Friday, July 19, 2024
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ओवरलोड ट्रैक्टर बने जानलेवा

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  • इनके खिलाफ नहीं की जाती ओवरलोड के तहत कार्रवाई, हौसले बुलंद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ओवरलोड ट्रैक्टर शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। कई पड़ोसी जनपदों से ट्रैक्टर र्इंट लादकर शहर में एंट्री करते हैं, मगर इनका चालान या फिर जब्त की कार्रवाई नहीं की जाती हैं। ये तमाम ट्रैक्टर-ट्रॉली ओवरलोड ही होते हैं, फिर इनका पंजीकरण व्यवसायिक में नहीं हैं। कृषि के प्रयोग में लाने के लिए ट्रैक्टर का पंजीकरण कराया होता है, लेकिन संचालित व्यावसयिक कार्यों में किया जा रहा हैं।

इस तरह से भी ये ट्रैक्टर एक दिन भी नियमानुसार र्इंट लादकर सड़क पर नहीं दौड़ सकते, लेकिन इन पर आरटीओ के अधिकारी खास मेहरबान है, जिसके चलते इनका नहीं तो कोई चालान हो रहा है, नहीं इन्हें सीज किया जाता हैं। वैसे इनको सीज करने का नियम है, लेकिन सीज यह कहकर टाल दिया जाता है कि आरटीओ के पास पर्याप्त मैदान नहीं हैं, जिसके चलते इनका चालाक काटकर छोड़ दिया जाता हैं।

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शामली, बागपत और बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)से व्यापक स्तर पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में र्इंट व रेत लादकर शहर में लाया जा रहा हैं। ये तमाम ट्रैक्टर ओवरलोड ही होते हैं, मगर 2500 में लाइसेंस, यानी किल का लाइसेंस थमा दिया जाता हैं। हर रोज इन ओवरलोड ट्रैक्टरों से दुर्घटनाएं हो रही हैं, फिर भी इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा हैं। ट्रकों का तो आरटीओ चालान कर रहे हैं, मगर इन ओवरलोड ट्रैक्टरों का चालान कौन करेगा?

कई जनपदों से जो ट्रैक्टर-ट्रॉली पहुंचती हैं, उनकी सख्ता 300 से ज्यादा बताई जा रही हैं। इनकी हर रोज शहर में एंट्री होती हैं, जनता को ये ट्रैक्टर-ट्रॉली दिखाई देती हैं, मगर आरटीओ को नहीं दिखती। इनके चालान नहीं किये जाते, आखिर क्यों? महत्वपूर्ण बात यह है कि 90 प्रतिशत ट्रैक्टर कार्मिशियल में पास नहीं हैं। फिर भी उन्हें व्यवसायिक गतिविधियों में क्यों चलने दिया जा रहा हैं?

ट्रैक्टर पर एक सवारी बैठने की अनुमति होती हैं, लेकिन यहां तो ट्रैक्टर के अलावा ट्रॉली पर ही तीन-तीन सवारी बैठी रहती हैं, जो कई बार दुर्घटना का भी शिकार हो चुकी हैं। ओवरलोड टैÑक्टरों से आम आदमी को भी जान का खतरा बना रहता हैं। क्योंकि जिन ट्रैक्टर ट्राली में र्इंट लदी होती हैं, वो ओवरलोड के कारण अचानक आगे से ऊपर उठ जाता हैं। रिश्वत के दम पर ही ये ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर दौड़ रहे हैं, इनको नहीं रोका जा रहा हैं।

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शासन के स्पष्ट आदेश है कि राजस्व बढ़ाने के लिए ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली व अन्य तमाम वाहनों पर सख्ती के साथ कार्रवाई की जाए, मगर यहां पर ट्रैक्टरों को छोड़कर ट्रकों व अन्य वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। ट्रैक्टरों पर आरटीओ खास मेहरबान बने हुए हैं।

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