- वैदिक राष्ट्र निर्माण के उत्थान को शिवशक्ति महायज्ञ का समापन
जनवाणी संवाददाता |
मोरना: यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज ने वैदिक राष्ट्र निर्माण के उत्थान को शिवशक्ति महायज्ञ का समापन कराया। इस दौरान उन्होंने सम्बोधित करते हुए कहा कि देश में बढ़ती जनसंख्या विस्फोट की स्थिति में है, अगर इस पर नियंत्रण न हुआ, तो देश को गृहयुद्ध झेलना होगा। उन्होंने कहा कि धर्म के विनाश को रोकने के लिए संतो को आगे आना होगा।
यदि इजराईल देश की तरह अपना सनातन वैदिक राष्ट्र बनाना है, तो अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने पड़ेंगे। भारत वर्ष में चल रहे इस्लामिक जेहाद का सबसे बड़ा हथियार उनकी जनसख्या बढ़ोतरी है। अगर इस युद्ध में हार गये तो महादेव भी अवतार लेकर इस युद्ध की पराजय से हमें बचा नहीं सकेंगे।
शुकतीर्थ स्थित महाशक्ति सिद्धपीठ आश्रम में यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन वैदिक का राष्ट्र निर्माण हो और पूरी दुनिया से इस्लाहम व जेहाद आतंक का अंत हो। चीन, पाकिस्तान, बगंलादेश और नेपाल आदि राष्ट्र हमें आज आंख दिखा रहे है।
अगर नेतृत्व उचित कदम उठायेगा तो आने वाले नतीजे निश्चित तोर पर हमारे पक्ष मे आयेगें। अंदर की लडाई के लिए को सभी धर्म वर्ग के लोगो को देखना होगा, हमारे सैनिक सीमाओ की रक्षा करने में सक्षम है। अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रप्रकाश कौशिक कोशिक ने कहा कि यज्ञ हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित होना सिखाता है।

पिछले 70 साल से देश में राज करने वाली सरकार ने धर्म की परिभाषा ही बदल दी थी, जिसके चलते धर्म को कार्यक्षेत्र, शिक्षा और संस्कारों से निकाल कर पथभ्रष्ट करने का काम किया गया। अगर भाजपा सरकार न बनती तो अब तक भारत देश पांच टुकड़ों में बट चुका होता।
लव जेहाद के नाम पर रेट फिक्स कर जेहाद के नाम पर घिनौना खेल खेला जा रहा है। विश्व मे शान्ति चाहते है तो इस्लाम की पुस्तको में कुछ लाईने हटाने होगी। नाथूराम गोडसे की अस्थियां दिल्ली में रखी हुई है, उनका सपना तब पूरा होगा, जब सिंध हिन्द में मिल जाये। इस मौके पर आश्रम अधिष्टमता माता राजनंदेश्वरी ने संत महात्माओं को भंडारे का प्रसाद का भोग कराया।
यज्ञ सम्पन्न कराने में स्वामी महानंद महाराज, बहन प्रवेश, चंद्रमा ब्रह्मचारी, प्रेम शंकर मिश्रा, कांता साध्वी, अखिल भारत हिन्दू महासभा के प्रदेशाध्यक्ष योगेन्द्र वर्मा, वेदवीर, पुष्पेन्द्र शर्मा, शिवसेना के जिला प्रमुख बिट्टू सिखेड़ा आदि का योगदान रहा।

