Tuesday, January 25, 2022
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एनसीईआरटी प्रकरण के लिये गठित होगी एसआईटी!

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  • मुख्य आरोपी संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता की तलाश तेज
  • एसटीएफ की कार्रवाई पूरी, परतापुर पुलिस करेगी विवेचना

जनवाणी संवाददाता|

मेरठ: 60 करोड़ रुपये कीमत की एनसीईआरटी की नकली किताबों के मुख्य आरोपी संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता की गिरफ्तारी के लिये पुलिस ने कार्यवाही शुरु कर दी है।

वहीं इस गंभीर प्रकरण की जांच के लिये एसआईटी की घोषणा सोमवार को हो सकती है। वहीं एसटीएफ ने इस पूरे मामले को परतापुर पुलिस को सौंप दिया है।

पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने वाले गिरोह का पदार्फाश किया है। परतापुर और गजरौला में छापेमारी के दौरान 60 करोड़ से भी ज्यादा की किताबें बरामद हुई हैं।

इन किताबों की सप्लाई दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड समेत देशभर के 20 राज्यों में की जाती थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस गैंग का सरगना बीजेपी का महानगर उपाध्यक्ष संजीव गुप्ता और उसका भतीजा सचिन गुप्ता था। एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने का मामला लखनऊ के सियासी गलियारों में भी गूंज रहा है।

पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी इस मामले में ट्वीट करते हुए भाजपा पर निशाना साधा था। जिसके बाद भाजपा ने आरोपी संजीव गुप्ता को भाजपा महानगर उपाध्यक्ष के पद से निलंबित कर दिया है और अब उसे निष्कासित करने की बात चल रही है।

परतापुर पुलिस ने भी संजीव गुप्ता समेत आठ लोगों पर शिकंजा कसते हुए गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जिसके बाद पुलिस ने चार आरोपियों की गिरफ्तारी भी कर ली। वहीं, संजीव गुप्ता और उसके भतीजे सचिन गुप्ता की तलाश में दबिश दी जा रही हैं।

रविवार की देर शाम को सचिन गुप्ता की गिरफ्तारी की खबर तेजी से उड़ी, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। वहीं, पुलिस सूत्रों का कहना है कि 60 करोड़ के इस घोटाले की जांच के लिये एसआईटी का गठन हो सकता है। इसकी घोषणा सोमवार को हो सकती है।

वहीं, इस मामले में फरार आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। बताया जा रहा है आरोपी संजीव गुप्ता पार्टी में अपने भरोसे के लोगों की मदद से पुलिस पर दबाव डलवाने का काम कर रहा है।

पुलिस ने बताया कि गजरौला और परतापुर स्थित गोदामों की पूरी डिटेल एकत्र की जा रही है और इसके आधार पर तय किया जाएगा कि कितना बड़ा घोटाला किया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि इस बड़े घोटाले में एनसीईआरटी की मिलीभगत की भी शक के दायरे में आएगी।

वहीं, जीएसटी के अधिकारियों ने कर चोरी का आकलन करने के लिये कार्यवाही शुरु कर दी है। कुल बरामद किताबों के आधार पर कर चोरी का आकलन करके टैक्स और पेनाल्टी लगाई जाएगी। इस पूरे मामले की भनक आर्मी इंटेलीजेंस को लगी थी और उसने ही एसटीएफ को सूचना दी थी। सेना का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और न वो इसकी जांच करा रही है।

डीलरों की होगी जांच

पुलिस का कहना है कि एनसीईआरटी के बड़े घोटाले की चेन की तलाश की जाएगी। मेरठ में इससे किताबें कौन-कौन बुकसेलर लेता था उसे भी जांच के दायरे में लिया जाएगा। पुलिस को प्रारंभिक जानकारी मिली है कि पचास से अधिक दुकानदार पाइरेसी की किताबें बेचने में विश्वास रखते हैं।

बड़ौत में छापा

बड़ौत के एक नामी पुस्तक विक्रेता वीके प्रकाशन के घर व गोदाम पर एसटीएफ मेरठ ने छापेमारी की। एसडीम दुर्गेश मिश्र, इंस्पेक्टर अजय शर्मा ने पुलिसबल के साथ छापा मारा। बताया गया है कि मेरठ की एसटीएफ की टीम आधा दर्जन से ज्यादा पुस्तकों का सैम्पल ले गयी है। वहीं दुकानदार ने बताया कि उसकी दुकान से कोई डुप्लीकेट किताब नहीं मिली है। इस दौरान सीओ बड़ौत और भारी पुलिस बल मौजूद रहा।

भाजपा के लिये मुसीबत बना एनसीईआरटी प्रकरण

एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबों का भंडाफोड़ होने के बाद जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष ने आनन-फानन में उपाध्यक्ष और मुख्य आरोपी संजीव गुप्ता को पार्टी से निलंबित किया उससे तमाम तरह के सवाल उठने लगे है।

पार्टी के नेताओं का कहना है कि महानगर की कार्यकारिणी में कुछ लोग ऐसे भी है जो गैरकानूनी काम में लगे हुए हैं और उन पर मेहरबानी दिखाई जा रही है! वहीं, एक प्रश्न यह भी खड़ा हो रहा है कि संजीव गुप्ता के कारोबार की जानकारी तो पार्टी के तमाम जिम्मेदार नेताओं को थी इसके बाद भी खामोशी क्यों धारण किये हुए थे।

एनसीईआरटी प्रकरण में संजीव गुप्ता का नाम सामने आते ही भाजपा की महानगर ईकाई चर्चाओं में आ गई। महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने फजीहत से बचने के लिये उपाध्यक्ष संजीव गुप्ता को पार्टी से निलंबित कर दिया।

ऐसा करके पार्टी अपनी दागदार हो रही छवि को सुधारने का प्रयास कर रही थी तभी भाजपा के तमाम नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया कि महानगर की कार्यकारिणी में कुछ लोग ऐसे भी है जो एनसीईआरटी का काम कर रहे हैं। इसके अलावा नंबर दो के काम भी किये जा रहे हैं, लेकिन महानगर अध्यक्ष खामोश क्यों है।

दरअसल पार्टी को गत वर्ष तेल के खेल में मदद करने के कारण फजीहत का सामना करना पड़ा था। वहीं कैंट विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल का नाम एनसीईआरटी प्रकरण में घसीटा गया। हालांकि विधायक ने इस प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया, लेकिन विरोधी दलों को यह कहने का मौका मिल गया कि सत्तारुढ़ पार्टी के नेता विवादों में घिरे हुए हैं।

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