जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भगवान विश्वकर्मा से संबंधित एक श्लोक साझा करते हुए देशभर के शिल्पकारों, कारीगरों और हुनरमंद लोगों को विशेष रूप से बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भगवान विश्वकर्मा जयंती का यह अवसर निर्माण और सृजन के कार्य में जुटे लोगों के योगदान को सम्मान देने का भी अवसर है। उन्होंने शिल्पकारों और हुनरमंद साथियों के कौशल एवं मेहनत की सराहना की।
‘आत्मनिर्भर भारत के संकल्प में कौशल और परिश्रम महत्वपूर्ण’
पीएम मोदी ने कहा कि शिल्पकारों और हुनरमंद लोगों का कौशल एवं परिश्रम विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र के नवनिर्माण की दिशा में योगदान देने वाले लोगों के प्रयासों को हरसंभव प्रोत्साहन देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
पीएम मोदी ने साझा किया विश्वकर्मा अष्टकम् का श्लोक
प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश के साथ विश्वकर्मा अष्टकम्/विश्वकर्मा स्तोत्रम् का एक श्लोक भी साझा किया।
“अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः।
लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥”
इस श्लोक में भगवान विश्वकर्मा को अनादि, अप्रमेय और अरूप बताया गया है। इसमें भगवान विश्वकर्मा को संपूर्ण संसार के स्वरूप तथा जगत के स्वामी के रूप में नमन किया गया है।
क्या है श्लोक का भावार्थ?
श्लोक के भावार्थ के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा की न कोई शुरुआत है और न ही उन्हें पूरी तरह मापा या जाना जा सकता है। वे निराकार हैं और जय-पराजय से परे हैं। संपूर्ण संसार को उनका स्वरूप माना गया है और उन्हें जगत का स्वामी एवं निर्माता बताया गया है।
विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर यह संदेश देश के निर्माण, शिल्प और तकनीकी कौशल से जुड़े कारीगरों तथा कामगारों के योगदान को रेखांकित करता है। यह दिन विशेष रूप से निर्माण, हस्तशिल्प और विभिन्न तकनीकी एवं औद्योगिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

