Sunday, April 19, 2026
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तौबा-तौबा! कहीं बकरे के दांत नकली तो नहीं

  • डेंटिस्ट के यहां लगवाए जा रहे नकली दांत, बनवाए जा रहे दांतों के कवर
  • पश्चिम उत्तर प्रदेश की बकरा मार्केट पर एक गिरोह हुआ काबिज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बकरीद के सबसे ‘पवित्र’ अमल कुर्बानी को ‘अपवित्र’ करने का गंदा खेल खेला जा रहा है। इस खेल का सनसनी खेज खुलासा शुक्रवार को हुआ। असल कुर्बानी का जज्बा रखने वाले मुसलमानों के अरमानों को इस वक्त बकरा मार्केट में जमकर लूटा जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में यह गंदा खेल चल रहा है।

बकरा मार्केट से जुड़े सूत्रों के अनुसार कुर्बानी के लिए जो बकरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मार्केट में आए हैं उनमें से कई ऐसे हैं जिनके दांत या तो नकली हैं या फिर क्षतिग्रस्त हैं और इन क्षतिग्रस्त दांतों पर डेंटिस्ट द्वारा बाकयदा कैप चढ़ाया गया है। बताते चलें कि ऐसे बकरों की कुर्बानी इस्लामी कानून के हिसाब से बिल्कुल भी जायज नहीं है अर्थात् इनकी कुर्बानी मानी ही नहीं जाएगी।

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इस पूरे मामले में जब दैनिक जनवाणी ने अपने स्तर से पड़ताल की तो फिर और भी परतें खुलती गर्इं। पता चला कि लोगों की आस्था के साथ यह गन्दा खेल एक नहीं कई शहरों में खेला जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मेरठ के अलावा हापुड़, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, देवबंद, शामली, मुरादाबाद, बुलन्दशहर, बागपत व दिल्ली तक के कई इलाकों में इस प्रकार के ‘फर्जी बकरे’ बेचकर लोगों की आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है।

कच्चे दांत दो हजार और पक्के दांत 11 हजार में

इस पूरे मामले में हमने दंत विशेषज्ञों से भी बात की। उन्होंने बताया कि ऐसा न सिर्फ संभव है बल्कि हो भी रहा है। सदर इलाके के एक डेंटिस्ट ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस समय बकरा मार्केट में लगभग 25 प्रतिशत बकरे ऐसे हैं जिनके दांत नकली हैं या फिर उन पर कैप चढ़ाई गई है। उक्त दंत विशेषज्ञ के अनुसार बकरों को जो दांत लगाए जा रहे हैं वो दो प्रकार के हैं। एक कच्चे दांत व दूसरे पक्के दांत।

कच्चे दांत तो दो हजार रुपए तक में लग जाते हैं, लेकिन पक्के दांत कम से कम 11 हजार रुपये में लगाए जाते हैं। इस संबध में कुछ और जानकारों का कहना है कि जो बकरे काफी तंदरुस्त और बड़े होते हैं और किसी वजह से उनके दांत क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो अधिकतर उन्हीं बकरों में उक्त गिरोह में शामिल लोग दांत लगवा कर ऊंचे दामों में बेच रहे हैं।

जानवर में कोई खामी न हो: राशेदीन

इस संबंध में नायाब शहर काजी जैनुल राशेदीन का कहना है कि कुर्बानी एक संवेदनशील मामला है और इसमें कुर्बानी से पहले यह देखा जाना बहुत जरुरी है कि कुर्बानी का जानवर बे ऐब (बिना कोई खामी वाला) हो।

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यदि उसके दांत क्षतिग्रस्त हैं तो वो अपने आप में एक ऐब हुआ और ऐब वाले किसी भी जानवर की कुर्बानी इस्लाम में जायज ही नहीं है।

एक साल से छोटा न हो बकरा: मौलाना चतुर्वेदी

प्रसिद्ध इस्लामी इस्कॉलर मौलाना मशहूदुर्रहमान चतुर्वेदी का कहना है कि जिस बकरे की कुर्बानी की जाती है वो एक साल से छोटा न हो और उसके दो दांत होना जरूरी है।

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अगर कोई किसी बकरे के क्षतिग्रस्त दांतों के स्थान पर नए दांत अथवा उन पर कैप लगवाता है तो यह शरीयत के हिसाब से बिल्कुल नाजायज है। इस तरह का कार्य करने वाले सीधे खुदा के अपराधी हैं।

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