- यूपी और उत्तराखंड के कई नेता कैलाश प्रकाश और उमादत्त शर्मा के शागिर्द
- हस्तिनापुर विधानसभा चुनाव में परीक्षितगढ़ की होती अहम् भूमिका
जनवाणी संवाददाता |
परीक्षितगढ़: ऐतिहासिक नगरी को सियासत का गढ़ कहा जाये तो अचंभा नहीं होना चाहिए, क्योंकि परीक्षितगढ़ के नेताओं ने यूपी विधानसभा सीटों पर प्रतिनिधित्व किया। यहां के दो सियासी नेताओं का विधानसभा पहुंचने का क्षेय भी हासिल हुआ। क्षेत्र में अपने कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य पर काफी जोर देते थे।
परीक्षितगढ़ निवासी स्वंत्रतता सैनानी व शिक्षा व वित्तमंत्री कैलाश प्रकाश ने सन् 1952 से 1967 तक विधानसभा सदस्य विधान परिषद सदस्य, लोकसभा सदस्य पूर्व मंत्री रहे। उमादत्त शर्मा लगभग कांग्रेस पार्टी से सन् 1971 से 1976 तक विधायक व नगर विकास मंत्री रहे। दोनों नेताओं का वर्चस्व इतना तेजी से फैला कि अन्य पार्टी भी उन्हें हराने के लिए ऐडी से चोटी तक जान लगानी पड़ती थी।

पूर्व शिक्षा मंत्री कैलाश प्रकाश ने युवतियों के लिए राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, खिलाड़ियों के लिए कैलाश प्रकाश स्टेडियम, स्वास्थ्य जगत में मेडिकल अस्पताल इनके प्रयास की सौगात है। शिक्षा के प्रति उनके काफी लगाव था। आज युवतियां दूरदराज से पढ़ने नगर में स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में आती है। उन्होंने शिक्षा की अलख जगाई थी, लेकिन जैसे-जैसे राजनीति में बदलाव आया परीक्षितगढ़ की राजनीति किठौर पहुंची। जिसमें पूर्व मंत्री हलीम व पूर्व विधायक मंजूर अहमद के साथ अब पूर्व सांसद मुनकाद अली, पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, पूर्व विधायक परवेज हलीम अपने पिताओं की राजनीति को बेखूबी संभाले हुए हैं।
क्षेत्र के ये विधायक जीते
एक जमाने में राजनीति में परीक्षितगढ़ व क्षेत्र के नेताओं की तूती बोलती थी। राजनीति में स्वत्रंतता सैनानी पूर्व मंत्री कैलाश प्रकाश, पूर्व मंत्री उमादत्त शर्मा, पूर्व विधायक हर शरण जाटव, पूर्व विधायक झगड़ सिंह, पूर्व विधायक प्रभुदयाल, पूर्व विधायक रामदयाल रहे। वहीं, वर्तमान में गांव अगवानपुर के मूल निवासी आम आदमी पार्टी से दो बार अमानतुल्ला दिल्ली में विधायक है।
विधानसभा का चुनाव लडेÞ, लेकिन जीते नहीं
भाजपा पार्टी से बिजेंद्र लौहरे, जनता दल से लीलापत एडवोकेट, बसपा से पूर्व ब्लॉक प्रमुख सरदार सिंह व बिजेंद्र प्रधान, सपा से उदयवीर, राष्टÑीय क्रांति पार्टी बलराज गुर्जर, बसपा केट विधानसभा मनोज निर्मल, कांग्रेस से रतन लाल गर्ग, कांग्रेस से भीकम सिंह प्रेमी, रालोद से नरेंद्र खजूरी, सपा से जगदीश पाल चुनाव लडेÞ, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए।
राजनीति का केंद्र बिंदू रहा है परीक्षितगढ़
महाभारतकालीन परीक्षितगढ़ का दुर्भाग्य है कि जहां धुरंधर नेताओं ने राजनीति में अपना परचम लहराया था, लेकिन पिछले 50 वर्षों से परीक्षितगढ़ का विधायक नहीं जीत सका है। जबकि परीक्षितगढ़ राजनीति का केंद्र बिंदू माना जाता है। जबकि यहां के मूल निवासी कपिल देव काफी समय से मुजफ्फरनगर में रहकर राजनीति में क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं।

