Monday, January 17, 2022
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तीमारदार खुद ही खींच रहे स्ट्रेचर, व्हील चेयर

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  • जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं का बुरा हाल, मरीजों को हो रही भारी परेशान, नहीं ले रहा कोई सुध

जनवाणी संवाददाता  |

मेरठ: जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि जिला अस्पताल में न तो वार्ड ब्वॉय मिलते हैं और न ही अटेंडेंट।

यहां तक कि जिला अस्पताल में कोई उनकी सुनने वाला नहीं है। वहीं, जिला अस्पताल में वार्ड ब्वॉय न मिलने से तीमारदारों को खुद ही स्ट्रेचर और व्हील चेयर को खींचकर ले जाना पड़ रहा है।

इससे तीमारदारों को काफी दिक्कत हो रही है। जिला अस्पताल में शनिवार को भी मरीजों और तीमारदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। तीमारदार खुद स्ट्रेचर लाए, उन पर मरीजों को विभिन्न तलों पर दिखाने के लिए ले गए। वहीं, तीमारदारों ने बताया कि भर्ती मरीजों को जांच आदि के लिए दूसरे भवनों में ले जाने के लिए भी अटेंडेंट उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं, कइ मरीजों को स्ट्रेचर भी नहीं मिली।

जली कोठी निवासी साजिया ने बताया कि उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया था। सर्जरी बिल्डिंग में उनका इलाज चल रहा है। उधर, ब्लड की जांच के लिए उसे दूसरे विभाग में जाने के लिए कहा गया। अटेंडेंट मिला नहीं, मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर मांगा तो उसे आधार कार्ड जमा करने के लिए कहा।

वह आधार कार्ड नहीं लाई थी। इसके बाद उसका मोबाइल जमा करके स्ट्रेचर की व्यवस्था कर दी गई। महिला का कहना था स्ट्रेचर तो बड़ी मुश्किल से मिल गया, लेकिन उसने अपनी बहन के साथ मिलकर खुद ही स्ट्रेचर खींचकर लाई और जांच कराई।

कुंडा गांव निवासी सुरेंद्र ने बताया कि पिता के पैर में फेक्चर हो गया था। जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि हर बार स्ट्रेचर खुद ही खींचकर ले जाना पड़ता है। वार्ड ब्वॉय समय पर नहीं मिल पाते।

कई बार शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन आजतक कोई सुनवाई नहीं हुई। वार्ड ब्वॉय के न मिलने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुरेंद्र का कहना है कि जिला अस्पताल प्रबंधन को इस ओर ध्यान देना चाहिए, जिससे मरीजों को इलाज के दौरान कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

शताब्दीनगर निवासी सोनवीर ने बताया कि उनकी पत्नी रजनी का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पत्नी के पैरों में दिक्कत है। इस कारण चलने में परेशानी होती है। इलाज के लिए व्हील चेयर पर लाना पड़ता है।

इस दौरान न तो कोई अटेंडेंट मिल पाता है और न ही कोई व्हील चेयर के खींचने के लिए वार्ड ब्वॉय। ऐसे में उन्हें खुद ही व्हील चेयर को खींचकर ले जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में व्यवस्थों का बुरा हाल है। मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में काफी धक्के खाने पड़ रहे हैं।

रजबन निवासी सोनू ने बताया कि उनके भाई को इलाज के लिए इमरजेंसी में भर्ती कराना था। बहुत देर इंतजार करने पर भी जब वार्ड ब्वॉय नहीं मिला तो उन्हें स्वयं स्ट्रेचर को खींचकर एंबूलेंस से इमरजेंसी तक खींचकर ले जाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में वार्ड ब्वॉय न होने से उन्हें मरीज को एंबुलेंस तक ले जाने में काफी दिक्कत हुई। जिला अस्पताल प्रबंधन को इस ओर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, लेकिन इसके बावजूद जिला अस्पताल की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जिसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।

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