- अनियंत्रित कंस्ट्रक्शन पर लगाई जाए लगाम, सड़क को धूल मुक्त करने के हों प्रयास
- गंगानगर की हवा में घुल रहा जहर, एक्यूआई 310 पर
मनोज राठी |
गंगानगर: कसेरूखेड़ा नाले पर खुदाई के बाद सड़क पर डाली गई मिट्टी लोगों के लिए मुसीबत पैदा कर रही है। अब एक नयी मुसीबत पीएसी की वायु प्रदूषण का ग्राफ अचानक बढ़ गया है। नगर निगम के ठेकेदार खुद कोषाकार से टेंडर मिलते ही जोड़ लेते हैं। जिसके चलते खूब वायु प्रदूषण किया जाता है, लेकिन इन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं है। लोग घरों में बीमार पड़ रहे हैं।
वायु प्रदूषण के चलते प्रदूषण विभाग के अधिकारियों का भी इन ठेकेदारों की मनमानी पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। वायु प्रदूषण के हालात विकट है। मेरठ सर्वाधिक वायु प्रदूषण फैलाने वाले शहरों में टॉपटेन में शामिल है। जिस पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण ही समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। अनियंत्रित कंस्ट्रक्शन प्रदूषण बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं। डॉक्टर्स के अनुसार यही हाल रहा तो मेरठ में सांस लेना भी दूभर होगा और सांस कैंसर की बीमारियों से बचने के लिए सभी को मास्क लगाकर चलना पड़ेगा।
कसेरूखेड़ा नाले की दीवार के निर्माण और सड़कों से उड़ती धूल वायु प्रदूषण की बड़ी वजह मानी जाती है। जगह-जगह हो रही खुदाई और सड़कों पर गड्ढे धूल का बड़ा कारण है। जगह-जगह सड़कों में गड्ढे और उनसे उड़ती धूल वायु प्रदूषण की बड़ी वजह बन रहे हैं। नाला निर्माण के साथ ही धूल को नियंत्रित नहीं किया जा रहा।
सड़कों के किनारे कच्चे हैं, वाहन गुजरने पर धूल का गुबार उड़ता है, जो लोगों के फेफड़ों में पहुंच रहा है। नगर निगम, पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग के पास सड़कों की सफाई को लेकर कोई ठोस योजना नहीं है, जिससे धूल को रोका जा सके, जबकि ठेकेदार सड़क पर फैली मिट्टी पर पानी का छिड़काव कर अपनी लापरवाही को दबा रहा है।
बढ़ा प्रदूषण का स्तर, बना जानलेवा
जिले में तेजी से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। खासकर शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ा है। वायु मानवीय क्रियाकलाप के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से भी प्रदूषित हो रहा है। खुले में निर्माण कार्य के चलते इसके लिए सबसे अधिक जिम्मेवार है। वातावरण में धूल उड़ाकर भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रहा है। धूल के कारण लोगों को सड़कों पर चलने में परेशानी हो रही है। सड़क के किनारे धूल की मोटी परत जमी हुई है। वाहनों के गुजरने से हमेशा धूल उड़ती रहती हैं।
निर्माण सामग्री से बढ़ता है वायु प्रदूषण का स्तर
क्षेत्र में कसेरूखेड़ा नाला का निर्माण कई माह से चल रहा है। इस दौरान भी कई मानकों का पालन नहीं होता। खुले में बालू, मिट्टी, गिट्टी और खुदाई होने के कारण सड़कों पर लगातार धूल उड़ती रहती है। हर जगह सड़कों पर धूल ही धूल है। इसके रोकथाम और इसमें कमी के लिए कहीं कोई प्रयास नहीं दिखता।
लापरवाही से हो रहा नाले का निर्माण
क्षेत्र में कसेरूखेड़ा नाले की दीवार का निर्माण बिना ढके ही हो रहा है। बिना ढके नाले की दीवार के निर्माण के कारण हवा के साथ धूल कण मिलकर लगातार प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। निर्माण के चलते वहां स्थानीय लोगों का गुजरना मुश्किल है। साथ ही यहां रहने वाले लोगों की हालत भी बेहद खराब है।
नियमों का नहीं हो रहा पालन
कसेरूखेड़ा नाले की दीवार के निर्माण के लिए सड़कों पर बालू, मिट्टी का रखरखाव हो या खुदाई के बाद बाहर निकल रहे मिट्टी हर तरफ धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। खाली जमीन में मिट्टी भराई और बाहर निकालने के दौरान सड़कों पर हर तरफ मिट्टी गिरायी जा रही है। इसके कारण गर्मी में धूल की समस्या है। सड़क पर मिट्टी को इस तरह फैलाया गया है कि सड़क से गुजरना मुश्किल है। ठेकेदार कहीं-कहीं पानी का छिड़काव कराता भी है, लेकिन पूरे दिन यात्री परेशान रहते हैं।
क्या है वायु में ?
वायु में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत आक्सीजन, 0.03 प्रतिशत कार्बन डाइक्साइड के अलावा हाइड्रोजन, हीलियम, आर्गन, निआॅन, क्रिप्टन, जेनान, ओजोन तथा जल वाष्प की मात्र संयुक्त रूप से 0.97 प्रतिशत है। इसके जरा से असंतुलित होने से मानव स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। वायु में कार्बन डाइक्साइड की मात्रा बढ़ने से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बना हुआ है।
मानव शरीर पर प्रभाव
वायु प्रदूषण से मानव का श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। दमा, ब्रांकाइटिस, सिरदर्द, फेफड़ों का कैंसर, खांसी, आंखों में जलन, गले का दर्द, निमोनिया, हृदय रोग, उल्टी, जुकाम जैसी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।

