- बोले- अफसर पिंजरा खराब, भौचक्का है तेंदुआ परिवार, भीड़ को हटाने के दिए निर्देश
जनवाणी संवाददाता
मेरठ/किठौर: भड़ौली-फतेहपुर के जंगल में तेंदुआ परिवार वनविभाग के लिए पहेली बना हुआ है। तीन तेंदुए साक्षात दिखते हुए पूरी तरह सक्रिय होने के बावजूद विभाग के कारिंदे अफसरों के आदेश की दुहाई और तेंदुए से जुड़ी बेशुमार परेशानियां गिनाते सुने जाते हैं। विभाग के ढुलमुल रवैये से ग्रामींणों में रोश भी है और तेंदुए की दहशत भी।
बुधवार को तेंदुआ आॅपरेशन स्थल पर यही दृष्य देखने को मिला। तेंदुआ परिवार के ठिकाने से सटे क्षेत्र को अतिसंवेदनशील घोषित करते हुए मौके पर मौजूद वन विभाग की टीम ने वहां की बेरिकेडिंग करा दी। उसके बाद वहां से आमजन की आवाजाही रोकते हुए पूरे दिन टीम उच्चाधिकारियों के पहुंचने की प्रतीक्षा करती रही।

शाम लगभग 6:00 बजे वनसंरक्षक गंगा प्रसाद, जिला वनाधिकारी राजेश कुमार घटनास्थल पर पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना करते हुए मुस्तैद टीम को आवश्य दिशा-निर्देश देकर रवाना हो गए। उन्होंने ग्रामीणों को भी कई सुरक्षात्मक उपाय बताए। उधर, वनविभाग के ढुलमुल रवैये से ग्रामीणों में रोष और दहशत व्याप्त है।
उनका कहना है कि मंगलवार शाम तेंदुए लगाए गए दोनों पिंजरों के पास देखे गए थे। इसके बाद रात्री में उन्होंने सड़क पार कर बाग वाले पिंजरे से करीब 300 मीटर दूर पश्चिम में फतेहपुर के पूर्व प्रधान सुभाष त्यागी के खेत में दो सेह का शिकार किया है। ऐसे में तेंदुआ परिवार के गांव में घुसकर वारदात करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
भौचक्का हुआ तेंदुआ परिवार
रेंजर जगन्नाथ कश्यप ने बताया कि ग्रामीणों की भीड़ वन टीम की घेराबंदी और कई दिनों से निरंतर चल रहे शोरगुल के कारण तेंदुआ परिवार भौचक्का है। इसलिए वह पिंजरें के पास पहुंचकर लौट जाता है। उन्होंने पिंजरे में भी कुछ खराबी बताई।
रेंजर ने बताया कि तेंदुआ पकड़ने में मुख्य परेशानी यह है कि अगर मादा तेंदुआ गिरफ्त में आया तो उसके शावक भूखे मर जाएंगे। यदि शावक पकड़ लिए गए तो मादा तेंदुआ खूंखार होने का अंदेशा है। ऐसे में राष्ट्रीय धरोहर और मानव समाज दोनों सुरक्षित रहे, यह दृष्टिगत रखते हुए आॅपेरशन चलाया जा रहा है।

