- बड़ा खुलासा: मनसबिया में बिना रजिस्ट्रेशन के लिए किया जा रहा था संचालन
- एडीएम सिटी के आदेश पर जांच के लिए पहुंची दो सदस्यीय टीम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लूट का इससे बड़ा सबूत क्या मिलेगा कि स्कूल हो नहीं और उसके नाम पर शहर भर में पोस्टर और बैनर लगाकर वसूली का धंधा शुरू कर दिया जाये। फिर जब फर्जीवाड़ा खुली और प्रशासन की टीम जांच के लिए पहुंचे तो उन फर्जीवाड़े के स्कूल के बैनर और पोस्टर हटा दिये जायें। टीम के मांगने के बाद भी उसको न तो कागजात दिखाये गये। साथ ही इस बात से साफ इंकार कर दिया गया कि वह कोई पब्लिक स्कूल संचालित कर रहे हैं। टीम अपनी जांच रिपोर्ट सोमवार को एडीएम सिटी को सौंपेगी।
लूट का पर्याय बन चुके शहर के कदीमी वक्फ में शुमार मनसबिया की जायदाद को कोई बाहर वाला नहीं, बल्कि खुद इसी के वह जिम्मेदार ठिकाने लगाने में लगे हुए हैं। पहले मनसबिया में बच्चों के क्रीड़ा स्थल और कब्रिस्तान को कब्जाकर यहां अवैध रूप से पार्किंग का संचालन कर दिया गया। फिर ज्यादा मुनाफे के लिए इस कदीमी कब्रिस्तान की कब्रों को भी बिस्मार कर यहां धड़ल्ले से गाड़ियों की पार्किंग भी करा दी गई। इस कदीमी वक्फ संपत्ति में कई शिकमी किरायेदारों को भी काबिज करा दिया गया
तथा उनको मनमर्जी से कंस्ट्रक्शन कराने की खुली छूट दे दी गई। जबकि मनसबिया वक्फ की जायदाद में किसी भी तरह के रद्दोबदल पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगा रखा है। सहायक सर्वे कमिश्नर (वक्फ) मौहम्मद रूहेल आजम ने इस संबंध में बाकायदा शासनादेश जारी कर रखा है। जिसमें साफ हिदायत दी गई है कि संबंधित वक्फ बोर्ड की अनुमति के कोई भी नयी किरायेदारी में रद्दोबदल न की जाये और न ही कोई निर्माण मरम्मत कार्य किया जाये।
मनसबिया के नाम से खोला इंग्लिश स्कूल
इसके साथ ही साथ अब मनसबिया के नाम पर शहर भर में खुली लूट का और धंधा भी शुरू कर दिया गया। इसमें शहर भर में यह प्रचारित किया गया कि मनसबिया में एमए पब्लिक स्कूल खुल गया है। पूरे शहर भर में इससे संबंधित पोस्टर व बैनर लगाये गये। इसमें लिखा गया कि 29 अप्रैल 2024 से स्कूल में बच्चों का रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इंग्लिश मीडियम के इस स्कूल के लिए यह प्रचारित किया गया कि नर्सरी से कक्षा पांचवीं तक के लिए प्रवेश लिये जा सकते हैं। इसके लिए 500 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क भी निर्धारित किया गया। शहर की भोली भाली जनता को इस भ्रमजाल में लिया गया कि सस्ती फीस के साथ आपके शहर में पहली बार इंग्लिश मीडियम स्कूल खोला जा रहा है। अगर आप अपने बच्चों के लिए कम खर्च पर गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा उपलब्ध कराना चाहते हैं तो आपके लिए हमारा स्कूल एक बेहतर विकल्प है।
जनता को भी लुभावने आश्वासन का झांसा
जनता को यह कहकर भी गुमराह किया गया कि परिवहन शुल्क का भुगतान स्कूल और घर के बीच की दूरी के आधार पर अलग से किया जायेगा। प्रवेश के लिए मनसबिया में सुबह साढ़े 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक सम्पर्क करने का विकल्प दिया गया। साथ ही दो फोन नंबर भी प्रसारित किये गये। मुतवल्ली ने इसमें बड़ा खेल यह किया कि अंग्रेजी मीडियम के इस स्कूल के संचालन की पूरी जिम्मेदारी तो खुद ली। लेकिन उन्हें इल्म था कि यह फर्जीवाड़ा है। इसलिए अपना नाम और अपना फोन नंबर इससे दूर ही रखा।

दो सदस्यीय जांच टीम मौके पर पहुंची
कहावत है कि झूठ के पैर नहीं होते हैं। ऐसा ही कुछ फर्जीवाड़े के इस खेल के साथ भी हुआ। शहर में जब मनसबिया में अंग्रेजी मीडियम स्कूल के नाम पर वसूली का धंधा शुरू हुआ। तो इसकी शिकायत भी की गई। एडीएम सिटी ब्रजेश सिंह के आदेश पर शनिवार को दो सदस्यीय जांच टीम मनसबिया में जांच के लिए पहुंची। जांच टीम को देखते ही मनसबिया में फर्जीवाड़ा करने वालो में हड़कंप मच गया।
टीम को देखते ही मनसबिया के अंदर व बाहर लगाये गये तमाम पोस्टर, बैनर व फ्लैक्स फौरन हटा दिये गये। टीम को बिठाकर उनकी खुशामद में मनसबिया का पूरा स्टाफ लग गया, लेकिन टीम को स्पष्ट निर्देश थे कि पब्लिक स्कूल के कागजात तथा रजिस्ट्रेशन संबंधी अन्य पत्रावलियों का गहनता से अवलोकन करें। टीम को मांगने के बाद भी कोई कागजात नहीं दिखाये गये। लगभग एक घंटे जांच करने के बाद टीम वापिस लौट गई। यह टीम सोमवार को एडीएम सिटी को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
योगी की पहल पर आधुनिक बना रहे मदरसा
अपना फर्जीवाड़ा खुलने के बाद अब मनसबिया प्रशासन बचाव की मुद्रा में आ गया है। मनसबिया के मुतवल्ली दानिश जाफरी का कहना है कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड से मनसबिया के मदरसे को 1866 से मान्यता मिली हुई है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी के मदरसों को मुख्य धारा से जोड़ने के निर्देश दिये हैं। उसी पहल पर अमल करते हुए हमने उर्दू और अरबी के साथ अपने मदरसे को मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया था। उन्होंने इस बात से साफ इंकार किया कि कहीं पोस्टर या फ्लैक्स और बैनर लगाये गये हैं।

