जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: विश्व सीओपीडी दिवस की पूर्व संध्या पर होटल क्रिस्टल पैलेस में प्रेस कांफें्र्रस का आयोजन किया गया। पे्रस कॉन्फ्रेंस में डा. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि पहले सीओपीडी बीमारी के बारे में माना जाता था कि यह केवल धूम्रपान करने वाले बुजुर्ग व्यक्तियों में ही होती है, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
नए शोध में पता चला है कि लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण के कारण बिना धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में भी यह बीमारी तेजी से फैल रही है। उन्होंने कहा कि क्रॉनिक ऑब्स्ट्रिक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों का ऐसा रोग है, जिसमें मरीज सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाता। सामान्य तौर पर फेफड़े बहुत स्पॉन्जी होते हैं।
जब हम सांस के जरिए हवा अंदर लेते हैं तो ऑक्सीजन हमारे खून के अंदर मिल जाती है और कॉर्बन डाइआॅक्साइड बाहर चली जाती है, लेकिन सीओपीडी रोग इस प्रक्रिया को रोकता है। सीओपीडी के मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है और ऑक्सीजन शरीर में पूरी मात्रा में नहीं पहुंच पाती है।
डा. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि भारत में 2016 में सीओपीडी के मामलोंं की संख्या 1990 मे 281 मिलियन से बढ़कर 553 मिलियन हो गई है। सीओपीडी के मुख्य कारण 53.7 फीसदी प्रदूषण, 25.4 फीसदी तंबाकू का प्रयोग और 16.5 फीसदी उद्योग जनित प्रदूषण है।
विश्व में 2019 में सीओपीडी के कारण सबसे अधिक मृत्यु भारत में दर्ज हुई। उन्होंने कहा कि डब्लूएचओ के एक रिसर्च के अनुसार सन् 2000 से 2019 तक सीओपीडी बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा बहुत तेजी से बढ़ा है तथा घातक बीमारी विश्व में दूसरे पायदान पर पहुंच चुकी है।
इस दौरान डा. तोमर ने आमजन से सीओपीडी बीमारी को गंभीरता से लेने की अपील की। इसके साथ ही धूम्रपान छोड़ने, सही खानपान की सलाह दी। वहीं, सीओपीडी की समस्या होने पर डाक्टर की सलाह से इनहेलर लेने का सुझाव दिया।

