- तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी एवं अपर नगरायुक्त आमने-सामने
- 10 दिन पूर्व अपर नगरायुक्त के द्वारा डीएम को भेजा जवाब, पोर्टल पर अपलोड नहीं
- शिकायती पत्र में लगाया आरोप अब तक निगम को 33 करोड़ रुपये के राजस्व का हो चुका नुकसान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में कार्यरत 23 कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले में आरोप-प्रत्यारोप के बीच जो फर्जी नियुक्ति का प्रकरण कई वर्षों से चला आ रहा है। वह अब लगातार तूल पकड़ रहा है। मामले में अब अपर नगरायुक्त एवं तत्काीलन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी खुलकर आमने-सामने आ गये हैं। जहां एक तरफ अपर नगरायुक्त ने 10 दिन पूर्व मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत के संदर्भ पर एक पत्र डीएम को भेजा गया था और उसमें सभी 23 कर्मचारियों की नियुक्ति को वैध बताया। अपर नगरायुक्त द्वारा डीएम को इस तरह का जवाब ही नहीं भेजा गया,
बल्कि शिकायतकर्ता तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की गई थी। अपर नगरायुक्त द्वारा जो जवाब डीएम को भेजा गया। उसमें आरोप है कि वह 10 दिन बाद भी पोर्टल पर नहीं चढ़ाया गया। इस मामले में तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ने इस पूरे मामले में अपर नगरायुक्त पर जांच को गुमराह करने वाली तैयार करके भेजने का आरोप लगाते हुये उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।
आप जानते हैं कौन से वह 23 कर्मचारी हैं, जिनकी नियुक्ति शिकायती पत्रों कें सही या गलत बताई जा रही है। पांच चरण में हुई थी यह 23 कर्मचारियों की निगम में स्थाई नियुक्तियां, प्रथम चरण में जावेद पुत्र यूनुस की नियुक्ति ड्राइवर के रूप में। द्वितीय चरण-लिपिक एवं ड्राइवर, अमर देव पुत्र रामपाल स्टेनो, मुहम्मद अली पुत्र शमीम उमर रहमान, मनोज गौड़ पुत्र शिवकुमार, सुनील कुमार पुत्र सोती सिंह, दिनेश कुमार पुत्र रघुवीर सिंह, मोहम्मद परवेज पुत्र यूनुस, धर्मेंद्र उर्फ धर्मेश पुत्र पारशनाथ।
तृतीय चरण में कम्प्यूटर आपरेटर, आलोक शर्मा पुत्र नरेंद्र शर्मा, सुनील कुमार पुत्र नरेंद्र सिंह, सुनीलदत्त शर्मा। चतुर्थ चरण में पटवारी राजकुमार, रुदेश कुमार पुत्र नानक चंद। पंचम चरण में ड्राइवर एवं लिपिक जिसमें मनोज कुमार पुत्र बुद्धप्रकाश, संजय पुत्र सुरेश, शम्स आरिफ पुत्र अब्दुल हकीम, सतीश कुमार पुत्र निर्मल, राजेश कुमार पुत्र पारसनाथ, नौशाद अहमद अनुचर। नुकुल वत्स पुत्र योगेंद्र शर्मा, स्टेनो पीए, हरबीर सिंह पुत्र रामकला, शाकिब खान व राजेंद्र कुमार कोरी शामिल थे।
शिकायती पत्र में तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है। कि इन 23 कर्मचारियों में तत्कालीन नगर आयुक्त के पूर्व स्टेनो का साला, पूर्व स्टेनो का पीए भी इन नियुक्तियों के मामले में शामिल हैं। वहीं डीएम को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि 23 कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। वहां से इन कर्मचारियों के द्वारा जो रिट दायर की गई थी, वह निरस्त हो चुकी है। वहीं, दूसरी ओर कई अधिकारियों की जांच में नियुक्तियों पर सवाल खड़े किये गये
और बिना किसी ठोस जांच एवं तथ्यों के अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय ने 23 कर्मचारियों को किस आधार पर क्लीन चिट दी गई और वह जो पत्र 10 दिन पूर्व डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री पर्टल पर की गई शिकायत के संबंध में गलत दिनांक एवं पत्रांक की जांच को आधार बताते हुये भेजा गया। वह अब तक पोर्टल पर अपलोड क्यों नहीं किया गया। शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि अब तक 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति के मामले में निगम को 33 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हो चुकी है।
अब अपर नगरायुक्त ममता मालवीय के खिलाफ तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग कर डाली है। वहीं, पूर्व में अपर नगरायुक्त ममता मालवीय भी उनके खिलाप डा. प्रेम सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुकी है।

