जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को 76 वर्ष के हो गए। प्रधानमंत्री के तौर पर करीब 12 वर्षों के कार्यकाल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। जनधन खातों के विस्तार से लेकर स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी और तेज आर्थिक वृद्धि तक, सरकार की आर्थिक नीतियों के कई पहलू चर्चा में रहे हैं।
जनधन योजना से करोड़ों लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़े
प्रधानमंत्री जनधन योजना को वित्तीय समावेशन की दिशा में सरकार की प्रमुख पहलों में गिना जाता है। योजना के तहत 2 सितंबर 2026 तक 59.21 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में कुल 3.17 लाख करोड़ रुपये जमा हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, इनमें 32.98 करोड़ खातों की मालिक महिलाएं हैं, जबकि 46.03 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच देश के उन वर्गों तक बढ़ाने में मदद मिली है, जो पहले औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से अपेक्षाकृत दूर थे।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में बड़ा विस्तार
भारत में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी पिछले एक दशक में कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अगस्त 2026 तक DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2.47 लाख से अधिक हो गई है। वर्ष 2016 में यह संख्या महज 502 थी। यह आंकड़ा भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।
पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही वास्तविक GDP वृद्धि
आर्थिक मोर्चे पर भी भारत की विकास दर मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही।
इस वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर की भूमिका अहम रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर है।
विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो अब तक का उच्चतम स्तर बताया गया है।
विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया में चौथे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें लगातार 10 सप्ताह से बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इस अवधि में करीब 120 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है।
आर्थिक मोर्चे पर बदली तस्वीर
जनधन खातों के जरिए वित्तीय समावेशन, स्टार्टअप की बढ़ती संख्या, तेज GDP वृद्धि और रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार जैसे आंकड़े पिछले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में आए बदलावों की तस्वीर पेश करते हैं। हालांकि, इन उपलब्धियों के साथ रोजगार, आय असमानता, महंगाई और व्यापक आर्थिक अवसरों जैसे मुद्दे भी आर्थिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।

