाई के कारण इसे जम कर ब्लैक में बेचा गया। 1800 रुपये का इंजेक्शन 35 हजार रुपये तक में बिका। बाद में प्रशासन ने इसे अपने हाथों में लिया और डाक्टर के पर्चे और कोविड रिपोर्ट के साथ इंजेक्शन की व्यवस्था की गई। जब इससे भी व्यवस्था नहीं सुधरी तो सिटी मजिस्ट्रेट ने इसे अपने हाथों में ले लिया।

इंजेक्शन के लिए भीड़, मिली निराशा

रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिये सुबह से सिटी मजिस्ट्रेट आॅफिस के बाहर लाइन में लगे लोगों को निराशा हुई। जब उनको बताया गया कि इंजेक्शन खत्म हो गए। जब लोगों ने हंगामा किया तो पुलिस बुलाकर उनको भगा दिया गया। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के आफिस में व्यवस्था की गई है। सीएमओ आॅफिस की निगरानी में गहन जांच के बाद इंजेक्शन दिए जाते हैं।

रविवार सुबह 10 बजे से पहले इंजेक्शन लेने के लिए लोग पहुंच गए और इंतजार करने लगे। दोपहर एक बजे तक न सिटी मजिस्ट्रेट और न ही सीएमओ आॅफिस से कोई आया। जब लोग परेशान हो गए तो हंगामा करने लगे। 100 से अधिक लोग लाइन में लगे हुए थे। हंगामा की खबर लगते ही सिटी मजिस्ट्रेट एसके सिंह मौके पर आए और बोले इंजेक्शन खत्म हो गए हैं, जब आएंगे तो देखा जाएगा।

यह सुनकर लोगों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया। तभी वहां पुलिस बुला ली गई और पुलिस ने लोगों को हड़काकर भगा दिया। बाद में इन लोगों को बताया गया कि इंजेक्शन की आपूर्ति रोक दी गई है। निराश होकर लोग लौट गए। देवपुरी निवासी हरवीर सिंह ने बताया कि चार घंटे से इंजेक्शन के लिए इंतजार कर रहा था, कोई भी सही बात बोलने को तैयार नहीं था। सिटी मजिस्ट्रेट का स्टाफ भी खामोश था। किसी को भी परेशानी से मतलब नहीं है।

संक्रमित शवों के लिए आर्य समाज, गंगा मोटर कमेटी नि:शुल्क दे रहा सामग्री

सूरजकुंड श्मशान घाट पर रविवार को भी अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शवों का आंकड़ा एक बार फिर अर्द्धशतक छूता नजर आया। यही आंकड़े अब सामान्य हो गए हैं। किसी समय पर जो संख्या 15 से उपर नहीं जाती थीं, वही आंकड़ा अब 20 से नीचे कभी गिरता ही नहीं है। इससे ज्यादा सिर्फ कोविड संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार यहां पर रोजाना कर दिया जाता है। वहीं, अब शासन द्वारा संर्क्रमित शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए निशुल्क सुविधा के भी निर्देश दिए हैं।

सूरजकुंड श्मशान पर रविवार को कुल 50 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें 20 शव संक्रमित और 30 शव नॉन कोविड के रहे। यहां आंकड़ा रात को 8.45 बजे तक का दिया गया है। जी हां, वर्षों में ऐसा पहली बार ही देखने को मिल रहा है कि जब हिंदू मान्यता के विपरीत जाकर भी शवों का दाह संस्कार करना पड़ रहा है। शहर में स्थितियां इतनी विपरीत हो चुकी हैं कि हर व्यक्ति इन दिनों मजबूर है। 24 घंटे यहां पर चिताएं धधकती नजर आती हैं।

परिजनों को अपने शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए प्लेटफार्म तक नहीं मिल पा रहा हैं। हालांकि यहां पर पहले से ही 40 प्लेटफार्म मौजूद थे और इसके बाद नगर निगम द्वारा 35 नए प्लेटफार्म भी निर्मित किए गए हैं, लेकिन बावजूद इसके समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

संक्रमित शवों का कराया जा रहा नि:शुल्क अंतिम संस्कार

सूरजकुंड श्मशान पर आने वाले संक्रमित शवों का निशुल्क अंतिम संस्कार किया जाने लगा है। जिसके लिए आर्य समाज और गंगा मोटर कमेटी सहयोग कर रही हैं। संक्रमित शवो के परिजनों को सभी सामग्री की व्यवस्था निशुल्क दी जा रही है। लेकिन लकड़ियां उनको अपने खर्च से ही खरीदनी पड़ती हैं। हालांकि लकड़ी की टाल के लोगों द्वारा इसी का गलत फायदा भी उठाया जा रहा है। सोमवार को आए 20 संक्रमित शवों का निशुल्क अंतिम संस्कार यहां पर कराया गया।

शवदाह गृहों में अव्यवस्थाओं की लखनऊ की शिकायत

सूरजकुंड शवदाहगृहों पर फैली अव्यवस्थाओं की शिकायत लखनऊ तक की गई है। दरअसल, श्मशान पर इन दिनों अधिक संख्या में शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है। ऐसे में आबाद के मध्य स्थित होने से यहां के निवासियों को भी इससे परेशानियां होने लगी हैं। हालांकि इसके चारों ओर बांउड्री की गई है, लेकिन इसके बावजूद लोगों ने परेशानी होने की शिकायत की है।

यह मामल लखनऊ कैबिनेट तक जाने के बाद नगर विकास मंत्री आशुतोश टंडन ने मुख्य सचिव और नगरायुक्त से रिपोर्ट तलब की। जिसके बाद जल्द ही यहां पर टिन शेड लगवाने और बाउंड्री को उंचा कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। जिसके बाद दो दिन में ही कार्य शुरू होने का आश्वासन नगरायुक्त द्वारा दिया गया।

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