- प्रोटोकॉल में नई दवा शामिल, नहीं होगा साइड इफेक्ट
वरिष्ठ संवाददाता |
सहारनपुर: ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) एचआईवी के मरीजों को अब और बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके लिए शासन ने इलाज के प्रोटोकॉल में नई दवा को शामिल किया है। नए मरीजों के साथ ही पुराने मरीजों को भी यह दवा दी जाएगी। नेशनल कंट्रोल एड्स सोसायटी की ओर से (एंटीरेटरोवायरल थरेपी) एआरटी सेंटर्स पर यह दवा भेज दी गई है। अब तत्काल प्रभाव से मरीजों को नई दवा दी जाएगी।
शासन की गाइडलाइन के तहत प्रोटोकॉल में नई डोज डॉल्यूटेग्राविर को शामिल किया गया है। गाइडलाइंस के अनुसार यह दवा एचआईवी के वायरस पर अधिक तेज और असरदार हैं। इससे शरीर में एड्स के वायरस का असर जल्दी कम होता है। वहीं इसके साइड इफेक्ट भी नहीं होंगे। अभी तक इसके इलाज के प्रोटोकॉल में टेनोफोवीर, लैमीवुडीन व ए फाविरेंज की डोज दी जाती थी। अब ए फाविरेंज को इसमें से हटा दिया गया है।
एचआईवी के मरीजों के लिए प्रोटोकॉल में शामिल नई दवा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि किसी भी समय इसका सेवन किया जा सकता है। हटाई गई दवा के लिए समय, रात को सोने से पहले निर्धारित था। इसके कारण कई बार मरीज दवा खाना भूल जाते थे और ड्रग रेजिस्टेंस की समस्या हो जाती थी। वहीं पुरानी दवा के साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे थे। इसमें मरीजों में घबराहट, नींद आना, गफलत बनी रहना जैसे लक्षण बने रहते थे। इन परिणामों को देखते हुए प्रोटोकॉल में नई दवा को शामिल किया गया है।
‘शासन की ओर से गाइडलाइन के हिसाब से मरीजों को दवा दी जाएंगी। एड्स को लेकर लोगों में जागरूकता कम है। सही समय पर इलाज करवा कर इसे शरीर में बढ़ने से रोका जा सकता है। अब पुराने मरीजों के साथ नए मरीजों को भी यह दवा दी जाएगी।’ -डाक्टर राजेश जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी

