Thursday, May 21, 2026
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Raksha Bandhan 2025: राखी बांधते वक्त न करें ये गलतियां, वरना हो सकता है अशुभ परिणाम

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती और प्यार का उत्सव है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, उन्हें मिठाई खिलाती हैं और उनकी लंबी उम्र, समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं। बदले में भाई जीवनभर बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं। राखी सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि यह संस्कार, संस्कृति और स्नेह का प्रतीक है।

ब्रेसलेट जैसी राखियां

आजकल बाजार में कई डिजाइन की राखियां भी उपलब्ध हैं, जैसे ब्रेसलेट जैसी राखियां या फैशन से जुड़ी राखियां। ये देखने में जरूर आकर्षक होती हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इन्हें शुभ नहीं माना जाता। रक्षाबंधन का महत्व एक पवित्र और सात्विक धागे में होता है, इसलिए इस मौके पर ऐसी राखियां न चुनें।

भगवान की तस्वीर वाली राखियां

कुछ राखियों में भगवान श्रीकृष्ण, गणेश जी या अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरें लगी होती हैं। लेकिन ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी राखियां पहनना अनुचित होता है। राखी पहनने के बाद उसका जमीन पर गिरना, टूट जाना या फिर बाद में फेंका जाना आम है, जिससे अनजाने में देवी-देवताओं का अपमान हो सकता है।

एविल आई या नजरबट्टू राखियां

कई लोग अपने भाई को नजर से बचाने के लिए ‘एविल आई’ वाली राखी पहनाते हैं। हालांकि इसका उद्देश्य भाई की रक्षा करना होता है, लेकिन धार्मिक रूप से इसे शुभ नहीं माना जाता। इसे नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा प्रतीक समझा जाता है। इसकी बजाय रुद्राक्ष, तुलसी की माला या पीले रंग के पवित्र धागे से बनी राखियां चुनें।

काले रंग की या प्लास्टिक की राखी

हिंदू संस्कृति में काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना गया है। इसलिए रक्षाबंधन जैसे शुभ पर्व पर काले रंग की राखी नहीं बांधनी चाहिए। हालांकि प्लास्टिक से बनी राखियां सुंदर और टिकाऊ लग सकती हैं, लेकिन ये न तो पर्यावरण के लिए अच्छी होती हैं और न ही धार्मिक दृष्टि से इन्हें शुभ माना जाता है। इनसे भाई पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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