Saturday, December 4, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutनहीं टूट रहा मेडिकल में प्राइवेट एंबुलेंस का जाल

नहीं टूट रहा मेडिकल में प्राइवेट एंबुलेंस का जाल

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  • मेडिकल के डाक्टरों की शह पर चल रहा खेल, कई बार हो चुकी कार्रवाई

जनवाणी ब्यूरो |

मेरठ: मेडिकल कॉलेज में प्राइवेट एम्बुलेंस का खेल जमकर चल रहा है। मेडिकल कालेज के चिकित्सक नर्सिंग होम संचालकों से मिलकर मेडिकल से मरीज प्राइवेट एम्बुलेंस के जरिए भेज रहे हैं। ये हालात तब हैं, जब दर्जनों बार प्रशासन कार्रवाई करके इनको जब्त कर चुका है, लेकिन यह खेल बदस्तूर जारी है।

मेडिकल में प्राइवेट एम्बुलेंसों का बोलबाला है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेसी के बाहर दर्जनों एम्बुलेंस हमेशा खड़ी दिखाई दे जाएंगी। इन एम्बुलेस वालों के मेडिकल के डॉक्टरों के अलावा निजी अस्पतालों से भी सेंटिग है। पूर्व डीएम अनिल ढींगरा और पूर्व एसएसपी अजय साहनी ने छापा मारकर 29 एम्बुलेंस सीज की थीं।

इसके साथ ही पूर्व एसएसपी रहे जे. रविंद्र गौड़ ने भी तमाम गाड़ियां सीज कराई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से पुराना सिस्टम शुरू हो जाता है। मेडिकल कॉलेज में एम्बुलेंस का जाल इस कदर बिछा है कि इसे तोड़ना मेडिकल प्रशासन के लिए संभव नहीं लग रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को किसी सख्ती की परवाह नहीं है।

हालात यह है कि सरकारी ट्रामा सेंटर पर किसी गंभीर मरीज के आते ही एम्बुलेंस चालक वहां चक्कर काटने लग जाते हैं। एम्बुलेंस चालकों के साथ अस्पताल के कुछ कर्मियों की भी इसमें मिलीभगत है। जिसके कारण यह लोग मरीज को आसानी से मना लेते हैं। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में मेन गेट से लेकर पार्किंग स्थल तक मे प्राइवेट एंबुलेंस हमेशा खड़ी रहती हैं। मेडिकल कॉलेज में दलाल भी एंबुलेंस चालकों से मिले रहते हैं।

वहीं, सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी डॉक्टर बाहर मरीज को जांच के लिए रेफर कर देते हैं। काफी कोशिश के बाद भी इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इससे मेडिकल कॉलेज प्रबंधन परेशान है। पूर्व प्राचार्य डा.आरसी गुप्ता ने डीएम अनिल ढींगड़ा को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। प्राचार्य ने पत्र में लिखा था कि मेडिकल कॉलेज में काफी संख्या में प्राइवेट एंबुलेंस दिन-रात खड़ी रहती हैं।

आपातकालीन (इमरजेंसी) विभाग में आने वाले मरीजों को एंबुलेंस वाले झांसा देकर निजी नर्सिंग होम में ले जाते हैं। मेडिकल थाने की पुलिस को भी इससे अवगत कराया जा चुका था। लिहाजा इन प्राइवेट एंबुलेंस को यहां से हटवाने के दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इस पत्र के बाद डीएम अनिल ढींगड़ा, एसएसपी अजय साहनी, एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी, पूर्व एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह, एआरटीओ समेत तमाम अधिकारियों ने मेडिकल में छापा मारकर 29 एंबुलेंस जब्त की थी। इसके बाद भी यह गोरखधंधा चलता आ रहा है।

प्राइवेट नर्सिंग होम से मिलता है कमीशन

मेडिकल कॉलेज मे प्राइवेट एम्बुलेंस चालक कर्मचारियों की सहायता से मरीज को बहका लेते हैं। उसके बाद मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। इसके लिए एम्बुलेंस चालकों को नर्सिंग होम से मोटी कमीशन भी मिलती है। उधर, एम्बुलेंस चालक कमीशन का कुछ हिस्सा मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मचारियों को भी देते हैं।

एंबुलेंस चालक मरीज के परिजनों को चिकित्सकों द्वारा गंभीर हालत कहने पर इतना डराते हैं कि वह 108 एंबुलेंस को फोन तक नहीं कर पाते। इस बात का भी प्राइवेट एंबुलेस वाले पूरा फायदा उठाते हैं।

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