- कोरोना की मद में राहत कोष से मिलने वाली मदद पर सरकार ने लगाई रोक
- मरीजों के आॅपरेशन में एंटीजन से चला रहे काम
- कोरोना प्रोटोकॉल में सभी प्रकार की सर्जरी में आरटीपीसीआर की जांच अनिवार्य रूप से जरूरी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल की हालत बेहद खस्ता है। कोरोना महामारी के इलाज के सबसे बडे सेंटर होने के बाद भी सरकार की ओर से इसकी मदद से हाथ खींच लिया गया है। माली हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोरोना का पता लगाने के लिए की जाने वाली आरटीपीसीआर जांच में प्रयुक्त होने वाले बॉयल तक नहीं खरीदे जा रहे हैं।
जिन मरीजों के सर्जिकल आॅपरेशन किए जा रहे हैं। उनमें से किसी की भी आरटीपीसीआर जांच नहीं कराई जा रही है। इससे मेडिकल के उन क्लीनिकल स्टॉफ के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है जो ऐसे मरीजों के आॅपरेशन कर रहे हैं। आरटीपीसीआर जांच न होने की वजह से स्टाफ भी डरा हुआ है।
मेडिकल को कोविड महामारी से लड़ने के नाम पर राहत कोष से अब तक अच्छी खासी राशि मिलती रही है। सरकार की ओर से रिलीज की जाने वाली इस रकम से ही मेडिकल प्रशासन अब तक कोरोना संक्रमित मरीजों का सफल इलाज भी करता रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से राहत कोष से दी जाने वाली राशि के मामले में सरकार ने हाथ खडेÞ कर दिए हैं।
इस मद में कोई रकम नहीं मिल रही है। जिसके चलते कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले कुछ क्लीनिकली उपकरण नहीं खरीदे जा सके हैं। राहत कोष से मिलने वाली राशि न मिलने की वजह से मेडिकल प्रशासन ने पिछले करीब 10 दिन पूर्व मेडिकल में सर्जिकल आॅपरेशन के लिए भर्ती सभी मरीजों की आरटी पीसीआर जांच को रोक दिया है।
दरअसल, ऐसे मरीज जिनकी आरटी पीसीआर जांच की जानी होती है उसमें वॉयल जिसे शॉर्ट में बीडीएम भी कहा जाता है नहीं खरीदी जा सकी हैं। आरटीपीसीआर की जांच में इस बीडीएम नामक उपकरण का होना अनिवार्य है। इसके बगैर आरटी पीसीआर जांच संभव नहीं।
एंटीजन से चला रहे काम
वहीं, दूसरी ओर पता चला है कि सर्जिकल आॅपरेशन के लिए बड़ी संख्या में भर्ती मरीजों का दबाव कम करने के लिए मेडिकल प्रशासन आरटी पीसीआर के बजाए एंटीजन जांच कराकर काम चला रहा है। पिछले आठ दिनों के दौरान ऐसे मरीज जिनके सर्जिकल आपरेशन से पहले आरटी पीसीआर किया जाना जरूरी था, उनकी एंटीजन जांच कराकर आॅपरेशन कर दिए गए हैं।
स्टाफ के लिए जानलेवा
सर्जिकल आॅपरेशन से पहले किसी भी मरीज की आरटीपीसीआर जांच कराया जाना कोविड-19 प्रोटोकॉल में अनिवार्य की गई है। दरअसल ऐसा उन हेल्थ केयर वर्करों की सुरक्षा के मद्देनजर तय किया गया है जो कोरोना संक्रमण के खिलाफ फ्रंटलाइन वर्कर माने जाते हैं।
पिछले दिनों कोरोना के केसों के एकाएक बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए सबसे ज्यादा जोर आरटीपीसीआर की जांचों पर ही दिया जा रहा है, लेकिन बगैर आरटीपीसीआर के सर्जिकल आपरेशन कराया जाना डाक्टरों व पैरामेडिकल स्टॉफ के लिए घातक होने की बात से मेडिकल प्रशासन भी इनकार नहीं कर रहा है।
शासन से मांगी मदद
कोरोना महामारी के खिलाफ डटे मेडिकल प्रशासन ने राहत कोष से मिलने वाली राशि रिलीज किए जाने के लिए शासन को पत्र लिखा है। मेडिकल प्राचार्य ने बताया कि इस संबंध में मंडलायुक्त व शासन के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भी अवगत कराया जा चुका है। हालांकि बीडीएम की कुछ खरीद अपनी ओर से खरीदने का प्रयास मेडिकल प्रशासन कर रहा है। हालांकि अभी तक स्थिति संभलती नजर नहीं आ रही है।
ये कहना है प्राचार्य का
मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि पिछले करीब 10 दिन से आरटीपीसीआर जांच नहीं हो पा रही है। कोरोना महामारी में राहत कोष से जो राशि मिलती थी वह अब नहीं मिल रही है। इस कारण से ऐसे मरीज जिनकी सर्जरी की जानी है उनकी आरटीपीसीआर जांच नहीं हो पा रही है।
कोरोना से दो की मौत छह नए केस
कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे फिर से सिर उठाने लगा है। बुधवार को संक्रमण के चलते दो संक्रमितों की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि छह नए केस भी मिले हैं। बुधवार को यह जानकारी सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने कोरोना अपडेट जारी करते हुए दी है।
उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमित सरधना के आदर्श नगर निवासी 72 वर्षीया महिला व मवाना के विजय लोक निवासी 72 वर्षीया महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई। इनके अलावा जिन इलाकों में संक्रमण के केस पाए गए हैं उनमें रजपुरा, डिफेंस कालोनी, माधवपुरम व सेना की यूनिट शामिल हैं। 4665 सैंपल टेस्ट के लिए मेडिकल की माइक्रोबॉयलोजी लैब भेजे गए थे।
इनमें से छह संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि अभी 616 सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकी है। जनपद में अब तक कुल 898980 सैंपल टेस्ट के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें से 21371 संक्रमित पाए गए हैं। जबकि मरने वालों का आंकड़ा 409 हो गया है।

