Saturday, December 4, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutएमडीए में गोपनीय दस्तावेजों से बाहरी लोग करते हैं छेड़छाड़

एमडीए में गोपनीय दस्तावेजों से बाहरी लोग करते हैं छेड़छाड़

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  • क्या लखनऊ की तर्ज पर मेरठ में भी की जाएगी कार्रवाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) में गोपनीय दस्तावेजों से बाहरी लोग छेड़छाड़ करते हैं। इसकी शिकायत पहले भी की गई थी। एमडीए के क्लर्कों ने भी अपने साथ कुछ बाहरी लोगों को बतौर सहायक के रूप में रख रखा है, जो दस्तावेजों को भी लीक कर देते हैं। बैनामे तक फर्जी करा दिये गए थे, जिसमें बाहरी लोग भी संलिप्त थे, मगर ये बाहरी कौन थे? इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

लखनऊ में शनिवार को प्राधिकरण आॅफिस में दस्तावेजों में छेड़छाड़ के मामले को लेकर छापेमारी चली थी, जिसमें दो क्लर्कों को पुलिस पकड़कर ले गई थी। लखनऊ में यह कार्रवाई डीएम की मौजूदगी में चली थी, लेकिन लखनऊ की घटना के बाद भी मेरठ विकास प्राधिकरण में सबक नहीं लिया जा रहा है। गोपनीय दस्तावेज लीक करना और छेड़छाड़ करना यहां कोई बड़ी बात नहीं है। पिछले दिनों प्राधिकरण में 17 प्लाटों के फर्जी बैनामे सामने आये थे।

बैनामे एमडीए ने नहीं किये, फिर भी कुछ लोग बैनामा लेकर घूम रहे थे। कौन थे, जो फर्जी बैनामा लेकर घूम रहे थे। इसकी जांच पड़ताल तब चली तो सामने आया कि एमडीए की एक महिला क्लर्क समेत इसमें तीन कर्मचारी लिप्त थे। महिला कर्मचारी को एमडीए ने बर्खास्त कर दिया था, मगर बाहरी लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दरअसल, क्लर्कों का इसमें बड़ा खेल चलता है, जिसमें बाहरी लोग भी संलिप्त होते हैं।

प्लाटों के फर्जी बैनामे हो या फिर फाइल गायब करने के मामले। ये सभी एमडीए के क्लर्क बाहरी लोगों के साथ मिलकर फाइल तक गायब करा देते हैं। दस से पन्द्रह फाइले भी लंबे समय से एमडीए से गायब चल रही है,जिनका कुछ भी पता नहीं चला। इन फाइलों को क्लर्कों ने बाहरी लोगों के माध्यम से ही गायब करा दिया, जिसके बाद दस्तावेज गायब चल रहे हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जब फाइलों का आदान-प्रदान एक दूसरे क्लर्क आपस में लिखित में करते है तो फिर फाइल गायब कैसे हो जाती हैं?

इसके लिए जिम्मेदार क्लर्कों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अब नया तरीका एमडीए के कर्मचारियों ने अख्तिायर किया है कि जो भी फाइल गायब होती है, उसको रिटायर्ड हो चुके कर्मचारी पर पूरा मामला डाल दिया जाता है। क्योंकि जो कर्मचारी रिटायर्ड हो गया, फिर उसकी जवाबदेही नहीं बनती।

एमडीए के अधिकारी रिटायर्ड कर्मचारी पर दबाव भी नहीं बना पाते हैं। इस तरह से एमडीए में बाहरी लोगों का सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने बंद नहीं हो पा रहा है। अर्जन अनुभाग में भी दस्तावेज गायब होते रहे हैं। मानचित्र भी बड़ी तादाद में फाइलों से गायब है। अब बड़ा सवाल यह है कि लखनऊ की तरह से एमडीए में भी दस्तावेज गायब करने वाले कर्मचारियों पर क्या शिकंजा कसा जाएगा?

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