- कई चुनावों में सरधना सीट से लीड़ लेने वाला प्रत्याशी की होती है जीत
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: लोकसभा के चुनाव में सरधना विधान सभा सीट की हमेशा निर्णायक भूमिका रही है। इस विधान सभा सीट से लोकसभा चुनाव की हार जीत तय होती है। हालांकि पिछले कई चुनावों के इतिहास पर नजर डाली जाए तो उससे साफ जाहिर होता है कि अभी तक के चुनावों में यह सीट चुनाव जीताने में निर्णायक रही और इस सीट से लीड़ लेने के बाद प्रत्याशी चुनाव जीतने की दहलीज तक पहुंच जाता है। इस बार का लोकसभा चुनाव अहम् है। सभी पार्टियों ने इस चुनाव में अपने-अपने दल की उपलब्धियों को गिना रहे है।

लेकिन इस बार के चुनाव में जनता काम के आधार पर वोट देने की बात कह रही है। हालांकि मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से दो बार केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने जीत दर्ज की है। पहला चुनाव 2014 में संजीव बालियान ने बसपा के प्रत्याशी कादिर राणा को हराया था। इस चुनाव में सरधना से लगभग तीस से चालीस हजार की लीड़ बालियान ने ली थी। इसके बाद 2019 में संजीव बालियान ने रालोद सुप्रीमो स्व. चौधरी अजीत सिंह को 6 हजार वोटों के अंतराल से चुनाव हराया।
इस चुनाव में भी सरधना सीट की अहम भूमिका रही। चार हजार वोटों की लीड़ लेकर संजीव बालियान ने जीत दर्ज की थी। फिर से इस सीट पर संजीव बालियान तीसरी बार भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। सपा से हरेंद्र मलिक बसपा से दारा सिंह प्रजापति चुनाव मैदान में है, लेकिन इस बार देखना है कि यह सीट चुनाव जीत-हार में कितना अहम् बनेगी।
…जब बागी उम्मीदवार के पैर छूकर दिया संदेश
मेरठ: कैंट के पूर्व विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल बताते हैं कि जिस समय उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में मेयर का चुनाव लड़ा, तब भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहनलाल कपूर ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन कराया। इसी मेयर चुनाव के प्रचार के दौरान बुढ़ाना गेट पर दोनों अपने-अपने समर्थकों के साथ अचानक एक-दूसरे के सामने आ गए। इस बीच दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी।

ऐसे में सत्य प्रकाश अग्रवाल आगे बढ़े और मोहनलाल कपूर के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। यह देखकर समर्थकों के बीच एक अलग ही संदेश गया। उनके दिलों में भी किसी प्रकार की कोई कटुता पनपना का अवसर नहीं रह गया। एक और घटना का उल्लेख करते हुए बताते हैं की मेरठ कैंट के 2007 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान हुए मोहनलाल कपूर से मिलने के लिए के शास्त्री नगर बूथ पर पहुंचे जहां देखा कि मोहनलाल कपूर अपनी कुर्सी पर नहीं हैं। और उनकी कुर्सी धूप में पड़ी हुई है। सत्य प्रकाश अग्रवाल ने इस कुर्सी को वहां से हटकर एक पेड़ के नीचे रख दिया। इसी बीच मोहनलाल कपूर वहां पहुंचे, और कुर्सी को वापस धूप में लेकर बैठ गए उन्होंने सत्य प्रकाश अग्रवाल से कहा कि वह 1995 का कर्ज उतारने के लिए अपने बूथ पर अधिक से अधिक मतदान करने के लिए कृत संकल्प हैं।
सत्य प्रकाश अग्रवाल का कहना है कि पहले कार्यकतार्ओं के हिस्से में दरी बिछाने से लेकर रिक्शे आदि के माध्यम से प्रचार प्रसार करने, घर-घर जाकर वाटर पर्चियां वितरित करने के काम हुआ करते थे। आज परिस्थितियों बदल चुकी हैं। प्रचार प्रसार का अधिकांश कार्य सोशल मीडिया के माध्यम से होने लगा है। बदलते समय के साथ चुनाव पर भी आधुनिकता का आवरण चढ़ चुका है और चुनाव काफी खचीर्ले हो चुके हैं।

