Monday, November 29, 2021
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सराफा समेत सभी बाजारों में हुई धनवर्षा

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: धनतेरस के मौके पर सफारा, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम समेत सभी सामान की जमकर खरीदारी हुई। बाजारों में लोग निकले तो कुछ न कुछ खरीदकर ही घरों में पहुंचे। धनतेरस के मौके पर दुपहिया वाहनों की भी खूब बिक्री हुई। इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर हो या पेट्रोल इंजन से चलने वाला दुपहिया वाहन सभी की खूब खरीदारी हुई।

बाजारों की भीड़ को देखकर मंगलवार को अनुमान लगाया जा सकता था कि इस बार बाजार में खूब धन बरसा है। सराफा बाजार हो या कोई अन्य बाजार सभी जगहों पर खूब खरीदारी हुई। सराफा बाजार की ही बात करें तो यहां लोग सोने के सिक्के और चांदी के सिक्के लेने पहुंचे। इसके अलावा चांदी के बर्तनों को खरीदने वालों की भी भीड़ रही।

मेरठ के अलावा अन्य शहरों से भी यहां लोग सामान खरीदने पहुंचे। सोना-चांदी व्यापार संघ अध्यक्ष संत कुमार वर्मा ने बताया कि बाजार में काफी रंगत देखने को मिली। पूरा दिन ग्राहक टूटने का नाम नहीं ले रहे थे। लोग चांदी के सिक्कों के अलावा चांदी के बर्तन और पूजा की चांदी की थाली भी खरीदने पहुंचे। बाजार में एक ही दिन की सेल की बात करें तो करोड़ों रुपये का व्यापार हुआ।

खूब बिके दुपहिया वाहन

धनतेरस के मौके पर दुपहिया वाहनों की भी खूब बिक्री हुई। गढ़ रोड स्थित होंडा शोरूम में एक ही दिन में 100 से अधिक लोगों को वाहन सौंपे गये।

तेजगढ़ी स्थित इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर शोरूम के मालिक किशोर वाधवा ने बताया कि उनके यहां भी एक ही दिन में 38 से अधिक वाहन बिके। उनके शोरूम में यह बुकिंग पहले ही की जा चुकी थी। लोग धनतेरस के लिये बुकिंग करा चुके थे।

लोग घर ले गए नया टीवी, फ्रीज

धनतेरस के मौके पर लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की भी खूब खरीदारी की। टीवी और फ्रीज समेत तमाम आइटम लोग खरीदकर अपने घर ले गये।

गीतांजलि स्टोर के अंकुर ने बताया कि उनके यहा दिनभर ग्राहकों की भीड़ रही और दिवाली के मौके पर कैश बैक आफर भी सभी कंपनियों की ओर से दिया जा रहा है जिससे ग्राहक आकर्षित होकर और खरीदारी कर रहे थे।

बर्तनों की दुकानों पर रही भारी भीड़

बर्तनों की दुकानों की बात करें तो शहर में हापुड़ अड्डा, लालकुर्ती, बेगमपुल समेत सभी प्रमुख बाजारों में बर्तन की दुकानों पर अच्छी खासी भीड़ रही। बता दें कि धनतेरस के दिन बर्तन की खरीदारी शुभ मानी जाती है। जिसके चलते दुकानों पर काफी भीड़ पहुंची।

सभी ने अपनी सहूलियत और बजट के हिसाब से बर्तन खरीदे। इस बार कोरोना के बाद से बाजार में भी खूब खरीदारी हुई। बाजारों में काफी भीड़ देखनो को मिले। एक ही दिन में करोड़ों रुपयों के बर्तनों की ब्रिकी हुई।

मनमोह रहे सजीले झूमर और आकर्षक वंदनवार

दीपावली पर वदंनवार और कैंडल के बिना घर सजाने का ख्वाब अधूरा ही रह जाता है। बाजार में वदंनवार की नई-नई वैरायटी उपलब्ध है। टीशू, जरकन, पर्ल, कलावा, पोत के मोती आदि से बनी ये वंदनवार बेहद खूबसूरत है। पूरा शहर विभिन्न प्रदेशों के बने सजावटी सामानों से रंगा है।

कहीं राजस्थानी वंदनवार है तो कहीं कलकत्ता के काम की रंगोली। लोगों को हर बार कुछ न कुछ नया ही चाहिए। इसलिए इस बार बाजार में दूसरे प्रदेशों का डेकोरेटिव सामान उपलब्ध है।

सदर बाजार स्थित पूजा जनरल स्टोर के संजय बताते हैं कि पोथ के मोती और राजस्थानी कलावे से बने ये डेकोरेटिव आइटम लोगों को काफी लुभा रहे है। रोशनी के पर्व पर जगमगाहट को बढ़ाने के लिए कैंडल की भी खूबसूरत वैरायटी बाजार मे मौजूद है। इसमें वैक्स, सेटिंड आदि की कैंडल अधिक पसंद की जा रही है।

कूंदन से सजे झूमर

दीपावली की जगमगाहट में चार चांद लगाने के लिए बाजार में आकर्षक झूमर आए है। कूंदन जरकन से सजे इन झूमर में छोटा-सा इलेक्ट्रिक बल्ब भी लगा है।

लाजवाब वैरायटी दाम के साथ

  • झूमर 1200 से 1500
  • राजस्थानी वंदनवार 200 से 1500
  • गुजराती वंदनवार 400 से 800
  • कलकत्ता वंदनवार 200 से 1200
  • वुडन वंदनवार 350 से 1000
  • जरकन वंदनवार 130 से 500
  • पर्ल वंदनवार 250 से 600
  • स्टील वंदनवार 150 से 500
  • जैल कैंडल 70 से 150

नरक चतुर्दशी पर तिल के तेल से जलाए आटे का बना चौमुखी दीपक

अकाल मृत्यु से बचाती है नरक चतुर्दशी

श्री हरि को सर्वाधिक प्रिय कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जोकि आज मनाई जाएगी। इसी दिन छोटी दिवाली और हनुमान जयंती भी है। नरक चतुर्दशी को ही भगवान श्रीकृष्ण ने दैत्य नरकासुर का वध किया था व 16,000 बंदी कन्याओं के साथ विवाह कर उन्हें सम्मान दिलाया था। इसी दिन वामन अवतार में हरि ने राजा बलि को आशीर्वाद दिया था कि हर साल दिवाली पर उनके यहां आएंगे।

इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का आशीर्वाद हासिल करने के लिए आटे का चौमुखा दीपक बनाएं और तिल का तेल उसमें डालें। रात के समय विधि-विधान से पूजा करने के बाद दीपक जलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर अनाज पर रखें।

साथ ही, मृत्युनां दंडपाशाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यज: प्रीयतां ममष् मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। काल मृत्यु से बचने के लिए नरक चतुर्दशी जरूर मनानी चाहिए। एक बार यमराज ने दूतों से पूछा क्या तुम्हें प्राणियों के प्राण लेते समय दया नहीं आती, तब दूतों ने उन्हें बताया हेम नामक राजा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया।

जिसके विषय में ज्योतिषियों ने कहा कि जिस दिन इसका विवाह होगा उसके चार दिन बाद यह मर जाएगा। चिंतित राजा ने बालक को यमुना किनारे की गुफा में ब्रह्मचारी के रूप में रखकर पाला। उसी यमुना तट पर महाराज हंस की पुत्री यमुना घूम रही थी, जिसे देख राजकुमार ने गंधर्व विवाह कर लिया।

ठीक चार दिन बाद राजकुमार की मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु पर राजकुमारी का विलाप देखकर हमारा हृदय भी कांप रहा था। यह प्रसंग यमराज को सुनाने के बाद एक यमदूत ने यमराज से अकाल मृत्यु से बचने का उपाय पूछा। यमराज ने कहा नरक चतुर्दशी के दिन अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को पूजन व दीपदान विधि-विधान से करना चाहिए।

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