Wednesday, May 13, 2026
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गंगा खादर क्षेत्र के तट बने अवैध कारोबार की ऐशगाह

  • रोजाना बड़े पैमाने पर हो रहा मछलियों का शिकार

जनवाणी संवाददाता |

भोपा: थानाक्षेत्र में बड़े पैमाने पर शिकारियों द्वारा गंगा नदी में बड़े बड़े जाल डालकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है इस अवैध धंधे में लगे लोग दिन दहाड़े जाल डालकर मछलियों के साथ ही जलीय जीव जन्तुओ के शिकार में लगे हैं। जिसके चलते जलीय जीव जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।

पौराणिक तीर्थनगरी शुकतीर्थ में जीवन दायिनी गंगा की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है।जिसमें बड़ी संख्या में जलीय जीव जंतुओं की विभिन्न प्रजातियां रहती है गंगा में जलीय जीव जंतुओं का विशेष महत्व है जिसके कारण पवित्र जल की शुद्धता बनी रहती है। लेकिन शिकारियों के द्वारा गंगा में बड़े पैमाने पर जलीय जीव जंतुओं का शिकार किया जा रहा है। जिसके कारण जीवो की कुछ प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। लेकिन शिकारी लालच में धड़ल्ले से जलीय जीव जंतुओं का शिकार कर रहे हैं। जिसका प्रभाव जलीय व स्थलीय जीव जंतुओं पर पड़ रहा है। साथ ही जीव जंतुओं के वास स्थान के क्षेत्रफल भी सिकुड़ते जा रहे हैं।भोजन की समस्या भी जीव जन्तुओं के सामने उत्पन्न हो रही है।

कुछ प्रजातियां तो ऐसी है जो लगभग विलुप्त के कगार पर पहुंच गई है और अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। शुकतीर्थ का अधिकांश हिस्सा हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अभयारण्य क्षेत्र में जीव जंतुओं का शिकार करना, उनके वास स्थानों को नष्ट करना, मिट्टी व रेत खनन करना,जीव जंतुओं की गतिविधियों को प्रतिबंधित करना, वृक्षों का कटान करना आदि पूरी तरह से प्रतिबंधित है लेकिन इस धंधे में लगे लोग मौका पाते ही जीव जंतुओं का बड़े पैमाने पर शिकार कर रहे हैं। जिसके कारण गंगा नदी में मछलियों सहित दूसरे जीव जंतुओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

जलीय जंतुओं के शिकार से रोजाना हो रहे लाखों के वारे न्यारे

गंगा नदी में जलीय जीव जंतुओं का शिकार कर रहे शिकारियों की कारस्तानियां जलीय व स्थलीय जीव जंतुओं के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। कुछ ऐसी भी प्रजातियां हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र में हुए बदलावों के चलते अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।कम वर्षा, नष्ट होते जलीय व स्थलीय जीव जंतुओं के वास स्थान, अभ्यारण्य क्षेत्र में बढती लोगों की आवाजाही,मिट्टी व रेत खनन,बढ़ता वृक्षों का कटान,कम होता वृक्षारोपण, वर्षा ऋतु में बदलाव, प्राकृतिक परिवेश में परिवर्तन, प्राकृतिक जल स्रोतों से छेड़छाड़,गंगा नदी में बढ़ता प्रदूषण आदि का असर जलीय व स्थलीय जीव जंतुओं के जीवन को प्रभावित कर रहा है।ऊपर से शिकारियों की कारस्तानियां जीवों के जीवन को अधिक प्रभावित कर रहीं हैं।

वैसे तो वन विभाग के द्वारा अभ्यारण्य क्षेत्र में निवास कर रहे जीव जंतुओं की दैनिक गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।लेकिन शिकारी वन व पुलिस विभाग के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर चोरी छिपे जीवों का शिकार कर रहे हैं।रात के अंधेरे में शिकारी लोग अधिक सक्रिय रहते हैं और विभिन्न तरीकों से अपना जाल फैलाकर जलीय व स्थलीय जीव जंतुओं का शिकार कर रोजाना लाखो के वारे न्यारे करने में लगे हुए हैं।

वर्जन

वन क्षेत्राधिकारी सिंहराज पुंडीर ने बताया कि सूचना पर समय समय पर कार्यवाही कर कई नावों को कब्जे में लिया गया है मामले को लेकर जल्द ही बड़ी कार्यवाही की जाएगी।

वर्जन
अतिरिक्त थाना प्रभारी निरीक्षक रामबीर सिंह ने बताया कि वन विभाग द्वारा सूचना दिए जाने पर मामले में कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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