- शहर में कई जगह ट्रांसफार्मर की जगह पर उग आए बड़े पेड़
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: फोटो में आप जो कुछ देख रहे हैं, ये खेत खलिहान नहीं बल्कि पीवीवीएनएल के ट्रांसफार्मर हैं। शहर में जिन जगहों पर ये ट्रांसफार्मर रखे हैं, उनके चारों तरफ बड़ी बेल, पेड़ पौधे उग आए हैं। ऐसे में पता ही नहीं चल रहा कि ट्रांसफार्मर यहां रखा भी है या नहीं। ऐसे मेें कभी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। शहर में कई जगहों पर ऐसी ही स्थिति देखी जा सकती है।
दिल्ली रोड पर पंजाब नेशनल बैंक ट्रांसपोर्टनगर शाखा के बाहर कुछ ऐसा ही आलम है। यहां ट्रांसफार्मर रखा है, लेकिन इसके चारों तरफ इतने झाड़ झंकाड़, पेड़ पौधे और बेल उग आए हैं कि पता ही नहीं चल रहा कि यहां कोई ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। यही नहीं, दिल्ली रोड पर कई अन्य जगहों पर भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। यह स्थिति किसी भी बड़ी घटना को अंजाम दे सकती है। बिजली विभाग ने इन सबको नजर अंदाज किया हुआ है।
रंगोली बिजलीघर के लाइनमैन ने दिया इस्तीफा
मेरठ: उप खंड अधिकारी के उत्पीड़न से परेशान होकर बिजली विभाग के एक लाइनमैन ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे को लेकर विभाग में एकाएक चर्चा शुरू हो गयी है। अधिकारियों के संज्ञान में भी पूरा मामला लाया गया है। शास्त्रीनगर के रंगोली बिजलीघर पर तैनात एक लाइनमैन ने आज अपना इस्तीफा एमडी को भेज दिया। अपने इस्तीफे में लाइन मैन ने एसडीओ पर उत्पीड़न करने के आरोप लगाये हैं। कहा है कि उनके उत्पीड़न के चलते वह काम करने की स्थिति में नहीं हैं। दूसरी तरफ एसडीओ ने इस तरह के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि काम करने के लिए कहा तो ऐसे आरोप लगाये जा रहे हैं।
रिश्वतखोर दारोगा गया जेल, फर्जी चौकी हुई वीरान
भावनपुर: रिश्वतखोर दारोगा के जेल जाने के बाद उसकी कथित तौर पर बनायी गयी चौकी पर ताला पड़ गया। चौकी के बाहर कुर्सियां भी नजर नहीं आर्इं। जेल गए दारोगा और उनकी सहयोगी दूसरी दारोगा को सस्पेंड कर दिया गया है। एंटी करप्शन की टीम ने दारोगा विक्रम सिंह को बीस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। विवेचना से नाम निकालने के नाम पर पैसा मांगा जा रहा था।
इस पूरे मामले में रिश्वतखोर दारोगा की साथी दारोगा अर्चना को एसएसपी विपिन ताडा ने निलंबित कर दिया था। साथ ही दोनों के खिलाफ जांच बैठा दी। जेल जाने वाला दारोगा काफी चर्चित रहा है। उसने अब्दुल्लापुर में एक दुकान में पुलिस चौकी ही बना ली और तमाम सेटिंग के काम वहीं से करने लगा। जबकि रिकार्ड में चौकी कोई वजूद नहीं था। अब दारोगा के जेल जाने के बाद चौकी वीरान हो गई। उसमें ताला पड़ गया और बाहर रखी रहने वाली कुर्सियां भी हट गर्इं।

