Friday, January 28, 2022
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आखिर कब मिलेगी देदवा के ग्रामीणों को काली के कहर से निजात ?

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  • प्रदूषण विभाग आज करेगा गांव के पानी की सैंपल की जांच

जनवाणी संवाददाता |

लावड़: पश्चिमी यूपी के लिए कलंक कही जा रही काली नदी अब नदी कम नाला ज्यादा नजर आती है, जिसमें गाढ़ा काला और बुजबुजे वाला बदबूदार पानी बहता है। यानि काली नदी के आसपास के इलाकों के पानी में सांस और कैंसर समेत कई बीमारियां देने वाले लैड की मात्रा सामान्य से 10 गुनी ज्यादा है, लेकिन लोगों की समस्याएं यहीं खत्म नहीं होती। खुद स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी मानते हैं कि त्वचा रोग की समस्या बढ़ रही हैं।

प्रदूषित पानी का सेवन करने से बीमारी का दंश झेल रहे देदवा गांव के ग्रामीणों को आखिरकार इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीदें कम लग रही है। क्योंकि शासन और प्रशासन द्वारा इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालांकि प्रदूषण विभाग द्वारा गांव के पानी की जांच के लिए सोमवार को टीम भेजेगा और गांव के पानी की जांच कराएंगे, लेकिन इस प्रदूषित पानी का सेवन करने से बीमारी का दंश झेल रहे ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की गई है। जिसके चलते ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग के रुख को लेकर बेहद परेशान है।

अगर विभाग द्वारा ग्रामीणों के चेकअप के लिए स्वास्थ्य शिविर लगा दिए जाए तो ग्रामीणों की काफी हद तक परेशानी दूर हो जाएगी। लगभग 20 वर्षों से यह गांव उपेक्षा का शिकार हो रहा है। क्योंकि पहले यहां काली नदी का प्रदूषित पानी आता था। जिसके चलते ग्रामीणों को पानी का सेवन करने के लिए आसपास के गांवों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन ग्रामीणों को पानी की आपूर्ति के लिए टंकी स्थापित कर दी, लेकिन आज भी गांव का पानी प्रदूषित बना हुआ है।

गांव के पानी के सैंपल की अगर जांच कराई जाए तो काफी हद तक ग्रामीण कैंसर की जानलेवा बीमारी से जूझते हुए नजर आएंगे। हालांकि अब भी कैंसर की जानलेवा बीमारी से 20 से 30 लोग जूझ रहे हैं। अगर सरकार का रुख इन ग्रामीणों पर हो जाए तो इस गांव के ग्रामीणों को परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा।

पानी नहीं जैसे तेजाब हो

मेरठ के गांव देदवा में यहां नदी की छटपटाहट समझी जा सकती है। लगता है मानों यहां पानी नहीं तेजाब हो। चारों ओर हरे खेत थोड़ा सुकून तो देते हैं, लेकिन दूर से दिखता है कि पंपसेट के जरिये इसी पानी से सैकड़ों एकड़ के आलू, मेथी, मूली के खेत सींचे जा रहे हैं। मन खिन्न हो जाता है।

यहां हैंडपंप का पानी नहीं पीते गांववासी

मेरठ के ही गांव देदवा में कई ग्रामीणों की कैंसर से मौत हो चुकी है। काली की ओर अंगुली उठाते हुए ग्रामीण बोले कि इसी की वजह से मर रहे गांव के लोग। गांव में कई ग्रामीणों को गले का कैंसर है। जनवाणी टीम पहुंची तो घर वालों ने बताया कि डॉक्टर ने हैंडपंप का पानी बंद करा दिया है।

यानी यहां भी रोग की जड़ में पानी और इस पानी का स्रोत काली नदी ही है। आसपास के गांवों में भी यही दिक्कत है। देदवा गांव में भी सभी सरकारी हैंडपंप बंद करा दिए हैं। प्राइवेट हैंडपंप लोगों ने उखाड़ दिए हैं। पानी टंकी या फिर सबमर्सिबल से ही ये पीने, खाना बनाने का पानी लाते हैं।

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