Sunday, April 19, 2026
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खिलाड़ियों को चाहिए सिंथेटिक ट्रैक

  • 2024 फ्रांस में होने वाले ओलंपिक की तैयारियों में जुटे है खिलाड़ी
  • ओलंपिक में सिंथेटिक ट्रैक पर करना होता है प्रदर्शन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहे खिलाड़ियों को कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में बिना सिंथेटिक ट्रैक के ही अभ्यास करना पड़ रहा है। ऐसे में वह जमीन पर खेलने के आदी हो गए है, जबकि ओलंपिक में सिंथेटिक ट्रैक पर प्रदर्शन करना होता है।

खिलाड़ियों ने बताया कि वहां पर उनके घायल होने की संभावना लगातार बनी रहती है, साथ ही सिंथेटिक ट्रैक पर बिना अभ्यास करने के वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे कर सकेंगे।

रिया सिंह: 2018 से स्टेडियम में ओलंपिक में जाने का सपना देख रही शॉटपुट खिलाड़ी का कहना है वह देश के लिए मेडल जीतना चाहती है। वह दिव्यांग है, लेकिन उसके हौसले बुलंद हैै। स्टेडियम में कुछ सुविधाएं जरूरी है जिनसे उसे अभ्यास करने में मदद मिल सकती है। भुवनेश्वर (उड़ीसा) में मार्च में हुई नेशनल प्रतियोगिता में ब्राउंज मेडल जीत चुकी है। अब वह 2024 में होने वाले पैरा ओलंपिक में देश का प्र्रतिनिधित्व करना चाहती है। कोच गौरव त्यागी की देखरेख में अभ्यास कर रही है।

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दीपा तोमर: 400मीटर बाधा दौड़ खिलाड़ी का कहना है वह 2018 से लगातार स्टेडियम में ओलंपिक में जाने के लिए अभ्यास कर रही है। लेकिन यहां सिंथेटिक ट्रैक नहीं होने के कारण जो अभ्यास कराया जा रहा है वह ओलंपिक के लिए ठीक नहीं है। ओलंपिक में सिंथेटिक ट्रैक पर प्रदर्शन करना होता है, लेकिन स्टेडियम में वह नहीं है। ऐसे में ओलंपिक में प्रदर्शन के दौरान चोट लगने का खतरा होगा। साथ ही सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास नहीं होने के कारण किस तरह प्रदर्शन किया जाएगा यह सवाल है।

मांसी चौधरी: 2024 में होने वाले ओलंपिक में जाने के लिए 2017 से स्टेडियम में पसीना बहाने वाली हैप्टाथ्रोन खिलाड़ी का कहना है वह देश के लिए मेडल लाना चाहती है। नेशनल मेडलेस्टि है, हाई जंप में 2021 में ब्रांउज, 2019 मेंं सिल्वर व 2018 में गोल्ड जीत चुकी है। अब उसका सपना है कि वह ओलंपिक में मेडल जीते, जिसके लिए वह लगातार पसीना बहा रही है। लेकिन सिंथेटिक ट्रैक नहीं होने पर अभ्यास करने में परेशानी होती है। ओलंपिक में सभी इवेंट सिंथेटिक ट्रैक पर होते है। ऐसे में वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए किस तरह अपने सपने को साकार करेगी यह बड़ा सवाल है।

सहीर रिजवी: 2019 से ट्रिपल जंप में ओलंपिक में जाने का सपना देख रहे खिलाड़ी का कहना है कि वह भारत के लिए मेडल जीतना चाहता है। वह स्टेट लेवल प्रतियोगिताओं में सिल्वर व ब्रांउज मेडल जीत चुका है। अब 2024 में फ्रांस में होने वाले ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करना सपना है।मगर कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक टैÑक नहीं होने पर अभ्यास तो कर रहे है, लेकिन ओलंपिक में सिंथेटिक ट्रैक होता है। ऐसे में वहां बिना अभ्यास के खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा रहेगा।

अनर्व त्यागी: 2019 से ओलंपिक में जाने का सपना देखने वाले हाईजंप खिलाड़ी का कहना है बिना सिंथेटिक ट्रैक के अभ्यास करने का ज्यादा लाभ नहीं होगा। वह 2019 में छत्तीसगढ़ में सीबीएससी नेशनल में ब्रांंउज, 2021 में मेरठ में हुई नार्थ जोन प्रतियोगिता में सिल्वर व दोे बार जूनियर नेशनल में भाग ले चुका है। खेलों इंडिया में भी टॉप छह मे रह चुका है। ओलंपिक में सभी इवेंट सिंथेटिक टैÑक पर होते है, ऐसे में जब उन्होंने इन टैÑकों पर अभ्यास ही नहीं किया होगा तो कैसे अपना प्रदर्शन करेगे। चोट लगने का खतरा भी होता है।

आरएसओ जीडी बारीकी का कहना है कि स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक की फाइल तैयार है, आठ करोड़ रुपये का बजट है। शासन स्तर पर बजट मिलते ही यहां पर भी यह सुविधा मिलने लगेगी। 25 जून के बाद फाइल आगे भेजने की तैयारी है। खिलाड़ियों को अपना अभ्यास जारी रखना चाहिए, जल्दी ही उन्हें सिंथेटिक ट्रैक की सौगात मिलेगी।

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