Wednesday, October 27, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutसात माह बाद एक भी हॉस्पिटल तक नहीं

सात माह बाद एक भी हॉस्पिटल तक नहीं

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  • पड़ोसी राज्य में तीसरी कोरोना वेव के चलते लॉकडाउन की आहट ने उड़ाई स्वास्थ्य विभाग की नींद
  • स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को बतौर नाकामी के रूप में देख रहे हैं निजी चिकित्सक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना संक्रमण का ग्राफ ऊंचा होने की आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग ने इमरजेंसी हालात से निपटने की भले ही तैयारियां शुरू कर दी हों, लेकिन जहां तक निजी चिकित्सकों के सवाल है वो इसको स्वास्थ्य विभाग की विफलता मानकर चल रहे हैं। उनका साफ कहना है कि सात माह बीतने को आए शासन प्रशासन के अफसर अभी तक एक संपूर्ण कोविड-19 हॉस्पिटल तक नहीं तैयार कर सके। कुछ का यहां तक कहना है कि जहां तक निजी चिकित्सकों व नर्सिंग होम संचालकों से जानकारी मांगे जाने का सवाल है तो यह सिर्फ खानापूर्ति भर है। कोई भले ही कितनी इमरजेंसी हो, लेकिन सामान्य मरीजों के साथ किसी भी दशा में कोविड-19 संक्रमितों को नहीं रखा जा सकता।

पड़ोसी राज्य दिल्ली में जिस प्रकार से कोरोना संक्रमण के केस आ रहे हैं। उसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी वेस्ट यूपी के लिए खतरे की बात को स्वीकार की है। मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान का कहना है दिल्ली में संक्रमितों की बढ़ती हुई संख्या की अनदेखी नहीं की जा सकती। उसके चलते ही यहां तैयारियां की जा रही हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राजकुमार ने आईएमए व नर्सिंग होम एसोसिएशन को चिट्ठी भेजकर प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मांगी है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग किसी भी इमरजेंसी हालात से निपटने की तैयारी में जुटा है। शहर में कितने डाक्टर हैं तथा नर्सिंग होमों में बेड, वेंटिलेटर, आॅक्सीजन व स्टाफ की उपलब्धता की क्या स्थिति है।

कार्रवाई से नाराजगी

कोरोना संक्रमितों के इलाज के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राइवेट चिकित्सकों पर कार्रवाई के नाम पर उनकी प्रैक्टिस पर रोक लगाए जाने के बाद से जबरदस्त नाराजगी है। आईएमए इसको लेकर पहले ही नाराजगी जता चुका है। जबकि आईएमए के पूर्व सचिव डा. अनिल नौसरान का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। सात माह होने को आए अभी तक मेरठ में एक संपूर्ण कोविड-19 हॉस्पिटल तक तैयार नहीं किया जा सका है। उनका साफ कहना है कि अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसर केवल निजी चिकित्सकों को टारगेट बना रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।

ये कहना है मेडिकल प्राचार्य का

मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि मेडिकल में कोरोना संक्रमितों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं। मेडिकल में बेहतर इलाज का अंदाजा रिकवरी रेट से ही लगाया जा सकता है। जहां तक बीमारी की बात है तो लोगों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है।

ये कहना है सर्विलांस अधिकारी का

मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान का कहना है कि दिल्ली में संक्रमण के तेजी से सामने आ रहे केसों गंभीर हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग भी तैयारियों में जुट गया है। आने वाले दिनों में संक्रमण का ग्राफ बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ये कहना है निजी चिकित्सकों का

आईएमए के पूर्व सचिव व चिकित्सक डा. अनिल नौसरान का कहना है कि कोरोना से निपटने के लिए जो कुछ किया जाना चाहिए। वह न करके अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए निजी चिकित्सकों को टारगेट किया जा रहा है। यदि निजी चिकित्सकों ने हाथ खींच लिया तो हालात और ज्यादा बेकाबू हो जाएगे।

जिला अस्पताल का भी पुरसा हाल नहीं

कोरोना वैश्विक महामारी के चलते जिला अस्पताल भी पुरसा हाल नहीं है। यहां हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोविड-19 सैंपलों की जांच से आगे अस्पताल नहीं बढ़ पाया। जो क्वारंटाइन सेंटर यहां चल रहा है, उसको लेकर भी आए दिन शिकायतें मिलती हैं। न तो ढंग के टायलेट हैं और न ही क्वारंटाइन में रहने वालों के लिए कोई समुचित इंतजाम। कोरोना संक्रमण से संबंधित ही नहीं बल्कि अन्य बीमारियों के इलाज को लेकर भी इन दिनों बहुत अच्छी स्थिति नजर नहीं आती। दरअसल कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद लंबे समय के लिए यहां की ओपीडी को बंद करा दिया गया था। कुछ समय पहले ही ओपीडी शुरू की गयी है, लेकिन अब भी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी क्षमता से नहीं दी जा रही हैं। कोरोना संक्रमण की पाबंदियों के नाम पर तमाम रोकटोक जारी हैं।

मेडिकल में वेंटिलेटर टेक्निशियन तक नहीं

कोरोना वैश्विक महामारी में मेडिकल की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेडिकल में वेंटिलेटरों की देखरेख व उनको आॅपरेट करने के लिए स्थायी टेक्निशियन तक नहीं है। हालांकि वेंटिलेटरों की संख्या जरूर बढ़ी है, लेकिन ये वेंटिलेटर केवल कोरोना आइसोलेशन वार्ड के लिए ही हैं। पिछले दिनों मेडिकल इमरजेंसी में आॅक्सीजन का मास्क तक न होने की वजह से प्रहलाद नगर निवासी विजयपुरी नाम के शख्स ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया था। ऐसी घटनाएं आए दिन सुनने में आती हैं। इस प्रकार की घटनाओं के चलते आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मेडिकल में इन दिनों कैसे हालात बने हैं। इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड में सीनियर खासतौर से एचओडी तक आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी तक से कन्नी काटते हैं।

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