Friday, April 24, 2026
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अनिल चौधरी समेत कई कॉलोनियों पर एमडीए ने चलाया बुलडोजर

  • श्रीराम इंस्टीट्यूट में स्थित है यह अवैध कालोनी, करीब 5000 वर्ग मीटर में फैली

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण ने शुक्रवार को अनिल चौधरी की श्रीराम इंस्टीट्यूट में स्थित कॉलोनी पर बुलडोजर चला दिया। यह कॉलोनी करीब 5000 वर्ग मीटर में फैली हुई थी। हालांकि अनिल चौधरी के पार्टनर हरेंद्र सिंह को मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से बार-बार नोटिस भी भेजे गए, लेकिन उसके बावजूद तथाकथित बिल्डर ने अवैध निर्माण करना जारी रखा।

शुक्रवार को मेरठ विकास प्राधिकरण इंजीनियरों की टीम दल बल के साथ एनएच-58 पर स्थित श्रीराम इंस्टीट्यूट के मैदान में पहुंची, जहां पर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी को बुलडोजर चलाकर गिरा दिया। इसके अलावा शील कुंज रोड बाग के सामने एलएनटी के बराबर में लावड़ रोड पर स्थित करीब 6000 वर्ग मीटर में मदन पाल आदि की अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी, जिसको मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों ने बुलडोजर लगाकर जमींदोज कर दिया।

यह कॉलोनी सेना की फायरिंग रेंज में आती हैं, इसकी पहले भी शिकायत की गई, मगर एमडीए ने इसमें कार्रवाई नहीं की थी। अब जाकर एमडीए ने इसमें कार्रवाई की है। तीसरी कॉलोनी बीएमजी इंटर कॉलेज डोर्ली के समीप कुलदीप चौहान और राजेश चौधरी द्वारा करीब 7000 वर्ग मीटर में कॉलोनी विकसित की जा रही थी। इस कॉलोनी को भी मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों ने बुलडोजर लगाकर गिरा दिया। कालोनियों के ध्वस्तीकरण के दौरान जोनल अधिकारी मनोज तिवारी, अवर अभियंता मनोज सिसोदिया, महादेव शरण, सर्वेश गुप्ता व कंकरखेड़ा और पल्लवपुरम थाने की पुलिस मौजूद रही।

यहां भी हुई कार्रवाई

मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों की टीम ने कंकरखेड़ा थाना पुलिस को साथ लेकर खंडौली तिरुपति एंक्लेव के सामने रोहटा रोड पर निर्माणाधीन हरेंद्र पाल व पुष्पेंद्र आदि के निर्माण को बुलडोजर लगाकर ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान इंजीनियर राकेश पवार, सर्वेश गुप्ता, महादेव शरण आदि मौजूद रहे।

शताब्दीनगर की जमीन पर एमडीए कर रहा कब्जे की तैयारी

शताब्दीनगर की जमीन पर दो दशक से किसान काबिज है। किसाना जमीन अधिग्रहण की नई नीति के तहत मुआवजा मांग रहे हैं। मुआवजे को लेकर किसानों और मेरठ विकास प्राधिकरण(एमडीए)के बीच तकरार बना हुआ हैं। किसानों ने 600 एकड़ जमीन पर एमडीए को कब्जा नहीं दिया हैं। दो दशक बीत गए, लेकिन वर्तमान में शासन भी चाहता है कि जमीन पर प्रशासन कब्जा ले।

कब्जा जमीन पर मिलता है तो एमडीए को बड़ी उपलब्धि मिलेगी। वैसे कई बार एमडीए जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास कर चुका हैं, लेकिन इसके बाद भी किसानों ने कब्जा नहीं दिया था। अब फिर से इसकी तैयारी कर रहे है कि जमीन पर कब्जा मिले। प्रशासन और एमडीए किसानों से भी बात करना चाहते हैं। वैसे किसान भी शताब्दीनगर में लंबे समय से धरने पर बैठे हैं।

उधर, विजयपाल घोपला का कहना है कि नई जमीन अधिग्रहण के तहत किसानों को मुआवजा मिल जाता है तो उसी दिन जमीन पर कब्जा दे दिया जाएगा, लेकिन जबरिया जमीन को खाली नहीं करने देंगे। क्योंकि पहले भी कई बार प्रयास करके प्रशासन देख चुका हैं। 600 एकड़ जमीन एमडीए के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस समय एमडीए के जमीन का रकबा भी कम हैं। शताब्दीनगर की जमीन पर कब्जा होता है तो निश्चित रूप से एमडीए के पास फिर से रकबा बढ़ जाएगा।

कई बार प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत के दौर चल चुके हैं, लेकिन कुछ समय से बातचीत भी नहीं हो पा रही हैं। इसके बावजूद समाधान नहीं हो पा रहा हैं। एमडीए के लिए तो यह जमीन महत्वपूर्ण है ही, लेकिन किसानों के लिए यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया। उधर, आवास विकास के खिलाफ भी किसानों का धरना-प्रदर्शन चल रहा हैं। वहां भी खींचतान चल रही हैं। एमडीए और शताब्दीनगर के किसानों के बीच भी टकराव चल रहा हैं। समाधान कोई दिखाई नहीं देता।

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