Wednesday, May 12, 2021
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योग के जरिये कोरोना से पाएं पार: पदमश्री भारत भूषण

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वरिष्ठ संवाददाता |

सहारनपुर: डर किसी भी समस्या का इलाज नहीं है बल्कि डर तो समस्या को बढ़ाने और नई समस्याएं पैदा करने का साधन है। डर से हृदय, जिगर और फेफड़े यहां तक कि रक्त वाहिनियां भी सिकुड़ जाती हैं और डर से सहमा हुआ व्यक्ति जान तक गंवा बैठता है।

ये डर ही हमारे शरीर में आॅक्सीजन और जीवनी शक्ति का स्तर कम कर देता है। वायुमंडल में भरपूर आॅक्सीजन होते हुए भी हम आॅक्सीजन के लिए वेंटिलेटर पर पहुंच जाते हैं। योग ही वो साधन है जो हमे निर्भय बनाता है। इसलिए परिस्थिति कोई भी हो बस जरा सा धैर्य व विवेक से काम लें। योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण कहते हैं कि डर और चिंता से कभी किसी समस्या का हल नहीं मिला है।

इससे छुटकारा पाने के लिए ही भारतीय ऋषियों ने इंसान को योग का अस्त्र दिया है। योग गुरु का कहना है कोरोना से लड़ने और निश्चित विजय पाने के लिए कोरोना के साथ भी और कोरोना के बाद भी ये भारतयोग उपाय आपका साथ देंगे, जिन्हें करने से रोगी स्वस्थ हो जाएगा और जो स्वस्थ व्यक्ति इस अभ्यास को करेगा तो निरोग बना रहेगा। भेदभाव से परे रह कर ये योग उपाय भारत ने हर इंसान के लिए दिया है:

उपाय के रूप में उन्होंने ध्यान के अभ्यास से शांत निश्चित व निर्भय रहने के लिए सीधी कमर रखते हुए तनाव मुक्त कर बैठने और आंखें बंद करके भूत भविष्य की चिंताओं से मुंह मोड़ कर कुछ देर सिर्फ अपने वर्तमान में टिके रहकर नासाग्र पर आते जाते सांस से जुड़े रह कर सकारात्मक भाव तरंग और जीवनी शक्ति बढ़ाने का रास्ता सुझाया।

इसी अवस्था में गहरा सांस भर कर तेरह बार इतना लंबा ॐ बोलने का सुझाव दिया कि पेट भीतर तक सिकुड़ता चला जाए और अगली बार ओम बोलने के लिए आपको और भी अधिक गहरा श्वास भरना पड़े। उनका कहना है कि अधिकतम आॅक्सीजन पूर्ति से जीवनी शक्ति और सकारात्मक भाव तरंगे विकसित करने के लिए प्रतिदिन सुबह शाम पांच पांच बार शंख अवश्य बजाएं।

मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योगाश्रम की स्थापना करने वाले देश के वरिष्ठतम योगगुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण का कहना है कि रोग की गंभीरता और रोगी की बढ़ती कमजोरी को ध्यान में रखकर बिना थके की जाने वाले इस योगाभ्यास के साथ मास्क पहनना, हाथों को स्वच्छ रखना व उचित दूरी बना कर रखना एक बड़ा रक्षा कवच है।

इसके साथ दिन में दो बार पांच-पांच मिनट गर्म पानी की भाप लेना, आयुर्वेदिक काढ़ा का सेवन, जल व सूत्रनेति तथा विरेचन क्रिया और कपाल भाती के अभ्यास के साथ घर में विशेषकर कपूर, गुग्गल, लौंग अजवाइन से यज्ञ करना या कपूर लवंग अजवाइन को रूमाल में रख कर सूंघना एक बेहतर उपाय है।

उन्होंने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति को कोरोना रोधी योग प्रोटोकॉल का पूरा अभ्यास करना चाहिए जो उन्होंने सहारनपुर के ही वरिष्ठ चिकित्सकों, आयुर्वेदज्ञों, होम्योपथ व आहार विशेषज्ञों के सहयोग से बनाकर कोरिया की पहली लहर के समय ही देश व दुनिया को दे दिया गया था और अच्छे रक्षा कवच के रूप में आज भी प्रभावी है।

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