Friday, April 17, 2026
- Advertisement -

मोदी सरकार के विवादास्पद फैसले

Nazariya


SHELENDRA CHOUHAN 1मोदी सरकार ने सेना में निचले पदों पर अस्थायी भर्तियों के लिए 14 जून को अग्निपथ का एलान किया। योजना का एलान तीनों सेना प्रमुखों की मौजूदगी में खुद राजनाथ सिंह ने किया। लेकिन सेना में अस्थायी नियुक्तियों की इस योजना से देश के कई हिस्सों में युवा विरोध के लिए सड़कों पर उतर पड़े। चार साल के लिए सेना में नियुक्ति की इस योजना को लेकर देश के युवा नाराज हैं और सड़कों पर उतर आए हैं। इन प्रदर्शनों को शांत कराने के लिए सरकार ने पहले तो योजना से युवाओं को होने वाले फायदों को लेकर एक प्रचार अभियान चलाया, लेकिन उसके बाद भी युवाओं का गुस्सा शांत न होने पर योजना में एक बदलाव की भी घोषणा की। सरकार ने अब कहा है कि चूंकि कोविड-19 महामारी के कारण पिछले दो सालों से सेना में भर्ती रुकी हुई थी, इसलिए सिर्फ इस साल ‘अग्निपथ’ योजना में प्रवेश करने की आयु की ऊपरी सीमा को 21 साल से बढ़ा कर 23 कर दिया जाएगा। यह छूट सिर्फ इसी साल के लिए दी जाएगी और अगले साल से भर्ती के लिए फिर से 17 से 21 साल तक की आयु सीमा का ही पालन किया जाएगा।

पिछले आठ साल में मोदी सरकार ने कई ऐसे बड़े नीतिगत फैसले किए हैं, जिनका व्यापक विरोध हुआ है। हालांकि विरोध के बावजूद दो को छोड़ कर मोदी सरकार ने अपने सभी नीतिगत फैसलों को बरकरार रखा। आखिर मोदी सरकार अचानक इस तरह के चौंकाने वाले फैसले क्यों लेती है और इनका क्या असर होता है। काला धन, टेरर फंडिंग और भ्रष्टाचार खत्म करने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को रात आठ बजे टीवी पर देश के नाम संबोधन में नोटबंदी का एलान कर दिया। देश में 500 और एक हजार रुपये के नोटों पर पाबंदी लगा दी गई। सरकार के इस चौंकाने वाले फैसले से देश में अफरातफरी फैल गई। बाद में पता चला कि इससे अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई। इस कदम से कितना काला धन सिस्टम में वापस आया इस पर विवाद बना हुआ है। टेरर फंडिंग में कमी और भ्रष्टाचार के खात्मे का सबूत देता कोई पुख्ता आंकड़ा तो मौजूद नहीं है। आरबीआई की 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक 15.41 लाख करोड़ के नोटों की नोटबंदी हुई थी, लेकिन 15.30 लाख करोड़ रुपये वापस बैंकिंग सिस्टम में लौट आए थे।

विश्लेषकों का कहना है कि इस फैसले से देश का औद्योगिक उत्पादन गिर गया था और जीडीपी में गिरावट आ गई थी। एक अनुमान के मुताबिक 15 लाख नौकरियां खत्म हो गई थीं। हालांकि इस फैसले से डिजिटल ट्रांजेक्शन और कैशलेस ट्रांजेंक्शन काफी बढ़ गया था। 2018 में देश में कथित अवैध आप्रवासियों को दीमक बताते हुए नरेंद्र मोदी सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था केंद्र में दोबारा उनकी सरकार आई तो ‘अवैध घुसपैठियों’ को देश से बाहर कर दिया जाएगा। फिर असम में नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटिजन्स (एनआरसी) लागू करवाया गया और 20 लाख लोगों को इससे बाहर कर दिया गया। इनमें पूरी जिंदगी इस देश में रहने वाले कई मुसलमान विदेशी घोषित कर दिए गए। दिल्ली में शाहीनबाग समेत देश में कई जगह कड़े विरोध के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) ले आया गया। सीएए के तहत मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में उत्पीड़न के कारण भाग कर भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।

इसके बाद देश में कोविड लॉकडाउन की वजह से इन कानूनों का विरोध धीरे-धीरे दब गया। नोटबंदी की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च 2020 को देश में कोविड लॉकडाउन का एलान कर दिया। यह लॉकडाउन की तैयारी के बगैर किया गया ऐलान था। इस फैसले ने लाखों लोगों को पैदल अपने घरों को लौटने को मजबूर कर दिया था। लाखों लोग जहां के तहां फंस गए। कामकाज बंद होने से बड़ी तादाद में लोगों का रोजगार खत्म हो गया था और अप्रैल-जून 2020 के बीच इकोनॉमी में 24.4 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई।

मोदी सरकार का भूमि अधिग्रहण संशोधन (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, पुनर्स्थापन और उचित मुआवजा और पारदर्शिता) बिल 2015 में लोकसभा में तो पारित हो गया था लेकिन राज्यसभा में ये पास नहीं हो सका। पहले के बिल में प्राइवेट सेक्टर के भूमि अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी जमीन मालिकों की मंजूरी जरूरी थी। पीपीपी प्रोजेक्ट के लिए 70 फीसदी जमीन मालिकों की मंजूरी जरूरी थी। लेकिन नए कानून में ये बाध्यता खत्म कर दी गई। इसके बाद ही इस बिल का विरोध शुरू हो गया। सत्ता पक्ष ने विधेयक को किसानों के हित में बताते हुए ये तक कह दिया कि किसानों में जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। लेकिन भारी विरोध को देखते हुए प्रधानमंत्री ने एक भावुक भाषण देकर यह बिल वापस ले लिया।

विपक्ष के संक्षिप्त विरोध के बाद मोदी सरकार ने एक अगस्त 2019 को तीन तलाक बिल पारित करा लिया। सरकार की ओर से कहा गया कि यह बिल मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाएगा। लेकिन इसे अल्पसंख्यकों के पर्सनल कानून में हस्तक्षेप माना गया। इस साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने वन रैंक वन पेंशन पर सरकार के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, कोर्ट को वन रैंक वन पेंशन सिद्धांत और 7 नवंबर, 2015 की अधिसूचना पर कोई संवैधानिक दोष नहीं दिखता है। जबकि एक्स सर्विस मैन शुरू से ही इसका विरोध कर रहे थे। मोदी सरकार के इन विवादास्पद फैसलों के बावजूद विपक्ष कुछ बहुत ज्यादा हासिल नहीं कर सका है। यह उसकी बड़ी विफलता है।


janwani address 8

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Bloomberg: एशिया का नया सबसे अमीर व्यक्ति, अदाणी ने अंबानी को पछाड़ा

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति...
spot_imgspot_img