Sunday, January 23, 2022
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कोरोना ने नेताओं को डराया!-डिजिटल पॉवर का एहसास कराया, आए छतरी के नीचे ?

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जनवाणी डिजिटल डेस्क |

नई दिल्ली: डिजिटल दुनिया की ताकत का लोहा आखिर कोरोना ने राजनीतिक दलों से मनवा ही लिया। आपको अगर याद होगा तो पीएम मोदी के डिजिटल मुहिम का करीब करीब सभी दलों के नेताओं ने पुरजोर विरोध किया था। आज कोरोना के चलते वर्चुअल चुनावी सभा कराने की चर्चा होते ही सभी नेता डिजिटल टीम की तैयारी में जुट गए। और अंतत: डिजिटल पॉवर की छतरी ने नीचे सरेंडर करना ही पड़ा।

सोशल मीडिया के दिग्गजों का मानना है कि जिन लोगों ने 2019 में सबसे ज्यादा तैयारियां की होंगी, उन्हें ही सबसे ज्यादा इस चुनाव में फायदा मिलने वाला है। हालांकि सभी राजनीतिक दलों का अपना-अपना दावा है कि वह पूरी तरीके से डिजिटल वार रूम के माध्यम से चुनाव लड़ने को न सिर्फ तैयार हैं बल्कि बहुत तेजी से आगे भी बढ़ रहे हैं।

2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान जब देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने आक्रामक रूप से पूरे देश के अलग-अलग राज्यों समेत जिलों में आईटी सेल का गठन करना शुरू किया था, तो उनको इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि 2022 के विधानसभा चुनाव की शुरुआत उस वक्त तैयार किए जाने वाले आईटी सेल के वार रूम से लड़े जाएंगे। अब जब सभी पार्टियां डिजिटल वार रूम से ही चुनाव लड़ने को मजबूर हैं, तो 2019 की तैयारियों का बनाया गया प्लेटफार्म सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हो रहा है।

इनके पास है सबसे मजबूत डिजिटल टीम                                              

पूरे देश में डिजिटल माध्यम से भाजपा और आम आदमी पार्टी ने अपने डिजिटल वॉरियर्स तैयार किए हैं। इन दोनों पार्टियों के पास न सिर्फ आईटी एक्सपर्ट्स हैं बल्कि उनकी अपनी बड़ी-बड़ी टीमें भी लगातार बीते कई सालों से चुनावी मैदान में लगी हुई हैं। भाजपा की यूपी डिजिटल टीम डाटाबेस में बहुत मजबूत है, प्रत्येक बूथ समिति का उनके पास डाटा है। प्रत्येक बूथ के कम से कम पांच सदस्यों के पास स्मार्टफोन हैं जो पार्टी की गतिविधि को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में सक्षम हैं।

सपा ने भी की है डिजिटल तैयारी                                                          

प्रदेश में डिजिटल वॉररूम समाजवादी पार्टी ने भी तैयार कर रखा है। वह अपना संदेश प्रदेश के हर विधानसभा तक डिजिटल माध्यम से पहुंचा रही है।

व्हाट्सएप पर कांग्रेस                                                                              

कांग्रेस की सोशल मीडिया विंग राष्ट्रीय स्तर पर और प्रदेश स्तर पर लगातार अपनी मजबूती दिखाती जा रही है। इस वक्त उत्तर प्रदेश की एक बड़ी आबादी व्हाट्सएप के माध्यम से जुड़ी हुई है। किसी भी संदेश या किसी भी जानकारी और किसी भी लाइव लिंक को व्हाट्सएप पर तत्काल प्रभाव से सेंड किया जाता है ताकि जनता उस लिंक के माध्यम से सीधे जुड़ सके। इस विधानसभा चुनावों में पूरा चुनाव वर्चुअली होता है तो भी कांग्रेस कहीं कमजोर नहीं पड़ने वाली।

बसपा भी किसी से कम नहीं                                                                 

हालांकि वर्चुअल माध्यम से चुनाव प्रचार के लिए सबसे पीछे बहुजन समाज पार्टी पार्टी को ही कहा जा रहा है। लेकिन बहुजन समाज पार्टी के नेता इस बात को मानने से इनकार करते हैं। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि बीते कुछ समय में उनकी पार्टी और उनके कार्यकर्ताओं ने तकनीकी तौर पर अपने नेताओं के भाषण और उनकी रैलियों को न सिर्फ देखा और सुना है बल्कि उसे आगे भी बढ़ाया है। इसलिए 2022 के विधानसभा चुनावों में वह सोशल मीडिया और तकनीकी का सहारा लेकर चुनाव मैदान में मजबूती के साथ खड़े हैं।

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